118-“पूर्व-संस्कार”

“एक मासूम की प्रार्थना” ❣️❣️

एक बच्चा लगभग रोज अपने नानू को सन्ध्या-वंदन करते देखता था। ये रोजाना देखने से मासूम के अन्तर्मन में शायद इसे एक दिन स्वयं करने का भाव दिनों दिन बढ़ता जा रहा था, किन्तु अभी वो छोटा था..दूसरे उसके नानू की घर पर नियमित मौजूदगी से उसे ये अवसर मिल भी नहीं पा रहा था।

एक दिन उसके नानू को ‘पंचायत चुनाव’ की सरकारी ड्यूटी के काम से न केवल बाहर जाना पड़ा, वल्कि शाम को उन्हें अपने बूथ पर रुकना भी था…मासूम को जिसका इंतज़ार था सौभाग्य से शायद उसे वो मौका मिल गया..था।

मौके का लाभ उठाते हुए वह जैसा रोजाना देखता था,वैसे ही ‘संध्या-वंदन’ करना शुरू कर दिया… मग़र उसके नानू की ड्यूटी शहर के नज़दीक ही थी,दूसरे उनके नवराते चल रहे थे, तीसरे उनकी ड्यूटी ‘बाई द वे’ रिज़र्व-पार्टी में आ गयी थी..इन सब कारणों से वे ‘सन्ध्या-वंदन’ के लिए दस-पांच मिनट की देरी से अचानक घर पर पहुँच जाते हैं..

अब नानू ने अपने उस मासूम साथी को, जो धीरे-धीरे नानू के फ़ास्ट फ़्रेंड की जगह लेता जा रहा था, बेहद प्रेरणादायक रूप से संध्या-वंदन करते हुए पाया.. वे चुपके से देखते रहे.., बच्चा आल्ती-पालती लगाकर उनके ही एक अंगोछे से अपने आपको चकमुद उढ़ाकर.. जैसे उन्हें रोजाना देखता था.. लगभग वैसे ही एकाग्र सी मुद्रा में..मानो, ईश्वर को हाज़िर-नाज़िर मानकर अपनी मासूम सी तोतली जुबान में बुद्-बुदाते हुए..कुछ कहने का प्रयास कर रहा हो.. पहले, उसने ‘भगवान जी की जय’ बोली..जय बोलने के बाद उसने अपनी भाषा में जो कहा उसका भाव कुछ इस प्रकार है…कि,

हे प्रभु! आप मेरे ‘नानी-नानू’ को सदैव स्वस्थ रखियेगा, ये दोनों मुझे बहुत प्यार करते हैं और टॉफी,चॉकलेट,चिप्स आइस-क्रीम,खिलौने..और भी बहुत सारी चीजें दिलाते हैं..

फिर आगे का भाव था ! भगवान जी मेरे सभी दोस्तों को अच्छा रखना, वरना मैं रोज़ाना किसके साथ खेलूंगा..?

और मेरे ‘मम्मी+पापा’ को तो एकदम से ठीक रखियेगा,आपके बाद वो ही तो मेरे ‘सबकुछ’ हैं। लेकिन “भगवान सबका ध्यान रखने से पहले आप अपना ख़ुद का ध्यान अवश्य रखियेगा” क्योंकि आपको कुछ हो गया,तो “हम सबका” क्या होगा..?

ज़ाहिर है, एक मासूम की इतनी सहज और सरल प्रार्थना सुनकर. खुशी से नानू की आंखें तो भर ही आनी थी.. क्योकि ऐसे अद्भुत संस्कार इतने छोटे व मासूम से बच्चे में उन्होंने अब से पहले न कभी देखे थे,और न कभी सुने ही थे।

शायद यही “पूर्व-संस्कार” होते हैं..एक हिंदी कहावत के अनुसार ‘पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं। धन्यवाद 👍

; युग, पचहरा, शिक्षक, जैन कॉलेज,सासनी,हाथरस

Leave a comment