88-“दोहरा-मानदंड”

जरा आप ही बताइये कि ये “भारत-सरकार” के “दोहरे-मानदण्ड”/ डबल-स्टैण्डर्ड का द्योतक नहीं है,तो क्या है..?

सन 2016 में देश में A.A.L.L. अर्थात “अडानी. एग्रो. लॉजिस्टिक. लिमिटेड.” कम्पनी का प्रादुर्भाव हुआ। मैं ख़ुद उनके ही ‘स्टॉक एक्सचेंज’ के प्रिजेंटेशन का हवाला देते हुए बात कर रहा हूँ.. कोई मनगढ़ंत नहीं..

देखिये! स्टॉक एक्सचेंज के प्रजेंटेशन में ‘अडानी एग्रो..कम्पनी का आंकलन करते हुए बड़े स्पष्ट तरीके से कहा गया है कि, हमें बहुत बड़े-बड़े कॉन्ट्रैक्ट मिलने वाले हैं.., तो इसके लिए क्यों न हमें कोई ठोस स्ट्रेटेजी बनानी चाहिए..? और अपनी ख़ुद की ‘पोटेंशियल साइट’ भी आइडेंटिफाई कर देनी चाहिए। ताकि हमारा “लॉजिस्टिक बिजिनिस” ठीक से आगे बढ़ सके..

यहां इनकी क्रोनोलॉजी भी समझते चलिए..2016 में अडानी S.E.Z. पोर्ट कम्पनी..A.A.L.L.Company को रिव्यु करती है। और कहती है कि, आने वाले वक़्त में तुम्हारा भविष्य सुनहरा है। क्योंकि सारे अच्छे-अच्छे कॉन्ट्रैक्ट्स एवं ट्रैक्स हमें ही मिलने वाले हैं। और इसी इरादे से वे अपने लॉजिस्टिक बिजिनेस को स्ट्रीमलाइन करने के प्रोसेस में लग गए।

2017-18, 2018-19 में उन्हें देश के कई एक राज्यों से अच्छे ठेके भी मिल गए..

मेरा “मूल-मन्तव्य” इस टॉपिक के माध्यम से भारत सरकार के “दोहरे-मानदण्ड” वाली मानसिकता से पर्दा उठाना है।

आज भारत सरकार में जो लीडरशिप है उसे देश की जनता ने बड़े मन से सत्ता सौंपी थी। सत्यता जो भी हो मग़र अफ़सोस! वो स्वच्छ छवि वाली “लीडरशिप” भी देश के आमजन की नज़र में कई एक मुद्दों पर कॉरपोरेट की कठपुतली जैसी ही लगने लगी है।

हिंदी की ये बहुत ही प्रचिलित कहावत “सत्ता पाई काहि मधु नाँहि” इतिहास साक्षी है,अपने देश की “लीडरशिप” में अक्सर चरितार्थ हो ही जाती है.. चाहे कोई भी पार्टी सत्तासीन क्यों न हो जाय..

भारत सरकार ‘अडानी एग्रो लॉजिस्टिक लिमिटेड’ कम्पनी को प्रति टन के हिसाब से स्टोरेज की गैरंटी करती है। और बड़ा स्पष्ट रूप से कहती है कि, हम प्रति टन के हिसाब से इतना रुपया तो आपको देंगे ही। ये कोई साल-दो साल,या चार साल के लिए नहीं, पूरे तीन दशक अर्थात तीस साल तक न केवल गारण्टी करते हैं वल्कि ये वादा भी करते हैं कि, गारण्टी का पैसा प्रति वर्ष मुद्रा-स्फीति के साथ-साथ बढ़ता भी जाएगा।

अब आप ही जानिए कैसी बड़ी विडम्बना है कि, एक तरफ तो किसान-आंदोलन के उन्तालीस वें दिन भी भारतीय किसान एम.एस.पी.जिसका मतलव ही “न्यूनतम समर्थन मूल्य” है। उसकी “लीगल गारण्टी” के लिए 57 लोगों से ज्यादा शहीद हो गए और शर्म की बात ये कि किसानों के समर्थन में और तीन लोगों ने अपना शरीर त्याग दिया।

मग़र अभी तक उन्हें गारण्टी नहीं है..?

गारंटी मिलती है.. A.A.L.L.अर्थात अडानी एग्रो लॉजिस्टिक लिमिटेड कम्पनी को।

आदरणीय भारत सरकार! श्री नरेंद्र मोदी जी, कृषि मंत्री श्री नरेंद्र तोमर जी! “क्या इस तरह का ‘गारण्टेड कॉट्रेक्ट’ भारतीय किसान के साथ नहीं हो सकता..?”

परामर्श;- समय रहते भारतीय अन्नदाता के साथ-साथ देश के आमजन की भी भावनाएं समझ जाइए..देश के सभ्रांत नागरिकों की राष्ट्रीय भावना को उनकी कमज़ोरी मत समझिए..

धन्यवाद👍 ; कलम मेरी जरूर है मग़र विचार जन सैलाब का है.. जो कुछ.. भी कर सकता है..

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