136″आईना”

!! दर्पण झूठ न बोले..!!

“मैं, तो आईना हूँ मेरा तो काम ही है चेहरे के दाग दिखाने का।

जिन्हें हक़ीकत बर्दास्त नहीं और ख़ुद में तब्दीली करना स्वीकार नहीं, उनके लिए फिर भी मेरा परामर्श है वो ‘वैचारिक-रूपांतरण’ का ट्रीटमेंट तो ले ही सकते हैं..

मेरा मतलव..

‘जब आँख खुली तभी सबेरा’ वाले सिद्धांत के तहत हमें समय रहते अपनी कमियों का ‘मेक-उप’ कर ही लेना चाहिए.

और यदि ऐसा नहीं कर सकते, तो तत्काल प्रभाव से हट जाएं मेरे (आईने) सामने से, क्योंकि मैं तो आईना हूँ। मैंने कभी किसी को अंधेरे में नहीं रखा..मेरा तो स्वभाव ही है हक़ीक़त से रूबरू कराने का..so please don’t mind transform yourself.”

thanks👍

; युग,पचहरा, (जैन कॉलेज,सासनी, हाथरस।)

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