126- “किरदार”

हम सबको को अपना “किरदार” सदैव बहुत अच्छे से निर्वहन करना चाहिए…..

क्योंकि..

मेरा ऐसा मानना है कि, जीवन की समाप्ति पर लोगों के ज़हन में हमारी ज़िन्दगी से जुड़ा हुआ यदि कुछ वाकी रह जाता है, तो वह हमारी ‘छबि’ अर्थात “किरदार” ही रहा जाता है..

जो प्रारब्धवश हमने अनेक परिस्थितिओं से ताल-मेल बिठाते हुए ताउम्र ‘जिया’ होता है।

जैसा भी है.. विल्कुल वैसी ही लोगों के दिल-ओ-दिमांग में हमारी एक इमेज सेट हो जाती है..जो परिवार, समाज, संस्था एवं देश-दुनियाँ बिच ज़िन्दगी के बाद भी समय-समय पर लोगों द्वारा याद किया जाता रहता हैं। वही है है आपका “किरदार” है।

धन्यवाद👍

;YUG,पचहरा, नीमगाँव, राया, मथुरा 🙏🌹राधे गोविंद🌹🙏

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