140-Degrees without Rituals

‘लड़की’ यानी ‘नारी-शक्ति’ जिस पर हर घर-परिवार का प्रबंध-तंत्र निर्भर होता है। घर के बहू-बेटों का आपसी सामंजस्य ठीक है। तो ऐसा कहा जाता है कि, सब ठीक है वरना कदम-कदम पर नजरें..नीची होती हैं।

जब युवा उच्च शिक्षा प्राप्त करके शादी के बाद ‘गृहस्थ-जीवन’ में कदम रखते हैं, तो उनके लिए वह एक नया परिवेश होता है या फिर यूं समझलें कि, एक प्रकार से उनका नई कक्षा में प्रवेश होने जैसा है..

विशेषकर बेटियों के लिए.. अब ये आवश्यक नहीं कि, उनके मायके वाले घर की तरह बिस्तर पर ही चाय या कॉफी मिले, जब चाहे तब सोए या जब चाहे तब जगें..

ये आवश्यक नहीं, जैसा घर में अपने जन्म देने वाले पिता का स्वभाव था, वैसे ही नए घर वाले पापा अर्थात ससुर जी का स्वभाव भी हो। औऱ जैसा मम्मी का था वैसा ही सासु माँ का भी हो..?

तो इस नई क्लास में उन्हें आवश्यकता होती है सभी रिश्तों के साथ सामंजस्य बैठाने की, अर्थात एडजस्ट करने वाले ‘जीवन-मूल्यों’ को अमल में लाने की, क्योंकि एकैडमिक डिग्रियां तो ऑफिसियल होती हैं।

भारतीय-संस्कृति’ में ‘गृहस्थ-जीवन’ के लिए व्यवहारिक तौर पर..संस्कार.. “धीरज,नम्रता,सहनशीलता,मधुरता और सभी की भावनाओं का सम्मान करते हुए ..मुस्कराकर चलने की कला जैसे ‘जीवन-मूल्य’ बेहद जरूरी हैं।”

लेकिन विडम्बना इस बात की है कि, अध्ययन-काल के समय खुशहाल-जीवन के लिए इन आवश्यक विषयों को हमारे शिक्षण-संस्थानों में व कुछ अति आधुनिक परिवारों में फ़ोकस ही नहीं किया जाता। वहां तो बस यही वातावरण बनाया हुआ है कि किसी भी तरह कागजी डिग्रियां हासिल कर लो तो तुम्हें एक अच्छा पति या अच्छी पत्नी मिल सकती है। और यदि सौभाग्यवश कहीं मैरिट-सैरिट चली तो नौकरी भी हो जाएगी..

लेकिन शादी के बाद कुछ समझदार लड़के या लड़कियां बहुत जल्द ये समझ जाते हैं कि अपने रिश्तों के साथ अच्छे से सामंजस्य बैठाने के लिए उन कागजी डिग्रियों को साइड में रखकर ‘संस्कार व जीवन-मूल्यों’ को अधिक तरज़ीह देनी होगी। ऐसा करने से वे अपने जीवन में वाँछनीय ऊंचाइयों को छूने के साथ-साथ न केवल अपने दोनों कुलों की शान बनकर वल्कि भारतीय-समाज के लिए भी एक सुख-शांति से भरा हुआ आदर्श-जीवन जीने की एक प्रेरणादायक ‘मिसाल’ कायम कर जाते हैं।

मग़र कुछ अड़ियल स्वभाव के युवक-युवती संस्कार व जीवन मूल्यों को इग्नोर करके अपना जीवन अंधकारमय बना लेते हैं। क्योंकि वे किसी ग़लत-फ़हमी या किसी रिश्ते आदि से ग़लत निर्देशन मिलते रहने के कारण परिस्थितियों के साथ तालमेल बैठाने के बजाय तोड़-फोड़ वाले मार्ग पर चल पड़ते हैं। अर्थात ‘पथ-भ्रष्ट’ हो जाते हैं। वे हिम्मत हारे हुए नाकाम लोगों की तरह कायरता पूर्ण निर्णय लेकर अपनी जीवन-लीला समाप्त करने..या कभी-कभी धमकियाँ दे दे कर जीवन की गाड़ी को खींचने की नाकाम कोशिश में अपनी उन्नति करने की अवस्था को यूँ ही जाया कर देते हैं..

जबकि आप ध्यान दीजियेगा कि, पुराने समय में परिवार के बड़े बुजुर्ग भले ही ऑन पेपर बहुत पढ़े-लिखे नहीं होते थे.. लेकिन ‘अनुशासन’ नाम के पाठ को उन्होंने अपने जीवन में दिल से अपनाया होता था.. जो कि.. किसी देश,समाज,संस्था,परिवार या फिर व्यक्ति को हर स्तर पर सम्मान के साथ खड़े रहने के लिए नितान्त आवश्यक है।

इसके लिए “डिसिप्लिन इज द बैक बॉन” को अच्छे से अमल में लाना होगा।

संस्कारों का ये बेस ही था.. जो पुराने समय में बहू-बेटे बड़े बुजुर्गों का बुढ़ापे तक केवल सम्मान ही नहीं करते थे,अपितु पूरे मन से उनकी आख़िरी सांस तक ठीक से सेवा करते रहने को अपना धर्म मानते थे।

जो मूल्यों की गिरावट के कारण आज रेयर हो गया है। तभी बढ़े चिंतिंत मन से आज किसी के भी द्वारा अक्सर कह दिया जाता है कि..

इस क्षेत्र में आज युवाओं की उदासीनता को देखते हुए.. एजुकेशन के मुद्दे पर बड़ी आसानी से “डिग्रीज..हैव नो रिचुअलस.. कह दिया जाता है। जो विचारणीय है…👍

युग,पचहरा,

नीमगाँव, राया,मथुरा।

139-“फ्यूज-बल्व”

आप भी विचार-कीजियेगा ================== हाथरस में (अलीगढ़-आगरा बाई-पास पर नॉएडा पैटर्न पर बनी गेट-बन्द) पॉश कॉलोनी, वसुन्धरापुरम जिसमें मेरा भी घर है..उसमें अभी-अभी.. कुछ हफ्ते दस-दिन पूर्व एक बड़े आईएएस अफसर रहने के लिए आए हुए हैं..जो हाल ही में सेवानिवृत्त हुए हैं।‌

ये बड़े वाले रिटायर्ड आईएएस अफसर हैरान परेशान से रोज शाम को मेरे घर के सामने वाले पार्क में टहलते हुए अन्य लोगों को बहुत ही तिरस्कार भरी नज़रों से देखते.. और कई दिन तक तो किसी से बात तक नहीं करते थे।

आख़िर एक दिन एक बुज़ुर्ग के पास शाम को गुफ़्तगू के लिए बैठ ही गए..और फिर लगातार उनके पास बैठने लगे.. लेकिन उनकी वार्ता का विषय वही था –

“मैं इतना बड़ा आईएएस अफ़सर था कि पूछो मत, यहां तो मैं, मजबूरी में रहने आ गया हूं। वरना! मुझे तो दिल्ली में ही बसना चाहिए था और वो बुजुर्ग बड़े शांतिपूर्वक उनकी बातें सुना करते थे। उनकी अहम भरी बातों से परेशान होकर एक दिन जब बुजुर्ग ने उनको समझाते हुए कहा कि, महोदय! आपने कभी “फ्यूज-बल्ब” देखे हैं..? बल्ब के फ्यूज हो जाने के बाद क्या कोई देखता है‌ कि‌ बल्ब‌ किस कम्पनी का बना‌ हुआ था या कितने वाट का था या उससे कितनी रोशनी या जगमगाहट होती थी? बल्ब के‌ फ्यूज़ होने के बाद इनमें‌‌ से कोई भी‌ बात बिलकुल ही मायने नहीं रखती है। लोग ऐसे‌ बल्ब को‌ कबाड़‌ में डाल देते‌ हैं। ये है‌ कि नहीं..? फिर जब उन रिटायर्ड‌ आईएएस अधिकारी महोदय ने सहमति‌ में मजबूरन सिर‌ हिला कर जब सहमति दी, तो‌ बुजुर्ग फिर बोले‌ – रिटायरमेंट के बाद हम सब की स्थिति विल्कुल उस फ्यूज बल्ब जैसी हो‌ जाती है‌। हम‌ कहां‌ काम करते थे‌, कितने‌ बड़े‌/छोटे पद पर थे‌, हमारा क्या रुतबा‌ था,‌ यह‌ सब‌ कोई मायने‌ नहीं‌ रखता‌।

मैं इस सिविल-सोसाइटी में पिछले कई वर्षों से रहता हूं और आज तक किसी को यह नहीं बताया कि मैं दो बार संसद सदस्य रह चुका हूं। वो जो सामने वर्मा जी बैठे हैं, रेलवे के महाप्रबंधक थे। सामने से सिंह-साहब आ रहे हैं वे सेना में ब्रिगेडियर थे। मिस्टर मेहरा जी इसरो में चीफ थे। ये बात भी उन्होंने किसी को स्वयं कभी नहीं बताई, मुझे भी नहीं पर मैं, उम्र दराज हूँ,तो उन सबके सम्पर्क में आने के बाद उनकी बातों से भांप लिया हूँ।

एक और बात कहूँ..सारे फ्यूज़ बल्ब करीब-करीब एक जैसे ही हो जाते हैं, चाहे जीरो वाट का हो या 50 या 100 वाट का हो। कोई रोशनी नहीं‌ तो कोई उपयोगिता नहीं। जैसे; उगते सूरज को जल चढ़ा कर सभी पूजा करते हैं। मग़र डूबते सूरज की कोई पूजा करते देखा है क्या..?

कुछ लोग अपने पद को लेकर इतने वहम में होते‌ हैं‌ कि‌ रिटायरमेंट के बाद भी‌ उनसे‌ अपने अच्छे‌ दिन भुलाए नहीं भूलते..चलो ना भूलो लेकिन जिस समाज के लिए कुछ सराहनीय किया नहीं उसे किस हक से अहम दिखाते हैं..?

ऐसे लोग अपने घर के आगे‌ नेम प्लेट लगाते‌ हैं – रिटायर्ड आइएएस‌/रिटायर्ड आईपीएस/रिटायर्ड पीसीएस/ रिटायर्ड जज‌ आदि – आदि। अब ये‌ रिटायर्ड IAS/IPS/PCS/तहसीलदार/ पटवारी/ बाबू/ प्रोफेसर/ प्रिंसिपल/अध्यापक कौन-सी पोस्ट होती है भई..? ज़रा हमें भी बताओ..

माना‌ कि‌ आप बहुत बड़े‌ आफिसर थे‌, बहुत काबिल भी थे‌, पूरे महकमे में आपकी तूती बोलती‌ थी‌ पर अब क्या? अब इस बात के कोई मायने नहीं होते, बल्कि इस बात के कुछ मायने अवश्य होते हैं कि, पद पर रहते हुए.. आप इंसान कैसे‌ थे…आपने‌ कितनी जिन्दगियों को छुआ…आपने आम लोगों के हालातों को कितना महसूस किया, और फिर उन्हें कितनी तवज्जो दी…समाज को क्या दिया…कितने लोगों की मदद की…अभी वर्तमान में पद पर रहते हुए कभी किसी को घमंड आये तो बस आप भी याद कर लीजिएगा कि, एक दिन सबको “फ्यूज” होना ही है।

ये उन लोगों के लिए आईना है जो पद और सत्ता होते हुए कभी अपनी कलम से समाज का हित नहीं कर सकते। और रिटायरमेंट होने के बाद उन्हें समाज के लिए बड़ी चिंता होने लगती है। अरे भई! अभी भी वक्त है इस लेख को पढ़िए और चिंतन करिए तथा आपके द्वारा समाज का जो भी संभव हो सके उसका हित करिए तथा सभी को एक नेक शिक्षा मिल सके इसलिए आप भी इसे आगे फारवर्ड अवश्य करिये । धन्यवाद……👍 राधे गोविंद राधे गोविंद युग, पचहरा, 88A वसुन्धरापुरम, हाथरस

138-“दो-पल”

“दो-पल” अपने लिए भी …

कभी फुर्सत के पलों में या प्रत्येक रात्रि को आराम फ़रमाते वक़्त नींद के आग़ोश में जाने से पूर्व..

जब हम बिस्तर पर होते हैं, उस वक़्त सिर्फ “दो-पल” आत्मचिन्तन के रूप में यदि हम अपने दिनभर के सारे “क्रिया-कलापों पर पुनः एक सरसरी नज़र डालने को अपनी रोज की आदत बना लें,और किसी भूलबस जाने अनजाने में या किसी मद में आकर हमारे द्वारा हुई खामियों को उसी वक्त सुधारने का एक संकल्प ले लिया जाय, तथा दिनभर के अपने ‘सारे-कर्म’ एवं ख़ुद को भी अपने इष्ट या मेरे “गोविंद” को समर्पित कर दिया जाय..

तो मेरा ऐसा मानना है कि जीवन की राह से भटकाने वाली दुनियादारी की “कार्मिक-लेयर” जो हमारी आत्मा पर दिन-प्रतिदिन जमती चली जातीं हैं..मेरे ख़्याल से इतनी मजबूती से फिर न जम सकेगी, तो यहां मेरा ऐसा मानना है कि, हम ‘पथ-भ्रष्ट’ होने से बचे रहेंगे..?

और जब पथभ्रष्ट नहीं होंगे तो ज़ाहिर सी बात है..हमारा जीवन सदैव खुशहाल एवं शांतिपूर्ण तो होगा ही जो डिजायरेबल है..👍

; युग, पचहरा, नीमगाँव

🙏🌹राधे-गोविंद🌹🙏

137-“काया-पलट”

जी हाँ, यदि देश के सभी सभ्रांत नागरिक थोड़ी देर के लिए अपने पूर्वाग्रहों से बाहर निकल कर..निजी हितों को किनारे करके विचार करें, और सदैव राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें, तो मेरा ऐसा मानना है कि, किसी भी स्तर पर जैसे ; परिवार,समाज, संस्थान, देश या फिर दुनियां का भी “काया-पलट” हो सकता है।

आपको जानकर खुशी होगी कि, इसी “आठ अगस्त 2021” को देश में एक इतिहास रचने जा रहा हैं..देश के सच्चे सपूतों की भावनाओं की कदर करते हुए.. मुझे तो पहली बार अपने आजाद-भारत में कोई ‘सकारात्मक-आन्दोलन’ शुरु होने की आहट हुई है !

इससे नेहरू और गाँधी की वास्तविक तश्वीर उजागर होने जा रही है। जो देश के डिजाइनर नेताओं और पत्रकारों ने सदैव से छुपा रखी थी।

मैं पूरी तरह से तन, मन , धन और अपनी जानकारी के साथ इस उद्देश्य में समर्पित हूँ !!

मित्रों ! किसी भी बात की पहले हक़ीकत जानिए तब मानिए… लेकिन उसके बाद जो निर्णय लीजिएगा वह देश हित में ही लीजियेगा।

पहले, तो आप देश के पुराने कानूनों को हटाकर, नए, न्यायपूर्ण, राष्ट्रीय कानूनों को अमल में लाने हेतु , राष्ट्रवादी,बुद्धिजीवी,संस्कृति-प्रेमियों द्वारा संचालित इस “देशव्यापी-आंदोलन” को जानने हेतु अपना अमूल्य समय दीजिए..

🇮🇳 राष्ट्रीय पहल 🇮🇳

सुप्रीम कोर्ट के राष्ट्रवादी, हिन्दूवादी वरिष्ठ वकील श्री अश्वीनी उपाध्याय 8 अगस्त 2021 को दिल्ली में पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ की टीम के साथ उन पुराने और अंग्रेजो के द्वारा बनाए गए 200 काले एवं घटिया कानूनों को बदलने तथा हटाने के लिए एक आंदोलन करने जा रहे है जिनको बनाकर अंग्रेजो ने इस देश को लूटा था, इस देश की सनातन संस्कृति,गुरुकुल वाली शिक्षा पद्धति आदि को नष्ट किया था। और अंग्रेजों के बाद इन घटिया कानूनों के द्वारा कांग्रेसी, वामपंथी, कम्युनिस्ट और अलगाववादी जैसी राष्ट्रविरोधी ताकत जो इन गलत कानूनों की आड़ में सरकार तक में घुसपैठ किए बैठे हैं, और देश को लगातार लुटे चले जा रहे हैं। कौन नहीं जानता..इन कमजोर कानूनों की मदद से ही ये सारे राष्ट्रविरोधी राजनीतिक दल हमेशां से देश के खिलाफ षडयंत्र करते रहे हैं !!!

हिंदुओं का धर्मांतरण तक कर रहे हैं , इन कानूनों की वजह से ही देश का हिंदू देश में ही केरल, कश्मीर, बंगाल जेसे राज्यों से पलायन करने को मजबूर हुआ.. और इन राज्यो मे हिंदु व हिन्दू संस्कृति कमजोर क्या! लगभग नष्ट ही हो गई

इस आंदोलन में श्री अश्विनी उपाध्याय जी के साथ देश के उच्च शिक्षित और उच्च पदों पर सेवा दे चुके लोग शामिल हैं जो राष्ट्र को बचाना चाहते हैं और घुसपैठियों को भगाना चाहते है, हिन्दू सनातन संस्कृति की रक्षा करना चाहते है, जिहाद, आतंकवाद की समस्या को जड़ से खत्म करना चाहते हैं वे वन्दनीय,पूज्यनिय व्यक्तित्व हैं..

सर्वश्री – :

1.जनरल GD बक्क्षी (पुर्व आर्मी आफिसर)

2.कर्नल RSN सिंह (पुर्व RAW आफिसर)

3.सूशील पंडित(1990 के पीड़ित कश्मीरी पंडितों के नेता)

4.विष्णु शंकर जैन(सुप्रीम कोर्ट मे राम मंदिर के पक्षकार)

5.देवदत्त मांझी (बंगाल के राष्ट्रवादी हिन्दूवादी नेता)

6.अंकुर शर्मा (जम्मू कश्मीर के राष्ट्रवादी नेता)

7.आध्यात्मिक गुरु पवन सिन्हा

8. दिल्ली मे सुभाषचंद्र बोस का म्यूजियम बनाने वाले .. प्रोफेसर कपिल कुमार

9.1990 के पीड़ित कश्मीरी पंडित ललित नंबरदार

10.देश मे कांग्रेस ओर कम्युनिस्टों द्वारा बनाए गए education system को उजागर करने वाले। नीरज अत्री

11.विक्रम सिंह (उ.प्र के पुर्व DGP)

12.RVS मणि (केंद्र सरकार मे पुर्व officer)

13.यति नरसिंहानंद सरस्वती जी (डासना मंदिर विवाद मे जिहादियों का विरोध करने वाले)

14.कालीचरण महाराज 15.captain सिकंदररिजवी(पाक अधिकार वाले कश्मीर प्रांत गिलगित बाल्टिस्तान के नेता)

16.अभिनेता पूनीत इस्सर (महाभारत के दूर्योधन)

17.वसीम रिजवी(कुरान की 26 आयतो के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने वाले)

18. एन.के सूद (पुर्वRAW officer)

19.मेजर गौरव आर्य(पुर्व indian army officer)

20. विवेक अग्निहोत्री (फिल्म निर्माता, निर्देशक) तथा मैं और आप भी सहयोगी बनकर इन राष्ट्रवादी, राष्ट्रप्रेमी लोगों के इस आंदोलन का हिस्सा हो सकते हैं !!

संभवतः 1947 के बाद ये देश का पहला ऐसा आंदोलन होगा जिसमे राष्ट्रीय चेतना होगी ओर देशभक्त लोग शामिल होगे अभी तक देश मे बडे़ आंदोलन (CAA एवं NRC के खिलाफ शाहीन बाग..राजनीतिक स्वार्थ के लिए और राष्ट्र को तोड़ने के लिए गद्दारों ने दुश्मन देशों की मदद से किए है पर यह पहला आंदोलन है जो राष्ट्रहित मे, हिन्दूधर्म के हित में और भारतीय संस्कृति के हित में है और 2011 के अन्ना हजारे के आंदोलन की तरह गुमराह भी नही होगा !

याद रखना – :

1-भारत के 9 राज्यों मे हिन्दू 10% से कम हो चुके है वहा दुश्मन देशों के दलाल सरकार चला रहे है !

2- कांग्रेस ने 2006 मे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ जाकर अप्लसंख्यक आयोग बनाया जो इन गद्दारो को कई तरह की सुविधा देता है !

3- वक्फबोर्ड जमीन का कानून जिसके कारण ही मथुरा मे कृष्णजन्म भुमि पर ईदगाह बन गई !

4-हमारे दिये Tax से मदरसो के मोलवी ओर जमातियो को वजीफा, पेंशन आदि दिया जा रहा है ।

5- हिन्दूमंदिरों के चढ़ावे, पैसे पर देश की सरकार का कब्जा है।

सरकार ये पैसा हिन्दू समाज के लिए उपयोग नही करती जबकि मस्जिदों का चढ़ावा, पेसा मुस्लिम समाज के लोगों के लिए और उनकी धार्मिक गतिविधियों के लिए ही उपयोग होता है और आप जानते ही हो ये गतिविधियां किस प्रकार की हैं ?

ये तो हुए वो मुद्दे जो हिन्दूधर्म, हिन्दू संस्कृति के खिलाफ है इनके अलावा ओर भी बहुत से कानून नियम हिन्दू धर्म के विरोध मे है और अब वे कमजोरियाँ , वे मुद्दे और कानून जो देश को खोखला कर रहे है !!

6- करोड़ों रुपये का घोटाला करने के बाद भी किसी नेता को सिर्फ 7 साल की सजा क्यों ?

7- भारत मे ही घुसपैठ क्यों हो रही है अमेरिका, चायना, इजराइल और फ्रांस में क्यो नहीं..?

8- लगभग 9 राज्यों में हिन्दू अल्पसंख्यक हो चुका है लेकिन उसे अल्पसंख्यक का दर्जा और अल्पसंख्यकों को दी जाने वाली सुविधाएं नही मिल रही.. क्यों ?

9- देश मे मुसलमानों को अपने धर्म की शिक्षा ओर धार्मिक ग्रंथ कुरान को पढा़ने की अनुमति है पर हिन्दूओ को नही क्यों ?

10- देश मे मिलावटखोरो के लिए भी 7 साल की सजा, बलात्कारियों के लिए भी 7 साल की सजा, धर्म परिवर्तन करवाने वालो के लिए भी 7 साल की सजा, देश से गद्दारी करने वाले के लिए भी 7 साल की सजा, करोड़ों रुपये का घोटाला करने वालो के लिए भी 7 साल की सजा और तो और कई मामलो मे देश पर हमला करने वाले, देश के खिलाफ षड्यंत्र करने वाले को भी 7 साल की सजा ही मिलती है क्यों ???

देश की सारी समस्याओं की जड़ इस तरह के लगभग 200 से ज्यादा कानून है जो अंग्रेज़ों ने कई वर्षों पहले अपने हिसाब से देश को लुटने के लिए बनाए थे। इनको बदलना हटाना बहुत आवश्यक है। अभी सरकार भी देश के अनुकूल है।

अगर 100 करोड़ हिन्दूओ मे से 50 करोड़ हिन्दू भी अपने राष्ट्र के लिए, अपने धर्म के लिए चिंतित है और उनमे से 10% यानि 5 करोड़ लोग भी अगर 8 अगस्त को दिल्ली पहुँच जाते हैं, तो सरकार को आपकी बात, आपकी मांगे माननी ही होगी!!

इस आंदोलन के आयोजक और कार्यकर्ता वे लोग हैं जो इस देश की सरकारी सेवाओ (सेना,खुफिया एजेंसी, पुलिस शिक्षा,ब्युरोक्रेसी आदि ) ज़िम्मेदार पदों पर ईमानदार भूमिकाओं में पूरी मुस्तेदी के साथ अपने जीवन की पहली पारी खेल चुके हैं। और आज हम सब के अर्थात आने वाली पीढ़ी के लिए दूसरी पारी की अहम भूमिका निभाने को दृढ़-संकल्पित हैं। और हर तरह का खट्टा-मीठा अनुभव उनके पास है.. बस आवश्यकता है,तो सच्चे और अच्छे लोगों के सच्चे सहयोग की।

माना कि हर कोई दिल्ली नहीं जा सकता। परन्तु इस मेसेज की सहायता से सच्चे लोगो को इस मुहीम से जोड़ने का प्रयास तो कर ही सकता है।

मैं आप सब से ही पूछता हूँ ..?

क्या हर राष्ट्रप्रेमी-नागरिक के पास ये जानकारी नहीं होनी चाहिए..? चिंतन कीजियेगा

जय हिन्द जय भारत ..

याद रखिये ये इतिहास

“8 अगस्त 2021″🇮🇳🇮🇳 रचा जा चुका है…

साभार 👍

136″आईना”

!! दर्पण झूठ न बोले..!!

“मैं, तो आईना हूँ मेरा तो काम ही है चेहरे के दाग दिखाने का।

जिन्हें हक़ीकत बर्दास्त नहीं और ख़ुद में तब्दीली करना स्वीकार नहीं, उनके लिए फिर भी मेरा परामर्श है वो ‘वैचारिक-रूपांतरण’ का ट्रीटमेंट तो ले ही सकते हैं..

मेरा मतलव..

‘जब आँख खुली तभी सबेरा’ वाले सिद्धांत के तहत हमें समय रहते अपनी कमियों का ‘मेक-उप’ कर ही लेना चाहिए.

और यदि ऐसा नहीं कर सकते, तो तत्काल प्रभाव से हट जाएं मेरे (आईने) सामने से, क्योंकि मैं तो आईना हूँ। मैंने कभी किसी को अंधेरे में नहीं रखा..मेरा तो स्वभाव ही है हक़ीक़त से रूबरू कराने का..so please don’t mind transform yourself.”

thanks👍

; युग,पचहरा, (जैन कॉलेज,सासनी, हाथरस।)

135-“संघे शक्ति कलयुगे”

अकेले हम ‘बूँद’ हैं, मिल जाएं तो ‘सागर’ हैं,

अकेले हम ‘धागा’ हैं, मिल जाएं तो ‘चादर’ हैं,

अकेले हम ‘कागज’ हैं, मिल जाएं तो ‘पुस्तक’ हैं,

मेरे ख़याल से जीवन का आनंद मिलजुल कर रहने में ही है।

ये खुशहाल जीवन जीने का एक मूल-मंत्र है। खुश रहो और सदैव आपस में खुशिया बाँटते रहो..

धन्यवाद👍

🌹🙏राधे गोविंद 🙏🌹

134- “शिक्षा”

“शिक्षा का अर्थ किसी घड़े को भरने जैसा तो नहीं होता..,

जहाँ तक मैं समझता हूँ, शिक्षा का अर्थ व्यक्ति के अंदर ज्ञान का ऐसा प्रकाश प्रज्वलित करना है। जिसके प्रकाश से न केवल स्वयं का जीवन प्रकाशवान हो, वल्कि एक शिक्षित व्यक्ति के जीवन-काल में जितने लोग सम्पर्क में आएं उनमें से अधिकतर के लिए वह एक “सेन्टर ऑफ लाइट” की भूमिका में हो…

कम से कम इतना हो..तो कहीं “शिक्षा” के कुछ मायने समझ आते हैं।”👍

; युग,पचहरा,नीमगाँव, राया, मथुरा।

🙏🌹राधे गोविंद🌹🙏

133- “फ़र्क”

🔥देश में एक सच्चे शासक के काविज होने..और सत्ता-सुख भोगने वाले शासकों के एक लम्बे अर्से तक कुर्सी से चिपके रहने.. इन दोनों बातों में बड़ा “फर्क” है..

आइए इतिहास में झांकते हैं..इस “फ़र्क” को ‘एक सच्चे-देशभक्त’ के नज़रिए से देखते हुए… समझने का प्रयास..करते हैं..

आपको विंग कमांडर अभिनंदन का नाम तो शायद अभी याद ही होगा… और उनकी ’हैंडल बार’ मूछें तो आप विल्कुल भूल ही नहीं पाए होंगे..

लेकिन इसी भारतीय वायु सेना के कुछ अन्य जांबाज़ पायलट के मैंने कुछ नाम लिखे हैं.. इनकी तस्वीरें देखना तो दूर, हममें से कोई एकाध ही होगा जिसने ये नाम सुन रखे होंगे। लेकिन इनका रिश्ता अभिनंदन से बड़ा ही गहरा है। पहले ये नाम पढियेगा…. विंग कमांडर हरसरण सिंह डंडोस, स्क्वाड्रन लीडर मोहिंदर कुमार जैन, स्क्वाड्रन लीडर जे एम मिस्त्री, स्क्वाड्रन लीडर जे डी कुमार, स्क्वाड्रन लीडर देव प्रशाद चटर्जी, फ्लाइट लेफ्टिनेंट सुधीर गोस्वामी, फ्लाइट लेफ्टिनेंट वी वी तांबे, फ्लाइट लेफ्टिनेंट नागास्वामी शंकर, फ्लाइट लेफ्टिनेंट राम एम आडवाणी, फ्लाइट लेफ्टिनेंट मनोहर पुरोहित, फ्लाइट लेफ्टिनेंट तन्मय सिंह डंडोस, फ्लाइट लेफ्टिनेंट बाबुल गुहा, फ्लाइट लेफ्टिनेंट सुरेश चंद्र संदल, फ्लाइट लेफ्टिनेंट हरविंदर सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट एल एम सासून, फ्लाइट लेफ्टिनेंट के पी एस नंदा, फ्लाइट लेफ्टिनेंट अशोक धवले, फ्लाइट लेफ्टिनेंट श्रीकांत महाजन, फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुरदेव सिंह राय फ्लाइट लेफ्टिनेंट रमेश कदम, फ्लाइट लेफ्टिनेंट प्रदीप वी आप्टे, फ्लाइंग ऑफिसर कृष्ण मलकानी, फ्लाइंग ऑफिसर के पी मुरलीधरन, फ्लाइंग ऑफिसर सुधीर त्यागी, फ्लाइंग ऑफिसर तेजिंदर सेठी, भले ही आपको ये सभी नाम अनजाने लगे होंगे।

मग़र ये भी भारतीय वायुसेना के योद्धा थे जो 1971 की जंग में पाकिस्तान में युद्ध बंदी बना लिए गए,दुर्भाग्यवश फिर कभी वापस अपने देश नहीं आए। इनकी चिट्ठियां घर वालों तक आई, पर ‘उस-समय’ की भारत सरकार ने कभी इनकी खोज खबर नहीं ली।

1972 में शिमला में ’आयरन लेडी’ के रूप में प्रसिद्ध तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो के साथ हुए शिमला समझौते में 90 हज़ार पाकिस्तानी युद्धबंदियों को छोड़ने का समझौता तो कर आई, पर इन्हें वो भी भूल गई। मग़र ये विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान जितने खुशकिस्मत न थे। क्योंकि इनके लिए उस समय की सरकार ने मिसाइलें नहीं तानी, न देश के लोगों ने इनकी खबर ली, न अखबारों ने फोटो छापे। इन्हें मरने व सड़ने को, पाकिस्तानी जेलों में ही छोड़ दिया गया। इनके वजूद को नकार दिया गया।

और यह पहली बार नहीं हुआ था। रेज़ांगला के वीर अहीरों को भी नेहरू ने भगोड़ा करार दिया था। परमवीर मेजर शैतान सिंह भाटी को कायर मान लिया था। अगर चीन ने इनकी जांबाज़ी को न स्वीकारा होता, एक लद्दाखी गडरिये को इनकी लाशें न मिली होती,अगर ऐसा नहीं हुआ होता,तो ये अहीर वीर न कहलाते, शैतान सिंह भाटी मरणोपरांत परम वीर चक्र का सम्मान न पाते।

गांधी नेहरू कुनबों का देश के वीर सपूतों के प्रति यही रवैया रहा है। और यही फ़र्क़ है मोदी के होने और न होने का। आप कल्पना भी नहीं कर सकते कि अगर मोदी की जगह उनका गूंगा पूर्ववर्ती होता तो शायद अभिनंदन का नाम भी इसी लिस्ट में लिख गया होता..?

धन्यवाद👍

जय हिन्द..जय भारत 🔥 सभी का साभार-अभिनंदन 🙏

132- “अनुशासन”

सही और ग़लत की समझ मनुष्य-आत्माओं में शुरू से ही होती है.. जो कि ईश्वर-प्रदत्त है।

मग़र हम सबके सामने असल चुनौती, अपने ‘चंचल-मन’ को काबू में रखकर सदैव संयम के साथ ‘अनुशासन’ में रहने की होती है।

स्वामी विवेकानंद जी ने अपनी एक पुस्तक में लिखा है कि, “शिक्षा का प्रथम पाठ ‘मन’ को अपने नियंत्रण में रखना है,न कि मन के बहकाने में आकर भटकाव मोड.. पर चले जाएं।”

ये सामान्य जन के लिए अंतरभेद की स्थिति होती है।

यदि आप इसे एक और नज़रिए से देख पाओ,तो दुनियाँ में स्वाभिमान से जीने के लिए “अनुशासन” एक ‘मूल-मंत्र’ भी हो सकता है।

ये जग ज़ाहिर है कि, जब, जब किसी देश,समाज,संस्था,परिवार या फिर व्यक्ति ने अपने आचरण में अनुशासन हीनता को जगह दी है.. उसका बंटाढार ही हुआ है।

क्योंकि किसी व्यक्ति,परिवार,समाज या फिर देश को सही व्यवस्था में लाने के लिए ‘अनुशासन’ को रीढ़ की हड्डी माना जाता है। जिस प्रकार रीढ़ की हड्डी के बिना मानव शरीर सीधे खड़ा नहीं हो सकता, ठीक वैसे ही किसी भी कार्य, व्यक्ति या देश को वांछनीय व्यवस्था में लाने के लिए “अनुशासन” को ही सक्षम माना गया है।

इसीलिए अनुशासित होना नितान्त आवश्यक है।…

धन्यवाद👍

युग, पचहरा, नीमगाँव 🙏🌹 राधे गोविंद 🌹🙏

131- “व्यवहार”

अपने माँ-बाप के साथ किया जाने वाला हमारा ‘व्यवहार’ एक ऐसा निबंध है, जिसे हर घर में लिखते, तो माँ-बाप हैं,

मग़र भविष्य में उसे पढ़कर सुनाती हमारी ‘संतान’ हैं।

धन्यवाद👍

🙏🌹राधे गोविंद🌹🙏