117-“कसौटी”

क्या आप भी कुछ ऐसा ही सोचते हैं..?

कि हमारा जीवन प्रतिक्षण “कसौटी” पर होता है.. “जिस क्षण जीवन रूपी बॉल सुख के पाले में है उस वक़्त हमारे अनुभवों के साथ-साथ ‘अहंकार’ की परीक्षा चल रही होती है..?

और यदि हमारे ही कर्मों के तकाज़े से बॉल कहीं दुर्भाग्यवश दु:ख के पाले में चली जाय, तो उस वक़्त भी हमारे अपने अनुभवों के साथ-साथ हमारा ‘धैर्य’ परीक्षा की घड़ी में होता है।

इसीलिए यहाँ, मेरा ऐसा मानना है कि, दोनों परीक्षाओं में अव्वल आने पर ही हमारे जीवन की “कसौटी” लगभग पूरी समझी जाती है।

तब कहीं हमारा जीवन लोगों की ज़ुबान में ‘सफल’ या ‘परफ़ेक्ट’ जैसी संज्ञा पाने का हक़दार होता है, शायद,उससे पहले नहीं!!

धन्यवाद👍

; YUG,पचहरा, नीमगाँव,राया,मथुरा।

🌹 नमस्कारं🌹 🙏

2 thoughts on “117-“कसौटी””

  1. 💯✔️👍🏻👌🏻❤️🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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