मनुष्य के पास सबसे बड़ी ‘स्थाई-पूँजी’ उसके अपने ‘अच्छे-विचार’ होते हैं..
क्योंकि ‘धन’ और ‘बल’ एक तो सदैव रहते नहीं हैं, दूसरे इनकी अधिकता किसी को भी गलत राह पर चलने को बाध्य कर सकती हैं।
किन्तु “अच्छे-विचार” मनुष्य को हमेशा सद्मार्ग पर चलते रहने को ही प्रेरित करते हैं।
इसलिए मेरा तो यही मानना है कि, इस दुनियाँ में मनुष्य के पास “विचार” से बड़ी कोई “स्थाई-पूँजी” है नहीं।
इसी सन्दर्भ में .. अंग्रेजी के एक बहुत ही मशहूर कवि ‘Mr.जॉन मिल्टन’ के वो शब्द यहाँ प्रासंगिक हैं..
He said that,
“Only two things are permanent in this world
No.1 Thinking,
No.2 implemented-Task on the basis of thought.
rest of things are not only temporary but also ephemeral.”
अर्थात “दुनियाँ में सिर्फ दो ही चीजें स्थाई हैं।
न.1 “सोच”
न.02 “विचार” यानि वैचारिक धरातल पर मनुष्य द्वारा खड़ा किया हुआ ‘कृतित्व’।
वरना दुनियाँ भर में ‘वो सब’ जो हम अपनी आँखों से देख रहें हैं न केवल ‘क्षणभंगुर’ है वल्कि पूर्णरूप से ‘अस्थाई’ है- टेंपरेरी है।
फ़ैसला आपके हाथ में है..”परमानैंट” की ओर अग्रसर होते हैं या अस्सी प्रतिशत भौतिक जगत की बड़ी भीड़ की तरह परम्परागत तरीके से “टेंपरेरी” जाल में ‘मनुष्य-जीवन’ को उलझाकर प्रायश्चित करते हुए एक दिन दुनियाँ को ‘गुडबाई’ कर जाते हैं।
धन्यवाद👍
🙏🌹 राधे गोविंद 🌹🙏