मनुष्य का जीवन एक “क्रिकेट” के खेल जैसा ही है।
क्योंकि ‘शरीर’ रूपी स्टेडियम में ‘धरती’ के विराट पिच पर हर पल ‘समय’ पूरी मुस्तैदी के साथ बॉलिंग कर रहा है।
‘धर्मराज’ एम्पायर बनकर खड़े है। और ‘बीमारियां’ व्यक्ति के इर्द-गिर्द फील्डिंग लगाए हुए हैं।
जहाँ पर एक विकेट-कीपर की भूमिका में ‘यमराज’ ख़ुद है, जो मनुष्य के जन्म के तुरन्त बाद से कीपिंग के द्वारा उसके ‘प्राण’ रूपी विकेटों को लपकने की फ़िराक में रहते हैं।
जिस प्रकार क्रिकेट-मैच में एक आक्रामक बल्लेबाज़ या तो चल जाता है या ऑउट होकर पवेलियन बापस हो लेता है।
ठीक वैसे ही ‘सांस’ रूपी गिल्लियाँ उड़ जाने पर ‘मनुष्य’ भी ‘क्रिकेट-पिच पर खेलते हुए उस बल्लेबाज की तरह’ संसार से चला जाता है..
आजकल ये ‘हार्ट-अटैक’भी आम हो गया है. मनुष्य’ के लिए किसी बैट्समैन के खेलते-खेलते अचानक ‘रन-आउट’ हो जाने’ जैसी अनुभूति है।
देश की सीमाओं पर घात लगाए बैठे कुछ घुसपैठिओं के हाथों एक सच्चे सिपाही का ‘शहीद’ हो जाना भी क्रिकेट में बैट्समैन के अच्छे प्रदर्शन के दौरान अचानक ‘कैच-आउट’ हो जाने जैसी क्षति है।
परन्तु ‘डे & नाईट’ अर्थात लगातार होने वाले ‘जीवन’ के इस खेल में हमें अपना ‘कर्म रूपी’ प्रदर्शन हर हाल में बेहतर रखना होगा।
इसलिए हे मानव! पल पल चलती इन सांसों को संम्भाल!!, क्योंकि..तुझे! इन ‘सांसों’ के सीमित ओवरों में ही अपने जीवन की इस पारी में न केवल वाँछनीय .. कीर्तिमान स्थापित करने हैं वल्कि आने वाली तमाम पीढ़ियों के लिए गौरवपूर्ण प्रदर्शन भी करके दिखाने हैं, ताकि बाई द वे किसी दिन ये सांस रूपी गिल्लियां उड़ भी जाएं, तो भी एक अच्छे खिलाड़ी की तरह अपने बेहतर प्रदर्शन व अच्छे विचारों की मधुर आभा के रूप में लोगों के जहन में रह सको..!!
हाँ, इसमें भी ‘पर्सन टू पर्सन’ सबका अपना-अपना ‘रन-रेट’ है। जो सदैव विचारणीय रहता है…👍 क्या आपको भी लगता है..? कि, जीवन एक “क्रिकेट” है।
धन्यवाद👍
; पचहरा, युग, नीमगाँव, राया,मथुरा।