127-“सर्वश्रेष्ठ-शिक्षक”

सच में “सर्वश्रेष्ठ शिक्षक” ..कोई व्यक्ति नहीं..

वे मानक होते हैं जो व्यक्ति को ‘मानव-मूल्यों’ पर आधारित अपने कर्त्तव्य के प्रति सदैव अनुशासित और समर्पित रखते हुए सत्कर्म करते रहने के लिए प्रेरित करते हैं।

जहां ‘ऊर्जा’ व्यक्ति को कर्म करने की सामर्थ्य प्रदान करती है वहीं ‘समय’ व्यक्ति को जीवन की कीमत का एहसास कराता रहता है।

किसी व्यक्ति द्वारा होने वाले दैनिक क्रिया कलापो में ‘समय एवं ऊर्जा’ का “उचित संश्लेषण” ही उसको सर्वश्रेष्ठ शिक्षक के दायरे में लाता है।

ऐसे गुरु में आस्था रखने वाले शिष्यों के ‘जीवन’ भी अवश्य सँवर जाते है।

जय हिंद👍 जय भारत

🌹🙏 राधे गोविंद 🙏🌹

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