160 “कर्म-गति”

” जब हम, कोई ग़लत काम करते हैं.तो संसार में नियत-नटी के खेलों को संचालित करने वाली परम् सत्ता ..ईश्वर, अल्ला, वाहिगुरू या गौड जिस रूप में भी हम उसे मानते हैं, प्रतिपल वह ‘शक्ति’ हमारे कर्मों को देख रही होती है। वह हमारे कर्मों का हिसाब रखती है। समय आने पर दंड भी देती है।

जबकि हम जनते हैं जो काम हम, कर रहे हैं यह न केवल घर-परिवार, समाज, देश एवं ईश्वर के संविधान के विपरीत है, दुनियाँ में प्रचलित सारे रीति रिवाज, परम्पराओं आदि के भी विल्कुल विरुद्ध है।”

हम, किसी भी खुशफ़हमी में क्यों न रहें कितनी ही होशियारी में दम क्यों न भरें..

मग़र “हमारे द्वारा जो भी पाप-कर्म होता है। वह चाहे कोई छिपकर करें, या सबके सामने करे उसका दंड हमें भोगना ही होगा।

उसके लिए जैसे; बचपन में चाहे माता पिता दंड दें, बड़े होने पर समाज गांव,नगर, महानगर व देश का हेड-पर्सन दंड दे। या फिर परम-सत्ता ईश्वर दंड दें, हमारे हर पाप कर्म का कभी न कभी कुछ न कुछ दंड तो अवश्य मिलेगा ही।”

यदि हमारा ऐसा माइंड-सेट होगा.. तो विद्वानों के विचार से चलने के कारण हम पाप नहीं करेंगें जानते हुए कभी भी कोई गलती नहीं करेंगें।

वेदों के अनुसार, ऋषियों के संदेश के अनुसार, तथा ‘कर्म-गति’ के अनुरूप ..

हम सबको इस बात से इत्तिफाक रखना होगा। और इसे अच्छी तरह समझने के साथ-साथ अपने ज़हन में ठीक से बिठा लेना चाहिए कि ” व्यक्ति द्वारा किया हुआ ‘कर्म’ कभी भी निष्फल नहीं होता।

उचित समय आने पर अवश्य ही उसका फल मिलता है। “जैसा कर्म वैसा फल”।

कर्म फल मिलने में कई बार देरी जरूर हो जाती है। मग़र अंधेरी न तो कभी हुई है न होगी। हाँ वह बात अलग है। कर्म संस्कार एवं प्रारब्ध के वशीभूत इस जन्म में मिले, या किसी अन्य जन्म में, परन्तु मिलेगा अवश्य।

क्योंकि “कर्म” फल से कभी कोई वंचित रहा नहीं है।

वह तो “भोगना ही होगा।”

इस पर बार-बार चिंतन करें। विचार करें, और इसे गंभीरतापूर्वक समझने का प्रयत्न भी..👍

जिससे कि सब लोग पाप से बचकर पुण्य ‘कर्म’ की ओर मुखातिब हों और अपना भविष्य उज्ज्वल रख सकें। ताकि इन सांसारिक दुखों से छूट कर आत्मिक स्तर पर पूर्ण आनंद की प्राप्ति हो।👍

159 “शहादतें “

क्या आपको अपने इतिहास में अंकित ये शहादतें याद हैं..? कहीं आप भी दूसरों की तरह दुनियादारी की भागमभाग में देश के सच्चे अमर सपूतों की ये अविस्मरणीय “बेमिसाल-शहादतें” भूल तो नहीं गए!!

महानुभाव !

ये जो सप्ताह अभी चल रहा है …… यानि 21 दिसम्बर से ले के 27 दिसम्बर तक …….. इन्ही 7 दिनों में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का पूरा परिवार इस देश के लिए शहीद हो गया था।

एक ज़माना था जब अपने पंजाब में इस हफ्ते …….. सब लोग ज़मीन पे सोते थे …….. क्योंकि माता गूजरी ने वो रात , दोनों छोटे साहिबजादों के साथ , नवाब वजीर खां की गिरफ्त में , सरहिन्द के किले में , ठंडी बुर्ज में गुजारी थी ……..

ये सप्ताह भारत के इतिहास में शोक का सप्ताह होता है …….. .. श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की कुर्बानियों को इस मुल्क ने मात्र 300 वर्षों में भुला दिया अफ़सोस😢

जो कौमें अपना इतिहास अपनी कुर्बानियाँ भूल जाती हैं वो खुद मिटने के कगार पर होती हैं और एक दिन मिट ही जाती हैं..इतिहास बन जाती है ।।। आज के हर बच्चे को इस जानकारी से अवगत कराओ आओ आपको क़ुरबानी की एक ऐसी मिसाल से अवगत करवाते हैं जो दुनियां में शायद ही कहीं मिले:-

21 दिसंबर:

श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने परिवार सहित श्री आनंदपुर साहिब का किला छोड़ा।

22 दिसंबर:

गुरु साहिब अपने दोनों बड़े पुत्रों सहित चमकौर के मैदान में पहुंचे और गुरु साहिब की माता और छोटे दोनों साहिबजादों को गंगू नामक व्यक्ति जो कभी गुरु घर का रसोइया था, उन्हें अपने साथ अपने घर ले आया। …..

चमकौर की जंग शुरू और दुश्मनों से जूझते हुए गुरु साहिब के बड़े साहिबजादे श्री अजीत सिंह उम्र महज 17 वर्ष और छोटे साहिबजादे श्री जुझार सिंह उम्र महज 14 वर्ष अपने 11 अन्य साथियों सहित मजहब और मुल्क की रक्षा के लिए वीरगति को प्राप्त हो गए।

23 दिसंबर :

गुरु साहिब की माता श्री गुजर कौर जी और दोनों छोटे साहिबजादे गंगू के द्वारा गहने एवं अन्य सामान चोरी करने के उपरांत तीनों को मुखबरी कर मोरिंडा के चौधरी गनीखान और मनीखान के हाथों गिरफ्तार करवा दिया गया और गुरु साहिब को अन्य साथियों की बात मानते हुए चमकौर छोड़ना पड़ा।

24 दिसंबर :

तीनों को सरहिंद पहुंचाया गया और वहां ठंडे बुर्ज में नजरबंद किया गया।

25 और 26 दिसंबर:

छोटे साहिबजादों को नवाब वजीर खान की अदालत में पेश किया गया और उन्हें धर्म परिवर्तन करने के लिए लालच दिया गया।

27 दिसंबर:

साहिबजादा जोरावर सिंह उम्र महज 8 वर्ष और साहिबजादा फतेह सिंह उम्र महज 6 वर्ष को तमाम जुल्मों जब्र उपरांत जिंदा दीवार में चिनने के उपरांत जिबह (गला रेत) कर शहीद किया गया और खबर सुनते ही माता गुजर कौर ने अपने प्राण त्याग दिए।

क़ुरबानी की ऐसी अनोखी और शायद दुनिया की इकलौती मिसाल को “शहीदी सप्ताह” जो हमारे लिए एक शोक सप्ताह..और सिख धर्म की बुनियाद का लोगों को पता चल सके..ऐसी भावना से हमने इसे एक लेख की शक्ल देने का प्रयास किया है।

इसीलिए, मेरे साथियों ! इस पूरे “शहीदी-सप्ताह” में अपनी जिन्दगी के कीमती वक्त में से कुछ पल निकाल कर यदि ये सन्देश भारत के जन-जन तक पहुंचा दिया जाय तो शायद उन अमर सपूतों की उन ” बेमिसाल-शहादतों ” के प्रति ये एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी.. वरना भागमभाग में तो सारा वक्त जाया हो ही रहा है। 🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼

158-“Wisdom & Pleasure

“अच्छे विचार के लोग जीवन की हर घटना से सीखते हैं, और सदा सुखी रहते हैं। जबकि अज्ञानी पुरुष हर स्थिति-परिस्थिति में अपना नुकशान ही करते हैं, और दुःखी रहते हैं।”

जब कोई व्यक्ति अच्छा काम करता है, तो समाज में मौजूद प्रबुद्ध-वर्ग उसकी प्रशंसा करता है, उसका उत्साह बढ़ाता है।

“ऐसी स्थिति में, बुद्धिमान लोगों द्वारा की गई प्रशंसा सुनकर उत्तम कर्म करने वाले पुरुष उत्साहित होते हैं। तथा और अधिक पुरुषार्थ करते हैं। वे अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते चले जाते हैं।”

यदि कोई बुद्धिमान व्यक्ति किसी के उत्तम कार्य करने पर कोई टिप्पणी करता है, उसके दोष बताता है, तो वह काम करने वाला बुद्धिमान व्यक्ति, उसकी टीका,टिप्पणी को भी बड़े ध्यान से सुनता है, तब उस पर गंभीरतापूर्वक विचार करता है, कि “क्या वास्तव में मेरे कार्य में कोई कमी रही है। यदि हां, तो वह दुःखी नहीं होता, ना हीं बुरा मानता है, बल्कि और सावधान हो जाता है। उस गलती को भी दूर करके और अधिक उन्नति को प्राप्त करता है।”

“परंतु दूसरे प्रकार के पुरुष जब कोई काम करते हैं, तब चाहे कोई उनकी प्रशंसा करे, चाहे दोष बताए, वे दोनों स्थितियों में दुःखी रहते हैं। और बुरा भी मानते हैं एवं उनकी प्रसंशा करने पर भी वे प्रसन्न, उत्साहित तथा संतुष्ट बहुत कम ही होते। अपने लोभ आदि दोषों के कारण असंतुष्ट एवं दुखी ही बने रहते हैं। और कहते हैं कि “उतना नहीं मिला जितना हम सोच रहे थे, अर्थात उनकी हवस बहुत अधिक होते है।” और यदि कोई उनका दोष बताए, तब तो कहना ही क्या है.. फिर तो वे पूरी तरह विफर जाते हैं।”

इसलिए सदैव बुद्धिमत्ता से काम लेना चाहिए। कोई व्यक्ति हमें हमारे गुण बताए, या दोष.., दोनों को हमें प्रेम पूर्वक सुनाना होगा। निष्पक्ष भाव से उस पर चिंतन करना चाहिए..और

हाँ, यदि कहीं आपके गुणों की सराहना हो रही हो तो, ये सुनकर अपने अंतरमन में एकबार

प्रसन्नता महसूस तो करें परन्तु अपने अंदर भूलकर भी अहंकार को जगह..न दें। और यदि कुछ कमी रही हो, तो उसे तत्काल दूर करें तथा आगे की उन्नति के लिए सदैव पुरुषार्थ में जुटे रहें।

क्या आपको नहीं लगता..? कि यही जीवन का wisdom & Pleasure है। धन्यवाद👍

157-“अभिनंदन”

बड़ों की ‘छत्रछाया’, ‘हमारी संस्कृति’ और ‘हमारे संस्कार’ हम पर बोझ नहीं हैं।

अपितु ये हमारे सुरक्षा कवच हैं। इन्हें बचा कर और सम्भाल कर रखियेगा।

जैसे; अगर आप किसी को नमस्कार ये सोचकर करते हो कि वो भी आपको करेगा, तो ऐसी ‘नमस्कार’ या ‘दुआ-सलाम’ व्यर्थ है। क्योंकि किसी भी प्रकार का आभार/अभिनंदन व्यक्ति अपने अच्छे संस्कारों की वजह से करता है, न कि अहंकार की वजह से .!!

🙏🙏🌹

हिर्दय से प्रणाम/ नमस्कार / वन्देमातरम् आपका दिन मंगलमय हो🙏🙏🌹 ।।

साभार

; योगेन्द्र पचहरा ,

नीमगाँव,राया,मथुरा।

156-No Blind Criticize

ये लेख लंबा जरूर है परंतु आप पढ़ेंगे, तो पाएंगे कि, हर विचार तथ्यों पर आधारित है।

मेरे ख़्याल से, इस लेख में आप समूचे देश की वास्तविक तश्वीर देख पाये..

मग़र आप पहले से ही किसी पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं तो बात अलग है। अन्यथा इस “विचार”  को एक स्वस्थ-मानसिकता से समझते हुए धैर्यपूर्वक एकबार पढ़ लिया जाएं..!! तो, व्यक्ति के मन पर जमीं कार्मिक-लेयर काफी हद तक हट सकती है।👍

हमारे पढ़े लिखे प्राइममिनिस्टर एवं अर्थशास्त्री श्री मनमोहन सिंह जी  vs  आपकी नज़रों में एक अनपढ़, फेंकू, जुमलेबाज आपके “नरेंद्र मोदी”…

बी.एस.एन.एल.  का पहला घाटा 2009 में हुआ.. और कितना..?  10,000 करोड़ का।

Air india के जहाज़ बेचे गए 2010  में,

और कई बार Air India को बेचने की कोशिश भी की गयी, दुर्भाग्य से उचित ग्राहक नहीं मिल सके।

HMT कंपनी का घाटा 2014 में,  नतीजा कंपनी बंद।

  Hdfc, icici जैसी सरकारी कंपनियों को प्राइवेट किया 1996 में। 

SBI जैसे सबसे बड़े बैंक के शेयर बेच कर देश का सबसे कम सरकारी शेयर होल्डिंग वाला बैंक बनाया,

किसी वक्त 57% शेयर की हिस्सेदारी। बैंक में सिर्फ 1 लाख रुपए  तक की सुरक्षा गारंटी थी , जिसे आपके अनपढ़ मोदी ने 5 लाख करा दिया..

  पहले बिना witness के बैंक अकाउंट नहीं खुलता था। ( हमारे मनमोहन जी के राज में।)

अनपढ़ मोदी ने सेल्फ अटेस्टेशन को मान्यता दी, अब किसी witness की जरूरत नहीं।✔️

वरना आज भी एक आधार कार्ड पर,  खुदके हस्ताक्षर की बजाय, नोटरी से अटेस्ट करवाते फिरते और पैसा, टाइम दोनों बर्बाद होते।

ग्रुप C और ग्रुप D की नौकरी के लिए इंटरव्यू लिए जाते थे, जिनमें  सदैव नेताओं और अफसरों के नाते-रिश्तेदार व रिश्वत देने वाले ही चुने जाते थे। 

आपको याद होगा.. डॉक्टर की उपाधि प्राप्त हमारे मनमोहन सिंह जी के राज में एक सफाई कर्मचारी के लिए भी इंटरव्यू होता था, और इन पदों पर इंटरव्यू का मतलव रिश्वत का रास्ता।

  मग़र आपके अनपढ़ मोदी ने आते ही जनवरी 2015 से इन पदों की तो बात छोड़ो माध्यमिक शिक्षा चयन आयोग में T.G.T. शिक्षक  की भर्ती तक में इंटरव्यू बंद कर दिया..

केवल लिखित-परीक्षा में वरीयता सूची के आधार पर युवकों को आज एकदम फेयर तरीके से नौकरी दी जा रही हैं।

लिखित-परीक्षा की अच्छे से तैयारी करके आज गरीब का बच्चा भी अपनी मेहनत से नौकरी में सेलेक्ट हो रहा है। पहले सेटिंग चलती थी, इसलिए रिजल्ट भी बहुत देर से आते थे अब समय से सब कार्य होने लगे हैं।

मनमोहन के राज में किसी गरीब को प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज़ के लिए कोई सुविधा नहीं थी।

अनपढ़ मोदी ने 5 लाख प्रति वर्ष के खर्चे तक का इलाज़ गरीबों के लिए विल्कुल फ्री कर.. अर्थात उनको कार्ड बनाकर दे दिए हैं।

पहले गरीब को सस्ता बीमा उपलब्ध नहीं था। आपके फेंकू मोदी ने मात्र 12 रुपये सालाना में 2 लाख तक के बीमा की सुविधा उपलब्ध करा दी है।

हमारे पढ़े लिखे मनमोहन जी ये सोच तक न सके कि प्राइवेट वर्कर को 60 साल के बाद पेंशन कैसे दें। 

जबकि,आपके अनपढ़ मोदी उनके लिए अटल पेंशन योजना ले आए। जिसमें गरीब को कम से कम 5000 रु महीना पेंशन और सेवा के अंत में 8.5 लाख रु की सहायता राशि का प्रावधान है। 

आपके अनपढ़ मोदी 9 करोड़ फ्री गैस कनेक्शन दे चुके हैं। हमारे मनमोहन जी यहां भी मात खा गए.. वे तो होम-लोन पर भी एक पैसे की सब्सिडी नहीं दे पाये।

  पर बेचारा आपका फेंकू, होम लोन पे 2 लाख 70,000 रुपये वापस दे देता है।   आपको चाय/कॉफ़ी आदि का व्यापार करने के लिए बिना किसी गारंटी के 10 लाख तक का लोन दे देता है।

पढ़े लिखे हमारे चहेते पी एम ने अपने स्मार्ट mind से कितने घोटाले कराये,

ये जग ज़ाहिर है.. 

एक और बात.. महिलाओं को 6 महीने की मैटरनिटी leave दिलवा दी, आपके अनपढ़ ने।

  देखिए कैसी अजीब विडम्बना है..? ये अनपढ़ जो हमारी आंखों में हर वक्त खटकता है। उसी के द्वारा प्रोजेक्ट की गयी “किसान-निधि-योजना” के अंतर्गत देश का हर किसान पॉकेट-मनी की तरह महीने के 500 रूपये चुपके से अपने खाते से निकाल लेता है। फिर भी पी.एम. को गाली देता है। जबकि हमारे अर्थशास्त्री प्राइम मिनिस्टर श्री मनमोहन जी ये ही बोलते रहे..कि, ‘पैसे पेड़ पै नहीं लगते।’

आप ख़ुद जानते हो, जो ये सस्ता unlimited मोबाइल डाटा मिल रहा है ,

ये भी आपके अनपढ़ के राज में हुआ है। और इसकी शुरुआत अम्बानी ने ही की थी जिससे आज  ऑनलाइन पढ़ाई , ऑनलाइन बिज़नेस , ऑनलाइन मीटिंग/कॉन्फ्रेंस आदि संभव हो पायी हैं।

  आज  जो ये रेलगाड़ी के स्लीपर डब्वे में हर जगह मोबाइल चार्जिंग पॉइंट देखते हो, ये भी आपके फेंकू की ही करामात है।

ईमानदार मनमोहन जी तो इतना भी न सोच पाये कि तत्काल का टिकट देने में लोगों को आख़िर इतना परेशान क्यों किया जाता है..?

ये भी इस चाय वाले ने आते ही आते तत्काल टिकट का टाइम बदल कर लोगों की परेशानी को काफी हद तक खत्म ही कर दिया है। 

करंट रिजर्वेशन करके (चार्ट बनने के बाद भी), टिकट  की wastage और यात्री की सुविधा को बढ़ाया।

देश में होने वाली बम व्लास्ट सिरीज़ को तो आप लगभग भूल से ही गए होगे..क्यों..? याद आये वे दिलदहलाने वाले ब्लास्ट..

“wednesday” movie देख लेना, शायद याद आ जाये। आपके मोदी ने चीन बॉर्डर पर कितना सड़क, Armypost बनाया ..? विश्वास न हो तो RTI डालके पूछ लीजियेगा। 

मनमोहन जी के टाइम बिजली की कमी थी, पर आपकेअनपढ़ ने सोलर पावर से उस कमी को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया है।

UP, बिहार वालो को बिजली कितनी मिलती थी ये हम सब जानते हैं। नेताओं की आड़ में जो बेवज़ह की लाल बत्ती सड़कों पर दौड़ते देखते थे,वो भी हर किसी की गाडी पर, उसे भी

हमारे मनमोहन जी ने नहीं आपके मोदी ने ही बंद कराया है। कोरोना में कहा गया की देश में हॉस्पिटल व्यवस्था अच्छी नहीं, जो कि सच भी है। 

पर सच ये भी है कि मनमोहनजी के समय 7 AIIMS ही थे, वो भी अटल जी द्वारा पास की हुई योजनाओं के अंतर्गत बने थे। और आज देश में 

14 AIIMS हैं। ये तो आपके फेंकू मोदी ने फेकते-फेकते बनवा दिए ..

हालांकि देश में अभी और  हॉस्पिटल्स पर भी काम चल रहा है..चिकित्सा सुविधाएं तो देश में पर्याप्त होनी चाहिए, पर सुधार भी हुआ है। पहले से कहीं अधिक..

‘नरेगा’ को हमारे मनमोहन जी ने शुरू अवश्य किया था। मग़र आपके मोदी ने इसका बजट और भी बढ़वा दिया है।

One रैंक one पेंशन जिसे कभी हमारी इंदिरा जी ने बंद किया था, परन्तु उसे आपके मोदी ने फिर से बहाल कर दिया है।

इसका लाभ क्या है..? ये किसी 20 साल पुराने रिटायर्ड फौजी से पूछियेगा👍

One नेशन One राशन को दूसरे राज्यों में काम करने वाले मजदूरों से पूछियेगा

पढ़े-लिखे मनमोहन जी इतना सा काम भी न कर सके..!! ये जो फ़ोन नंबर पोर्ट करते हो न, ये भी मोदी के टाइम हुआ, वरना पहले तो फ़ोन चोरी होते ही नया सिम नया नंबर लेना ही होता था।

  राजघाट 44 एकड़,

शांतिवन 52 एकड़,

विजयघाट भी 44 एकड़

वो भी दिल्ली जैसी जगह पर..!!! जहां जिंदा लोगों के रहने.. तक को जगह नहीं, वहां वेशकीमती जगह मरे हुओं की समाधियों..में घेर के रखदी है वाह! कैसा.. निपट अज्ञान है।

क्षति,जल,पावक,गगन,समीरा। पंच-तत्व मिल बना शरीरा।।

ये पांचों तत्व शरीरांत होने पर स्वतः अपने-अपने स्रोत में वापस मिल जाते हैं। फिर भी आप देखिए इन भटके हुए लोगों ने इस ईश्वरीय व वैज्ञानिक पूर्व निर्धारित-व्यवस्था को किस प्रकार झूठ लाने की हिमांकत की है..!!! 

भटके हुए नेतृत्व ने ऐसी गलत परम्परा डाल दी है..देश कितनी ही परिस्थितियों में क्यों न हो, इन मृत-स्थलों के रख-रखाव के नाम पर प्रति वर्ष करोड़ो रु खर्च करने ही होते हैं।

इस पर सभी चुप रहते हैं।  पर जैसे ही सरदार पटेल की मात्र 5 एकड़ में समाधि नहीं उनकी प्रतिमा जी लगभग 2,000 करोड़ की लागत से तैयार हुई..जबकि जिसमे 500 करोड़ गुजरात, 250 करोड़ केंद्र का or बाकी दूसरे  राज्यों या प्राइवेट फंडिंग से आया है। जिसमे हर साल लाखों लोग टिकट ले ले कर जाते हैं..औसतन 3 साल में 50 लाख लोगों द्वारा देखने की व्यवस्था बनी रहेगी।

मग़र उसकी आलोचना होती है। जहां देश में 15 करोड़ सालाना औसतन एक समाधि का खर्च है, वहां हम कोई विचार-विमर्श भी नही करते, चलो माना वे नेता महान लोग थे, 

तो श्री मनमोहन जी ने देश के सच्चे सिपाहियों अर्थात हमारे निर्भीक रक्षक फ़ौजिओं के लिए फिर एक भी कोई ऐसी जगह कभी मुकर्रर क्यों नहीं की..?

उनके लिए कोई मेमोरियल बनाने का विचार क्यों नहीं आया..?

वो भी आपके चाय वाले को ही करना पड़ा।

इसीलिए ‘दिल्ली’ में देश की आन बान और शान पर मर मिट जाने वाले अमर शहीदों के सम्मान में देश का पहला “वॉर मेमोरियल” भी आपके मोदी ने ही बना डाला।

मनमोहन जी अपने ही मन के महान थे। उन्हें देश के गरीबो के लिए सस्ती दवाई देने की बात उनके मन में कभी नहीं सूझी, 

भाई दवा सस्ता दोगे तो प्राइवेट कंपनी को घाटा होगा, फिर भी डिज़ाइनर लोग ‘प्राइवेट कम्पनिओं के हाथो की कठपुतली’  मोदी को ही कहेंगे।

जबकि उसने सभी के लिए जगह-जगह “जन-औषधि-केंद्र” तक खुलवा दिए!! जहां 70 प्रतिशत तक मार्किट से सस्ती दवाइयां मिलती है,✔️ तो प्राइवेट कंपनी के हाथों की

कठपुतली कौन था . 12 रुपये का बीमा देने वाली सरकार, या वो जिसने कभी किसी को कुछ नहीं दिया .. चलो,बात Ram मंदिर की भी कर लें,  जब तक मंदिर नहीं बना तो हम कहते थे, ये तो बीजेपी का इलेक्शन का नारा है ..

और फिर जब आपके फेकू के वक्त “श्रीराम मंदिर का मुद्दा चाहे कोर्ट ने ही सही सुलझा तो दिया.. ,

फिर हम मौका-परस्तों को मिर्ची क्यों लगी? 

कांग्रेस ने कोर्ट में मंदिर मुद्दे का निर्णय देर से करने की एप्लीकेशन लगाई थी, याद है या ये भूल गए .. विल्कुल,भूल ही गए होंगे आप..

1947 भूले,  सुभाष जी की हत्या भूले, 

शास्त्री जी की रहस्यमय मौत भूले,  1962 की चीन हार भूले जिसमे हज़ारो एकड़ जमीन चीन ले गया, 

आप 1984 भूले ,

1989 कश्मीर भूले,

1992 में राम भक्तों पर चली गोली भूले,

26/11 जैसे अनेक बम ब्लास्ट भूले,  अनेक घोटाले भूले।

डीजल और सिलिंडर की बात करें  तो मेरा स्पष्ट मानना है इसमें सदैव राजनीति होती है।

  जो पार्टी विपक्ष में होती है वो जब सत्ता में होती है तो इन विषय पर कुछ नहीं कर पाती,

क्योकि इन वस्तुओं पर अभी देश आत्मनिर्भर नहीं है ..

तो आपके मोदीजी भी इस विषय पर कुछ नहीं कर पा रहे..

हाँ, कुछ रेट कम करते भी, तो वो कसर कोरोना-महामारी ने निकाल दी, क्योंकि केंद्र की एक्साइज ड्यूटी का अधिकतम पैसा वही लगने लगा है..

102 करोड़ लोगो को मुफ्त टीका, मुफ्त इलाज़, ऑक्सीजन मुफ्त, अनाज मुफ्त, सिलिंडर, वेंटीलेटर और तमाम अन्य सहायता। और कैसे भी सही फिलहाल तो डीज़ल, पेट्रोल के दाम भी कम किये गए हैं।

पर आपने डीजल-पेट्रोल के लिए मोदी को सत्ता में नहीं भेजा, ये तो मनमोहन जी भी कर लेते।

जो कश्मीर से 370 धारा हटी, वो सिर्फ आपके मोदी की ही सामर्थ्य थी।

मोदी CAA लाये, जिससे गैर मुस्लिमो को देश की नागरिकता का हक़ मिला। क्या आप इसे नेक कार्य नहीं मानते।

और मनमोहन जी ने भी सत्ता में रहते हुए खुद यही तो किया था। देश के सामने बहुत सी चुनौतियाँ हैं, और हमारे मनमोहन जी और आपके मोदी जी दोनों ने, अपनी-अपनी क्षमता अनुसार देश के लिए बेहतर ही कोशिश की है ..

बाकी सब आपको तय करना है।

मेरी इस Comparative-Study का मकसद सिर्फ इतना ही है कि,

आप किन्हीं परिस्थितियों वश “अंधभक्त” बन भी जाएं तो एकबार लोगों बहुत ज्यादा असहज नहीं लगेगा.. मग़र किसी का “अंध-आलोचक” बनना तो खुद को किसी गहरे कुंए में कुदा कर खत्म करने जैसा है।

इन सात वर्षों में आपके मोदी जी ने क्या किया..?

जो आज तक स्वतंत्र भारत के इतिहास में कोई नहीं कर पाया। आपको अतिशयोक्ति जरूर लग रही होगी। लेकिन गम्भीरतापूर्वक पढ़ें कहीं बीच में ही छोड़ दिया तो आपकी आँखे बंद ही रह जाएंगी इसलिए पूरा अवश्य पढ़ें ,

, पहली उपलब्धि ,

200 साल तक हमारे देश को गुलाम बनाने वाले ब्रिटेन में 53 देशों की मीटिंग में मोदी जी महा अध्यक्ष बने,,,इसी बात से हर एक भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाना चाहिए,,,

दूसरी उपलब्धि

UN मानवाधिकार परिषद में भारत की बड़ी जीत हुई है,,,सबसे ज्यादा वोटों के साथ बना सदस्य,, 97 वोटों की आवश्यकता थी मिले 188 वोट,,,, क्या अब भी भारत की जनता पूछेगी की मोदी विदेश क्यूँ जाते हैं,,,,

तीसरी उपलब्धि

दुनियाँ के 25 सबसे ताकतवर देशों की हुई लिस्ट जारी,,, भारत आया नम्बर चार पर हमसे आगे अमेरिका, रूस और चीन है,,,ये है मोदी युग,,,

चौथी उपलब्धि ,,

,1 लाख करोड़ के पार पहुँचा GST का मासिक टैक्स कलेक्शन,,,,, ये है एक चाय वाले का अर्थशास्त्र,,,

पाँचवी उपलब्धि ,,,

नए सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने में अमेरिका और जापान को पीछे छोड़ भारत पहुँचा दूसरे स्थान पर,,,,

छठी उपलब्धि,,,,,

2017-18 में दोगुना हुआ सौर ऊर्जा का उत्पादन,,,, चीन और अमेरिका भी दंग है,,,

सातवीं उपलब्धि

भारत की आसमान छू रही GDP को देखकर,,, भारत की GDP 8.2%, चीन की 6.7% और अमेरिका की 4.2%। अब भी कहेंगे भारतीय की मोदी विदेश क्यों जाते हैं,,,

आठवीं उपलब्धि ,,,

जल थल ओर आकाश तीनों क्षेत्रों से सुपरसोनिक मिसाइल दागने वाला दुनियाँ का पहला देश बना भारत,,, ये है मोदी युग,,,अगर आपको गर्व हुआ हो तो जयहिन्द लिखना न भूलें,,,,

नवीं उपलब्धि’ ,,,,

70 सालों में पाकिस्तान को कभी गरीब नहीं देखा,, लेकिन मोदी जी के आते ही पाकिस्तान कंगाल हो गया,,, दरअसल पाकिस्तान की कमाई का जरिया भारतीय नकली नोटों का व्यापार था,,,, जिसे मोदी जी ने खत्म कर दिया,,,

दसवीं उपलब्धि

को भी पढ़ें,,,,,, एक बात समझ में नहीं आयी,,, 2014 में कांग्रेसी रक्षामंत्री ऐ.के. एंटोनी ने कहा था देश कंगाल है हम राफेल तो क्या छोटा जेट भी नहीं ले सकते,,,,पर मोदी जी ने ईरान का कर्ज भी चुका दिया,, राफेल डील भी करली,, S-400 भी ले रहे हैं! आखिर कांग्रेस के समय देश का पैसा कहाँ जाता रहा था,,,?

ग्याहरवीं उपलब्धि ,

सेना को मिला बुलेटप्रूफ स्कार्पियो का सुरक्षा कवच,,, जम्मू कश्मीर में मिली सेना को 2500 बुलेटप्रूफ स्कार्पियो,,,

बाहरवीं उपलब्धि ,,

अब आपको बताता हूँ भारत का इन 4 सालों में विकास क्या हुआ,,, अर्थ व्यवस्था में फ्रांस को पीछे धकेल नम्बर 6 बना,,,

तेहरवीं उपलब्धि ,,,

ऑटो मार्केट में जर्मनी को पीछे छोड़ अब भारत नम्बर 4 पर काविज है।,,,

चौदहवीं उपलब्धि ,,,,

बिजली उत्पादन में रूस को पीछे छोड़ भारत देश नम्बर 3 पर बना,है,,

पन्द्रहवीं उपलब्धि

टेक्सटाइल उत्पादन में इटली को पीछे छोड़ भारत नम्बर 2 पर बना हुआ है,,,

सोलहवीं उपलब्धि

मोबाइल उत्पादन में वियतनाम को पीछे छोड़ नम्बर 2 बना,,,

सत्ररहवीं उपलब्धि ,,,

स्टील उत्पादन में जापान को पीछे छोड़ नम्बर 2 बना,,,

अठारहवीं उपलब्धि ,,,

चीनी उत्पादन में ब्राजील को पीछे छोड़ नम्बर 1 बना,,,

उन्नीसवीं उपलब्धि

राम मंदिर, धारा 370, ट्रिपल तलाक, जिन पर काम जारी है सी.ए.ए .एनआरसी. समान नागरिक संहिता ,जनसंख्या नियंत्रण कानून इत्यादि।

बीसवीं उपलब्धि

हमेशा सोए रहने वाले हिंदूओं में राष्ट्रवाद जगा दिया, पूरी दुनिया के सवा सौ करोड़ हिंदुओं का एक भी राष्ट्र नहीं है।

मैं इस काम को सबसे महत्वपूर्ण मानता हूं। इसको कहते हैं मोदी युग मोदी सरकार में घाटी से हो रहा है आतंकियों का सफाया,,, लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी नवेद वट को मार गिराया,,, हिज्बुल से जुड़े 2 आतंकी ढेर,, 8 महीनों में 230 आतंकियों को 72 हूरों के पास जहन्नुम में पहुंचाया……

कांग्रेस राज में आतंकी दहशत फैलाते थे मोदी राज में सेना आतंकियों के लिए ‘दहशत’ बनी हुई है,,,

ये है मोदी राज का फार्मूला,,,,

मोदी जी की बढ़ती हुई ख्याति से सारा विपक्ष बौखला गया है कि अब उनके भ्रष्टाचारी हथकंडे कामयाब नहीं हो सकेंगे

तब एक अभिमन्यु का वध करने के लिए सारे भ्रष्टाचारिता के महारथी एक होकर चक्रव्यूह की रचना कर रहे हैं

2024 में मोदी को हराने के लिए,,,

लेकिन उन भ्रष्टाचारी महारथियों को यह नहीं मालूम कि द्वापर के अभिमन्यु की चक्रव्यूह भेदन की शिक्षा माँ के गर्भ में ली गयी थी और वो भी केवल घुसने की बाहर निकलने की नहीं, लेकिन इस मोदी रूपी अभिमन्यु ने चक्रव्यूह के भेदन व उसे चकनाचूर करने की शिक्षा माँ के गर्भ से बाहर आकर इस माँ भारती से ली है जो अजेय है पराजेय नहीं है,,,,

लेख के रूप में मेरी इस स्टडी को आप गर्व से पांच ग्रुप मैं भेजे ताकि जन जन तक ये संदेश पहुंचे और सत्य की सार्थकता

155-“जड़-चेतन”

“मन एक जड़ पदार्थ है। जबकि आत्मा चेतन पदार्थ है। जो मनुष्य आत्माएं, इस तथ्य को समझ लेती हैं, स्वामी विवेकानंद के अनुसार केवल वे ही मन को नियंत्रण में रखकर इस जीवन रूपी सल्तनत पर ठीक से राज्य कर पाती हैं। अर्थात वे आत्माएं राजा बन पाती हैं। और यदि कुछ आत्माएं ये नहीं समझ पाती हैं, वे जीवनपर्यंत मन का गुलाम बनने के लिए मजबूर रहती हैं।

संसार में दो प्रकार के पदार्थ होते हैं।

जड़ और चेतन

“जड़ पदार्थ में अपनी कोई इच्छा, स्वयं कुछ क्रिया करने की योग्यता, ज्ञान आदि गुण नहीं होते।

जबकि चेतन पदार्थ में ये सब गुण होते हैं।

चेतन पदार्थ अपनी इच्छा से, अपने ज्ञान से स्वयं क्रियाशील हो सकता है।

जैसे, स्कूटर कार हवाई जहाज इत्यादि जड़ पदार्थ हैं। ये स्वयं क्रिया नहीं कर सकते। क्योंकि इन में अपनी कोई इच्छाशक्ति, ज्ञान आदि नहीं होता।

इसलिए मनुष्य आत्मा ही अपनी इच्छा और ज्ञान आदि से इन सब जड़ पदार्थों का संचालन करती है।

मन एक जड़ पदार्थ है। जैसे.. चेतन-ड्राइवर, स्कूटर, कार, रेल, हवाई जहाज इत्यादि जड़ पदार्थों को चलाता है। ठीक वैसे ही “चेतन्य आत्मा” जड़ रूपी “मन” का संचालन करती है।

“मन चंचल,तो होता है मगर इसकी चंचलता उन पर कहीं अधिक हावी रहती है जो धर्म या शास्त्र विरुद्ध रहते हैं। लेकिन कोई भी जड़ पदार्थ स्वयं कोई क्रिया नहीं कर सकता। उसमें कोई अपना ज्ञान, एवं प्रयत्न आदि करने की क्षमता होती ही नहीं।”

आत्मा अपनी इच्छा ज्ञान प्रयत्न आदि गुणों से मन को क्रियाशील बनाती है। मन में विचार उठाती है। फिर मन के माध्यम से इंद्रियों को प्रेरित करके इंद्रियों तथा शरीर आदि सब जड़ पदार्थों को सक्रिय करके अपने अनुरूप स्तेमाल करते हुए लाभ लेती है।

“यदि हम मनुष्य इस बात को ठीक से समझ लें, मन और बुद्धि दोनों को अपनी चेतन्य आत्मा द्वारा संचालित होने दें, तो ‘आत्मा’ मन, बुद्धि, इंद्रियों और शरीर आदि लगभग सभी जड़ पदार्थों का राजा बनकर शासन कर सकेगी।

तब इन सभी वस्तुओं का संचालन करके आपका जीवन न केवल सुखमय बल्कि आनंदमय हो जायेगा।”

परंतु आजकल लोग इस बात को न तो ठीक से जानते हैं और नहीं समझते हैं।

“अधिकांश लोग जो जीवन की सही राह से भटके हुए हैं..वे मन को ही ‘चेतन’ पदार्थ समझ बैठते हैं। ये ठीक वैसे ही है जैसे ये कॉमन सी बात कि, चंद्रमा में अपना कोई प्रकाश नहीं होता वह सूर्य के प्रकाश से चमकता हैं। वैसे ही ये मन भी सदैव चेतन्य आत्मा से चलता है। लेकिन कितने लोगों के जहन में ये तथ्य सही रूप में हैं..?

इसलिए वे अपने अज्ञान के कारण पहले तो मन को चेतन मानकर उसे क्रियाशील कर देते हैं, मन में ढेर सारी इच्छाएं उत्त्पन्न कर लेते हैं, ढेर सारी योजनाएं बनाते रहते हैं, और फिर अपनी अविद्या या मूर्खता के कारण मन को चेतन मानकर उसके दबाव से उन इच्छाओं की पूर्ति में लग जाते हैं जो एकदम निरर्थक हैं।

जैसे; उदाहरण के तौर पर कोई ड्राइवर पहले तो स्वयं कार को बहुत तेज चला देता है। फिर जब कार नियंत्रण से बाहर हो जाती है, तब वह उसे रोकने की कोशिश करता है। परंतु कार में गति का दबाव इतना अधिक होता है, कि वह चाहते हुए भी कई बार उसे रोक नहीं पाता। तब कार का ड्राइवर ऐसा अनुभव करता है, कि कार उसको नहीं चला रहा, बल्कि अब कार उसे घसीटकर लिए जा रही है। इस स्थिति का दोषी कार नहीं, बल्कि वही ड्राइवर ख़ुद होता है जिसने उसकी ऐसी स्थिति बनाई है।” ठीक वैसे ही अज्ञानी लोग अपने मन को उस “अनियंत्रित कार” वाली स्थिति में पहुंचा देते हैं फिर.. असहज होने पर.. परेशान होते हैं।

दरअसल, होता क्या है अज्ञानी लोगों की

आत्मा पहले तो मन को बहुत तीव्र गति से चलाती है। उसकी चंचलता में फंस जाने पर एकबार को रोकना चाहती भी हैं, लेकिन तब तक मन इतना अनियंत्रित स्थिति में हो चुका होता है, कि आत्मा उसे चाहते हुए भी रोक नहीं पाती।

“जैसे ड्राइवर कार को चलाता है, कार ड्राइवर को नहीं। ऐसे ही चेतन आत्मा मन को चलाती है, मन आत्मा को नहीं।”

अनियंत्रित स्थिति का दोषी मन नहीं, बल्कि आत्मा ही होती है। इस स्थिति में व्यक्ति ऐसा अनुभव करता है कि, जैसे वह मन को नहीं चला रहा, बल्कि मन उसे घसीटे चला जा रहा है। क्योंकि यहां पर आत्मा मन के वशीभूत हो जाती है यह सब स्थिति आत्मा की अपनी अविद्या के कारण ही उत्पन्न होती है। कृपया हमें आत्मा की अविद्या से बचने का प्रयत्न अवश्य करना चाहिए।

इस प्रकार गंभीरतापूर्वक इस सत्य को समझ कर यदि आप अपने मन को नियंत्रित रखें, तो ‘जीवन’ अवश्य सुखमय हो जाएगा ।

“अब आप शरीर तो धारण कर ही चुके हैं। मन इंद्रियां आपके पास हैं, और आप प्रतिदिन इनका संचालन भी कर रहे हैं।

यदि आप मन को जड़ पदार्थ समझते हुए अपनी इच्छा अनुसार इसका संचालन करें, तो यह आपके ‘नौकर की तरह’ काम करेगा। और यदि ऐसा नहीं समझेंगे, तो यह आपका ‘राजा बन बैठेगा, लेकिन अयोग्य राजा.. ये आप जानते ही हैं कि, जब किसी कारण अयोग्य को किसी स्तर पर तैनाती मिल जाती है, तो क्या होता है। ठीक उसी प्रकार वह स्वयं ही अपनी अविद्या के कारण इस मन के पीछे घिसटते हुए चला जाता है।, और अनेकों दु:ख भोगता है।” तो मेरा ऐसा मानना हैं कि, क्यों न समय रहते सही तथ्य को समझकर जीवन का संचालन उचित तरीके से किया जाय..

राधे गोविंद राधे गोविंद

धन्यवाद👍

154 “पुरुषार्थ”

आपको मालूम है, “क्रिया” केवल वर्तमान काल में ही होती है। न भूतो न भविष्यति”

जब ‘क्रिया’ होकर समाप्त हो जाती है, तब वह वर्तमान से भूतकाल में जरूर चली जाती है।

उसी प्रकार जब ‘क्रिया’ शुरू भी न हुई हो, सम्भवतः हो..ने वाली हो, तब वह ‘भविष्यत-काल’ के आवरण में प्रस्तुत की जाती है।

मग़र सक्रिय रूप में ‘क्रिया’ सदैव, होती “वर्तमान-काल” में ही है।

कायदे से जो व्यक्ति अपने जीवन में निरन्तर ‘पुरुषार्थ’ करता है उसका भविष्य उज्जवल होता है। और भूतकाल में रूपान्तरित हुआ उसका पुरुषार्थ अन्य लोगों के लिए प्रेरणादायी..भी होता है।

उदाहरण के तौर पर जैसे कोई व्यक्ति कहता है,

“उसने भोजन लिया।” यहां खाने की ‘क्रिया’ समाप्त हो गयी।

यह भूतकाल है। और उसी प्रकार दूसरा वाक्य में,

“वह भोजन लेगा।”

इसमें खाने की ‘क्रिया’ अभी शुरू ही नहीं हुई.. सम्भवतः हो..गी। ये भविष्यत-काल है।

इसीलिए,

समय की गति के कारण ‘क्रिया’ वर्तमान से भूत व भविष्य में रूपान्तरित जरूर हो जाती हैं।

“वह भोजन खाता है।”

ये ‘क्रिया’ वर्तमान काल में है। जो एक दार्शनिक सिद्धांत है।

अब आप गौर कीजियेगा.. जो आपके जीवन में समस्याएं आती हैं, उनको हल करने के लिए इस दार्शनिक-सिद्धांत के आधार पर व्यक्ति को “पुरुषार्थ” करना ही चाहिए, या कोई न कोई “क्रिया” करनी ही होगी।

दरअसल, व्यक्ति द्वारा की गई सकारात्मक “क्रिया” या”कर्म” को ही “पुरुषार्थ” कहा गया है।

और ये “क्रिया या पुरुषार्थ” जो भी कहें.. वह सदैव ‘वर्तमान-काल’ में ही होता है।

वास्तविक ‘क्रिया’ तो वही है, जो इंसान के भविष्य को संवारती है।”

दूसरे, बीते हुए समय को तो आप बदल नहीं सकते। वह तो बीत गया, और अनुभव देकर चला गया।

अतः प्रत्येक जीवन का ठोस आधार वर्तमान का “पुरुषार्थ” होता है।

इसलिए यदि आप अपना भविष्य सुधारना चाहते हैं, तो आपको वर्तमान काल में किए जाने वाले ‘पुरुषार्थ’ के प्रति सकारात्मक होने के साथ-साथ ईमानदार एवं पूर्ण समर्पित होना होगा।

ध्यान रहे.. ‘पुरुषार्थ’ किये बिना.. केवल योजनाएं बनाते रहने से सुखद परिणाम न तो कभी आए हैं और न कभी आएंगे।

संसार की व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए जीवन को कठिन बनाने वाली समस्याओं पर पहले से विचार करें

“जैसे भूख-प्यास, आंधी-तूफान, बाढ़-भूकंप, महामारी, मंहगाई और बुढ़ापा आदि..से

ठीक तरीके से और समय से निपटने के लिए एक निश्चित रणनीति के तहत तैयारी करनी होती है। वो भी वर्तमान में..

यहाँ मेरा अनुभव कहता है कि,

“जिसने अपना वर्तमान सम्भाल लिया..उसे बीस फीसदी खुदके प्रारब्ध या पूर्व-संस्कारों के अतिरिक्त जीवन में कोई अन्य प्रभावित नहीं कर सकेगा। लगभग अस्सी फीसदी ‘वर्तमान-पुरुषार्थ’ के बल पर वह अपने भविष्य की तरफ से निश्चिन्त भी हो सकेगा।

मग़र यहाँ मैं, अपने बड़े-बुजुर्गों के अनुभव से भी पूर्ण सहमत हूँ कि,

कई बार ये अदृश्य सा बीस फ़ीसदी “प्रारब्ध” लोगों के जीवन में ऐसा भारी पड़ जाता है कि, सबकुछ तहस-नहस कर जाता है। ‘जब आँख खुली तभी सबेरा’ वाले सिद्धांत के आधार पर..

हम सबको अपने ‘कर्म’ की चाल हर हाल में सही रखनी चाहिए.. ऐसा सबक दे जाता है।

“यदि आपका वर्तमान “पुरुषार्थ” करते हुए बीत रहा है, तो आपका भविष्य काफ़ी सुरक्षित है।

जिस प्रकार आप आने वाले वक्त में सुरक्षित यात्रा करने के लिए पहले से ही अपना रेलवे या विमान आदि के लिए रिजर्वेशन करवा लेते हैं। तो उस रिजर्वेशन से आपकी यात्रा न केवल सुखद वल्कि सुरक्षित एवं तनावमुक्त भी हो जाती है।

ठीक वैसे ही जीवन के सभी क्षेत्रों में हमें समय से उचित पुरुषार्थ करना होगा।

पढ़ने के लिए.. आपका बहुत-बहुत 👍 धन्यवाद

153-“सार्थक-जीवन..”

बूढ़ा पिता अपने IAS बेटे के चेंबर में जाकर उसके कंधे पर हाथ रख कर खड़ा हो गया ! और प्यार से अपने बेटे से पूछा…

“दुनिया में सबसे सौभाग्यशाली इंसान तुम किसे मानते हो..”? पुत्र ने पिता को बड़े प्यार से देखा और मुस्कराते हुए कहा “मेरे अलावा कौन हो सकता है पिताजी..? “

पिता को ऐसे जवाब की उम्मीद नहीं थी, उसे विश्वास था कि उसका बेटा गर्व से कहेगा, “पिताजी इस दुनिया के सब से सौभाग्यशाली इंसान आप ही तो हैैं, जिन्होंने मुझे उचित परिवरिश दी जिससे मैं इतना योग्य बना ! और आज यहाँ हूँ..”

उनकी आँखे छलछला आई ! वो चेंबर के गेट को खोल कर बाहर निकलने लगे ! उन्होंने एक बार पीछे मुड़ कर पुनः बेटे से पूछा,

एक बार फिर बताओ इस दुनिया का सबसे सौभाग्यशाली इंसान कौन है..??? पुत्र ने इस बार कहा… “पिताजी आप इस दुनिया के सबसे सौभाग्यशाली इंसान हैं! “

पिता सुनकर आश्चर्यचकित हो गए उन्होंने कहा “अभी तो तुम खुद को इस दुनिया का सबसे सौभाग्यशाली इंसान बता रहे थे, अब तुम मुझे बता रहे हो क्या मज़ाक है.. ?”

पुत्र ने हंसते हुए उन्हें वापस बुलाकर अपने सामने बिठाते हुए..कहा,

“पिताजी ध्यान दो! उस समय आप का हाथ मेरे कंधे पर था, अब आप ही बताइये जिस पुत्र के कंधे पर या उसके सिर पर पिता का हाथ हो वो पुत्र सौभाग्यशाली ही नहीं वल्कि दुनिया का सबसे शक्तिशाली इंसान भी होगा .. आप ही बताइए! पिताजी..होगा या नहीं!”

ये सुनकर पिता की आँखे भर आई उन्होंने अपने पुत्र को कस करके अपने गले लगा लिया !

“किसी ने क्या खूब चन्द पंक्तिया लिखी हैं”

जो पिता के पैरों को छूता है वो कभी गरीब नहीं होता।

जो मां के पैरों को छूता है वो कभी बदनसीब नही होता।

जो भाई के पैराें को छूता है वो कभी गमगीन नही होता।

जो बहन के पैरों को छूता है वो कभी चरित्रहीन नहीं होता।

जो गुरू के पैरों को छूता है उस जैसा कोई खुशनसीब नहीं होता…….

अच्छा दिखने के लिये मत जिओ बल्कि

महोदय! अच्छा बनने के लिए जिओ तो ही “जीवन-सार्थक” है..वरना सब.. निरर्थक है।

धन्यवाद👍

🇮🇳 जय हिन्द 🙏

; युग

152-“दीवाली या दिवाला”

मेरा यानी ‘योगेन्द्र पचहरा’ का देश के “प्रबुद्ध-वर्ग” को कर बद्ध निवेदन है कि, इस साल गिफ्ट की अदला-बदली छोड़ ..कुछ नया विचार करें..👍

मीडिया के हाथों की कठपुतली न बनें..जनता-जनार्दन अपने खुद के विचार से चले और अपना जीवन अपने तरीके से जिये..

पिछले कई दशकों से जो एक परम्परा चल पड़ी है कि, विज्ञापनों के द्वारा जनता के जहन में वो भर दिया जा रहा है जो बड़ी-बड़ी कम्पनियां चाहती हैं।

इसीलिये वक्त रहते सम्भल जाएं अपने इस सुंदर जीवन की गाड़ी का रिमोट मीडिया के हाथों में न दें ।

इस “दीवाली” दोस्तों व रिश्तेदारों को एक नये भाव के साथ बिना किसी गिफ्ट के मिलें। आधी अंग्रेजी आधी हिंदी व उर्दू लव्ज़ बोलकर अपनी भाषा खराब न करें जैसे;- हैप्पी-दीवाली” या दीवाली-मुबारक.. हो बगेराह-बगेराह

सौहार्दपूर्ण मुद्रा में खुश होकर अपने सभी मिलने वालों को “शुभ-दीपावली” बोल दें यही काफ़ी है।

किसी उत्कोच से क्यों..? सभी को हिर्दय से न मिलें।

ये भी क्या परम्पराएँ हम शुरू कर बैठे कि, तुम मेरे यहाँ आना तो गिफ्ट लेते आना और मैं आऊंगा तो आपके घर से गिफ्ट लेता.. जाऊंगा। वाह रे!..वाह! असन्तुलित-इंसान! ये दोहरा आचरण.. कहाँ से सीखा..?

इस त्योहार पर हर वर्ष बड़ी-बड़ी कंपनियां चांदी काटती हैं और मध्यम वर्ग है कि, डिब्बों के रेट उलट-पलट कर देख रहा होता है.. कि, किस दोस्त को क्या देना है, कौन सा रिश्तेदार कितनी हैसियत का है। कोई दोस्त महंगा गिफ्ट देता है तो उसको गिफ्ट भी महंगा ही वापिस करना होगा और कोई हल्का दोस्त तो गिफ्ट भी हल्का दे दो। और कभी कभी तो पिछले वर्षो के गिफ्ट ही दे देते हे।

हर त्योहार पर 10 या 15 दिन पूर्व से एक योजनाबद्ध तरीके से टी.वी. या व्हाट्सएप आदि के माध्यम से पूरे देश में आम जनता के दिमांग को अपने रिमोट से घुमाने का माहौल बना दिया जाता है,

मेरे ख़्याल से आज के दौर में चल रहे विज्ञापनों के पैटर्न को यदि रीड करें ..तो क्या आपको नहीं लगता..? कि, हम टी.वी.के सामने नहीं लोगों को इडियट बनाने वाले किसी “इडियट-बॉक्स” के सामने बैठे हैं। और सारा मीडिया आपको ये बताने पर लगा है कि, कितना-कितना सामान कहाँ- कहाँ बेचा जा रहा है।

ये खबरें नहीं है दोस्तों ! ये आपका दिमाग घुमाने की साजिश है..वो ऐसा माहौल तैयार कर देते हैं कि, आपको लगे सारी दुनिया लगी-पड़ी है सामान खरीदने.. में, सिर्फ आप ही रह गए पीछे..

न केवल “प्रबुद्ध-वर्ग” से वल्कि मेरा तो सभी के लिए परामर्श है कि, त्यौहार पर. इस “विचार” पर काम करेंगे तो दीवाली की आड़ में लोगों का दीवाला निकलने से बच सकता है..👍

इस साल दोस्ती और प्यार को सेलिब्रेट करें….

बड़े-बुजुर्गों के आचरण से एक-दूसरे के प्रति “मुहब्बत या सिला-रहमी” जो हर-पल झलकती थी..हम रोजाना नहीं तो, कम से कम खुले दिल से उसे इस त्यौहार पर सेलिब्रेट करें..? और अपने रोजमर्रा के आचरण में लाने का संकल्प लें..एवं कुछ छोटे छोटे गिफ्ट्स जैसे; बिस्कुट ,लड्डू, फ्रूटी, मोमबती हो सके तो कपडे…इत्यादि उन गरीब बच्चों में जरूर बांटे जो आपको आते-जाते टुकर-टुकर देखते रहते हैं..त्यौहार पर आपसे अपने लिए कुछ रहम की उम्मीद जो पाले हैं।

मेरे ख़्याल से सच्ची “दिवाली” तो यही होगी। वरना, ये त्यौहार पर हर वर्ष आम-आदमी का “दिवाला” तो निकाल ही दिया जाता है…

भाइयो! बदलो समाज को, लाओ नए विचार।शुरु करो कुछ ऐसा…जो है जन-जन की पुकार।। 👍

; योगेन्द्र पचहरा, नीमगाँव,राया,मथुरा 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

151-“बाप-बेटी”

🙏 बाप और बेटी👨‍👧🙏

बेटी की विदाई के वक्त बाप सबसे आखिरी में ही क्यों रोता है..?

चलिए आज इस विषय पर विस्तार से बात करते हैं.. बाकी सब तो उस माहौल में.. भावुक होकर रो देते हैं,

पर माँ-बाप उस बेटी के बचपन से विदाई तक बीते हुए हर एक पल को याद कर-करके हिर्दय की गहराइयों से रोते हैं..

एक और बात..

माँ बेटी के रिश्तों पर तो बात बहुत होती है,

पर “बाप और बेटी” का रिश्ता भी बहुत गहरा होता है.. समुद्र से भी कहीं अधिक गहरा..

आज इसी को फ़ोकस करके मैं,अपने विचारों को एक ‘लेख’ की शक्ल देने का प्रयास कर रहा हूँ..

आपने अक्सर देखा होगा, हर बाप अपने बेटे को डराता है, ..धमकाता है..और, कभी-कभी तो पीट भी देता है।

पर वही बाप अपनी बेटी की हर गलती को झूठ-मूठ की नकली दादागिरी दिखाते हुए.. उसकी माँ के विश्वास पर अक्सर नजर अंदाज कर देता है।

बेटे ने कुछ मांगा तो मना देगा.. पर बेटी ने धीरे से भी कुछ कहा होगा, तो बाप वो भी सुन लेता है, और जेब में कुछ हो न हो पर बाप सदैव बेटी की इच्छा पूरी करने का हर सम्भव प्रयास करता है।

मेरे ख़्याल से “बाप” शब्द को यदि परिभाषित किया जाय तो,.. शायद कुछ यूँ कहा जायेगा..कि, “दुनिया उस बाप का सब कुछ लूट ले तो भी वो हार नहीं मानता, मग़र बेटी की आंख के आंसू देखकर.. भले ही अंदर से बिखर जाए..लेकिन फिर भी उसकी खुशियों के लिए जी..जान लगा दे..मेरे ख्याल से वही ‘बेटी का बाप’ होता है।”

बेटी भी जब तक मायके में होती है, तो उसकी हर बात में बाप का घमंड झलकता है। वो बात-बात पर किसी को क्या.. अपने भाई तक को तपाक से बोल देती है..”पापा को आने दे फिर बताती हूँ.. तुझे!”

बेटी घर में रहती तो, माँ के आंचल में है, पर बेटी की हिम्मत सदैव बाप ही होता है।

बेटी की जब शादी में विदाई होती है तब वो सबसे मिलकर रोती तो है, पर जैसे ही विदाई के वक्त बाप की ओर देखती है, तो वह अपने आपको रोक नहीं पाती.. लिपट जाती है बाप के सीने से और बाप को ऐसा कस के पकड़ती है.. जैसे ; आमतौर पर माँ अपने बेटों को पकड़े रहती हैं।

क्योंकि उस बच्ची को पता है ये बाप ही है, जिसके दम पर मैने अपनी हर जिद पूरी की है। खैर.. बाप खुद रोता है..परन्तु बेटी की पीठ थप थपा कर उसे हिम्मत भी देता है, कि ये दुनियाँ की रीति है.. मग़र बेटा ! मैं दो-चार दिन बाद आऊँगा.. और तुम्हें लिवा लाउँगा। दिल छोटा क्यों करते हो।

और फिर वो अपनी मासूम-बिटिया की याद में अपने ज़ज़वात रोक नहीं पाता..घर के किसी कोने में जाकर रो.. ही देता है, उस वक़्त सिर्फ एक बेटी का बाप ही समझ सकता है कि, उसकी हालत क्या होती है..अपनी स्थिति वो बेटी की माँ को भी शेयर नहीं कर पाता।

वरना, एक मर्द कमज़ोर पड़ जायेगा।

जब तक बाप जिंदा रहता है, बेटी मायके में न केवल हक़ से आती है,वल्कि बड़ी शान से आती है। और घर में किसी भी बात के लिए ज़िद कर लेती है.. और कोई कुछ कहे भी तो डट के बोल भी देती है कि, मेरे बाप का घर है, तो मेरा भी घर है।

लेकिन बाप मर जाता है.. तब बेटी आती है तो वो इतनी चीत्कार करके रोती है कि, सारे रिश्तेदार समझ जाते है कि अब बेटी आ गई है। और वो बेटी उस दिन लगभग अपनी हिम्मत हार सी जाती है। वह अब उसी माइके में खुद को पराया महसूस करने लग जाती है।

क्योंकि उसकी हिम्मत बाप के जाने से बहुत कमजोर पड़ जाती हैं..

ध्यान दीजियेगा बाप की मौत के बाद वही बेटी किसी चीज़ के लिए कभी अपने भाई के घर जिद नही करती है, वह खुद को काफ़ी रूपांतरित कर लेती है। जो मिला खा लिया, जो दिया ले लिया..शायद बाप के बिना उस घर में एक खालीपन सा औरों की अपेक्षा उसे कहीं अधिक खलता है.. !

क्योंकि जब तक उसका बाप था, तब तक सब कुछ उसका था यह बात वो अच्छी तरह से जानती है। आगे लिखने की मेरी हिम्मत नही है, बस इतना ही कहना चाहता हूं कि, हर माँ-बाप के लिए बच्चे उनकी जिंदगी होते हैं, पर बाप की असल जान.. बेटी में ही होती है।

भले ही वो कभी ऐसा बोल नहीं पाता, मग़र ये सच है। और उसी तरह बेटी के लिए ‘बाप’ दुनिया की सबसे बड़ी हिम्मत और उसका घमंड होता है, पर बेटी भी यह बात कभी किसी को बोलती नहीं है। इसीलिए ये रिश्ता न केवल बहुत अजीब है..अपितु पूरी तरह से ‘फीलिंग-बेस्ड’ है।

वास्तव में “बाप-बेटी” का प्रेम व स्नेह समुद्र से भी कहीं अधिक गहराई लिए हुए होता है।

ये लेख सभी प्यारी बेटियों और उनके पिताओं को समर्पित है..👍

; पचहरा, योगेंद्र सिंह

नीमगाँव, राया,मथुरा।🙏🙏👨‍👧👩‍👧🙏🙏