158-“Wisdom & Pleasure

“अच्छे विचार के लोग जीवन की हर घटना से सीखते हैं, और सदा सुखी रहते हैं। जबकि अज्ञानी पुरुष हर स्थिति-परिस्थिति में अपना नुकशान ही करते हैं, और दुःखी रहते हैं।”

जब कोई व्यक्ति अच्छा काम करता है, तो समाज में मौजूद प्रबुद्ध-वर्ग उसकी प्रशंसा करता है, उसका उत्साह बढ़ाता है।

“ऐसी स्थिति में, बुद्धिमान लोगों द्वारा की गई प्रशंसा सुनकर उत्तम कर्म करने वाले पुरुष उत्साहित होते हैं। तथा और अधिक पुरुषार्थ करते हैं। वे अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते चले जाते हैं।”

यदि कोई बुद्धिमान व्यक्ति किसी के उत्तम कार्य करने पर कोई टिप्पणी करता है, उसके दोष बताता है, तो वह काम करने वाला बुद्धिमान व्यक्ति, उसकी टीका,टिप्पणी को भी बड़े ध्यान से सुनता है, तब उस पर गंभीरतापूर्वक विचार करता है, कि “क्या वास्तव में मेरे कार्य में कोई कमी रही है। यदि हां, तो वह दुःखी नहीं होता, ना हीं बुरा मानता है, बल्कि और सावधान हो जाता है। उस गलती को भी दूर करके और अधिक उन्नति को प्राप्त करता है।”

“परंतु दूसरे प्रकार के पुरुष जब कोई काम करते हैं, तब चाहे कोई उनकी प्रशंसा करे, चाहे दोष बताए, वे दोनों स्थितियों में दुःखी रहते हैं। और बुरा भी मानते हैं एवं उनकी प्रसंशा करने पर भी वे प्रसन्न, उत्साहित तथा संतुष्ट बहुत कम ही होते। अपने लोभ आदि दोषों के कारण असंतुष्ट एवं दुखी ही बने रहते हैं। और कहते हैं कि “उतना नहीं मिला जितना हम सोच रहे थे, अर्थात उनकी हवस बहुत अधिक होते है।” और यदि कोई उनका दोष बताए, तब तो कहना ही क्या है.. फिर तो वे पूरी तरह विफर जाते हैं।”

इसलिए सदैव बुद्धिमत्ता से काम लेना चाहिए। कोई व्यक्ति हमें हमारे गुण बताए, या दोष.., दोनों को हमें प्रेम पूर्वक सुनाना होगा। निष्पक्ष भाव से उस पर चिंतन करना चाहिए..और

हाँ, यदि कहीं आपके गुणों की सराहना हो रही हो तो, ये सुनकर अपने अंतरमन में एकबार

प्रसन्नता महसूस तो करें परन्तु अपने अंदर भूलकर भी अहंकार को जगह..न दें। और यदि कुछ कमी रही हो, तो उसे तत्काल दूर करें तथा आगे की उन्नति के लिए सदैव पुरुषार्थ में जुटे रहें।

क्या आपको नहीं लगता..? कि यही जीवन का wisdom & Pleasure है। धन्यवाद👍

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