119-“चारपाई..”

!! सरवाइकल !! या अनेक बीमारियों का वाजिब कारण मेरा तात्पर्य सोने के लिए खाट हमारे पूर्वजों की सर्वोत्तम खोज है। हमारे पूर्वजों क्या लकड़ी चीरना नहीं जानते थे ? वे भी लकड़ी चीरकर उसकी पट्टियाँ बनाकर डबल बेड बना सकते थे। डबल बेड बनाना कोई रॉकेट सायंस नहीं है। लकड़ी की पट्टियों में कीलें ही ठोंकनी होती हैं।

हाँ, चारपाई भी कोई सायंस नहीं है , लेकिन वह एक समझदारी है कि शरीर को स्वास्थ्य के साथ-साथ उचित आराम कैसे दिया जा सकता है..?

चारपाई बनाना एक कला जरूर है। उसे रस्सी से बुनना पड़ता है और उसमें दिमाग और श्रम दोनों लगते हैं। जब हम सोते हैं , तब सिर और पांव के मुकाबले पेट को अधिक खून की जरूरत होती है

; क्योंकि रात हो या दोपहर!! लोग अक्सर खाने के बाद ही सोते हैं। पेट को पाचनक्रिया के लिए अधिक खून की जरूरत होती है। इसलिए सोते समय चारपाई की वह झोली जैसी बनावट ही स्वास्थ लाभ पहुंचाती है।

मग़र कमर-दर्द वालों के लिए हार्ड-बेड आवश्यक है, तो उसकी जगह लकड़ी के तख़्त हुआ करते थे।

दुनिया में जितनी भी आरामकुर्सियां देख लें, सभी में चारपाई की तरह झोली बनाई जाती है। बच्चों का पुराना पालना सिर्फ कपडे की झोली का था , लकड़ी का सपाट बनाकर आज उसका भी आकर बिगाड़ दिया गया है।

चारपाई पर सोने गर्दन,कमर और पीठ आदि का दर्द कभी नही होता है। जबकि दर्द होने पर चारपाई पर सोने की सलाह दी जाती है।

एक और बात डबलबेड के नीचे अंधेरा होता है , उसमें रोग के कीटाणु पनपते हैं , वजन में भारी होता है तो रोज-रोज सफाई नहीं हो सकती। चारपाई को रोज सुबह खड़ा कर दिया जाता है और सफाई भी हो जाती है, सूरज का प्रकाश बहुत बढ़िया कीटनाशक है। खटिये को धूप में रखने से उसके जर्म्स आदि भी नहीं रहते हैं।

अगर किसी को डॉक्टर Bed Rest लिख देता है तो दो तीन दिन में उसको English Bed पर लेटने से Bed -Soar शुरू हो जाता है । भारतीय चारपाई ऐसे मरीजों के बहुत काम की होती है । चारपाई पर Bed Soar नहीं होता क्योकि इसमें से हवा आर पार होती रहती है । गर्मियों में इंग्लिश Bed गर्म हो जाता है इसलिए AC की अधिक जरुरत पड़ती है जबकि सनातन चारपाई पर नीचे से हवा लगने के कारण गर्मी बहुत कम लगती है । बान की चारपाई पर सोने से सारी रात Automatically सारे शरीर का Acupressure होता रहता है । गर्मी में छत पर चारपाई डालकर सोने का आनंद ही कुछ और है। ताज़ी हवा , बदलता मौसम, तारों की छाव ,चन्द्रमा की शीतलता जीवन में उमंग भर देती है । हर घर में एक स्वदेशी बान की बुनी हुई (प्लास्टिक की नहीं ) चारपाई होनी चाहिए ।

सस्ते प्लास्टिक की रस्सी और पट्टी आ गयी है, लेकिन वह सही नहीं है। स्वदेशी चारपाई के बदले हजारों रुपये की दवा और डॉक्टर का खर्च बचाया जा सकता है..! धन्यवाद

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