125- “भाव”

” ‘भाव’ बिना बाजार में, वस्तु मिले ना ‘मोल’

तो ‘भाव’ बिना “प्रभु” कैसे मिलें, जो हैं..विल्कुल ‘अनमोल’ “

“बातचीत”…. भी यूं तो एक शब्द ही है, पर ‘स्वस्थ-मानसिकता’ के साथ ‘सच्चे-भाव’ से ‘बातचीत’ की जाए, तो मेरा ऐसा अनुभव है कि, दिलों के वर्षों पुराने मैल भी धुल जाते हैं।

बशर्ते कि ‘बातचीत’ करने के लिए दोनों पक्षों का “भाव” एक समान हो..!! क्यों..?

धन्यवाद👍

योगेन्द्र सिंह पचहरा, नीमगाँव,राया,मथुरा

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