153-“सार्थक-जीवन..”

बूढ़ा पिता अपने IAS बेटे के चेंबर में जाकर उसके कंधे पर हाथ रख कर खड़ा हो गया ! और प्यार से अपने बेटे से पूछा…

“दुनिया में सबसे सौभाग्यशाली इंसान तुम किसे मानते हो..”? पुत्र ने पिता को बड़े प्यार से देखा और मुस्कराते हुए कहा “मेरे अलावा कौन हो सकता है पिताजी..? “

पिता को ऐसे जवाब की उम्मीद नहीं थी, उसे विश्वास था कि उसका बेटा गर्व से कहेगा, “पिताजी इस दुनिया के सब से सौभाग्यशाली इंसान आप ही तो हैैं, जिन्होंने मुझे उचित परिवरिश दी जिससे मैं इतना योग्य बना ! और आज यहाँ हूँ..”

उनकी आँखे छलछला आई ! वो चेंबर के गेट को खोल कर बाहर निकलने लगे ! उन्होंने एक बार पीछे मुड़ कर पुनः बेटे से पूछा,

एक बार फिर बताओ इस दुनिया का सबसे सौभाग्यशाली इंसान कौन है..??? पुत्र ने इस बार कहा… “पिताजी आप इस दुनिया के सबसे सौभाग्यशाली इंसान हैं! “

पिता सुनकर आश्चर्यचकित हो गए उन्होंने कहा “अभी तो तुम खुद को इस दुनिया का सबसे सौभाग्यशाली इंसान बता रहे थे, अब तुम मुझे बता रहे हो क्या मज़ाक है.. ?”

पुत्र ने हंसते हुए उन्हें वापस बुलाकर अपने सामने बिठाते हुए..कहा,

“पिताजी ध्यान दो! उस समय आप का हाथ मेरे कंधे पर था, अब आप ही बताइये जिस पुत्र के कंधे पर या उसके सिर पर पिता का हाथ हो वो पुत्र सौभाग्यशाली ही नहीं वल्कि दुनिया का सबसे शक्तिशाली इंसान भी होगा .. आप ही बताइए! पिताजी..होगा या नहीं!”

ये सुनकर पिता की आँखे भर आई उन्होंने अपने पुत्र को कस करके अपने गले लगा लिया !

“किसी ने क्या खूब चन्द पंक्तिया लिखी हैं”

जो पिता के पैरों को छूता है वो कभी गरीब नहीं होता।

जो मां के पैरों को छूता है वो कभी बदनसीब नही होता।

जो भाई के पैराें को छूता है वो कभी गमगीन नही होता।

जो बहन के पैरों को छूता है वो कभी चरित्रहीन नहीं होता।

जो गुरू के पैरों को छूता है उस जैसा कोई खुशनसीब नहीं होता…….

अच्छा दिखने के लिये मत जिओ बल्कि

महोदय! अच्छा बनने के लिए जिओ तो ही “जीवन-सार्थक” है..वरना सब.. निरर्थक है।

धन्यवाद👍

🇮🇳 जय हिन्द 🙏

; युग

Leave a comment