96-“जीवन्त”

दुनियाँ की भागमभाग में चाहे कभी आपको ऐसा क्यों न लगे कि, आपकी भलाई को लोग नजऱ अंदाज कर रहे हैं।

और हाँ, बेशक, आपकी अच्छाई सामाजिक-वातायन में अदृश्य दिखे..!

मग़र फिर भी आप ताउम्र अपनी अच्छाइयों पर क़ायम रहें.. क्योंकि ईश्वर का सी.सी. कैमरा बहुत ही “हाईएस्ट-विज़न” वाला है, जो अंधेरे में भी हर पल आपकी एक-एक हरक़त रिकॉर्ड करता रहता है। उसकी फ़ुटेज आपके प्रारब्ध का आधार है।

आपकी अच्छाइयों से समाज व लोगों के जहन में बनीं आपकी “छबि” लोगों के दिलों-दिमांग पर सदैव अपनी एक अमिट छाप अवश्य छोड़ती है। जो आपके सम्पर्क में आये इंसानों के द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी स्थानांतरित हो..लोगों के हिर्दय में स्थान रखती है वशर्ते..”विचार” में दम हो..!

यहाँ, मैं, ऐसा सोचता हूँ.. कि, समय-समय पर लोगों को आपका स्मरण दिलाने के लिए पर्याप्त है..

क्योंकि ऐसे इंसान शरीर से भले ही एक दिन हमारे बीच न रहें.. मग़र फेमस इंग्लिश-पोइट मि.जॉन मिल्टन को आधार बना कर कहूँ, तो “विचार”और उस वैचारिक धरातल पर किया हुआ “कृतित्व” सिर्फ ये ही ‘दो-चीज’ हैं जो दुनियाँ में ‘स्थायी’ होती हैं। वरना, जो भी आप देख रहे हैं.. सांसारिक दृष्टि से वो सब क्षणभंगुर है।

“विचार” की उम्र सदैव व्यक्ति से अधिक होती है। इसलिए महापुरुष दुनियाँ भर में अपनी “वैचारिक-छवि” से सदैव लोगों के दिलों में ‘जीवन्त’ रहते हैं.. जैसे; भगवान महावीर, भगवान बुद्ध, स्वामी विवेकानंद, गुरु गोविन्द सिंह, मदर टेरेसा एडिशन मौहम्मद हमीद.. जैसे अनेकों महामानव हैं जो लोगों की स्मृति में “जीवन्त” हैं।

🙏 सभी का आभार..

एवं अभिनन्दन 🙏

युग,पचहरा,

नीमगाँव,राया, मथुरा।

2 thoughts on “96-“जीवन्त””

Leave a comment