अकेले हम ‘बूँद’ हैं, मिल जाएं तो ‘सागर’ हैं,
अकेले हम ‘धागा’ हैं, मिल जाएं तो ‘चादर’ हैं,
अकेले हम ‘कागज’ हैं, मिल जाएं तो ‘पुस्तक’ हैं,
मेरे ख़याल से जीवन का आनंद मिलजुल कर रहने में ही है।
ये खुशहाल जीवन जीने का एक मूल-मंत्र है। खुश रहो और सदैव आपस में खुशिया बाँटते रहो..
धन्यवाद👍
🌹🙏राधे गोविंद 🙏🌹