न-1 किसी देश की -शीर्षस्थ लीडरशिप,
न-2 किसी सामाजिक सिविल-सोसिएटी या संस्था की लीडरशिप,
न-3 किसी परिवार के “हैड ऑफ द फैमिली” (मुखिया) की नेक-नीयत व दृढ़-इच्छा-शक्ति से देश,समाज,संस्था या परिवार में कुछ अच्छा कर दिखाने के स्वच्छ इरादे होते हैं,तो न केवल मेरा ऐसा मानना है बल्कि इतिहास भी साक्षी है वहाँ सदैव “उरुग्वे” जैसे ही चमत्कारिक परिणाम देखने को मिलते हैं।
जी हाँ, दुनिया के नक़्शे पर एक “उरुग्वे” नाम का देश है, जिसने अपनी सकारात्मक “विल-पॉवर” से अपने देश की धरती को स्वर्ग के मांफिक बना दिया है।
जिसने अपनी “इच्छा-शक्ति” के दम पर अपने आपको इतने सिस्टेमेटिक तरीके से व्यवस्थित किया हुआ है कि, .. उसने पूरी दुनियां को “पृथ्वी पर स्वर्ग” जैसा स्थापित करके दिखा दिया है।
वहाँ औसतन प्रत्येक परिवार कम से कम “चार गऊएं पालता है… और वर्तमान में पूरे विश्व में ये देश खेती के मामले में नम्बर वन की पोजीशन पर है … ये सिर्फ तेंतीस लाख लोगों का देश है, जबकि इसमें गायें एक करोड़ बीस लाख हैं …!!! हर एक गाय के कान पर इलेक्ट्रॉनिक 📼 चिप भी लगी है … जिससे कौन सी 🐂 गाय कब-कहाँ पर है , आराम से उसकी निगरानी की जा सकती हैं …
एक किसान मशीन के अन्दर बैठा , फसल कटाई कर रहा है , तो दूसरा उसे स्क्रीन पर जोड़ता है , कि फसल का डाटा क्या है … ??? इकठ्ठा किये हुये डाटा के जरिए , किसान प्रति वर्ग मीटर की पैदावार का विश्लेषण भी ख़ुद ही कर लेते हैं …
यदि मैं आँकड़ों के आधार पर कहूँ, तो 2005 में तेंतीस लाख की आबादी वाला छोटा सा ये देश , नब्बे लाख लोगों के लिए अनाज पैदा करता था … और … आज की तारीख में तो वह पूरे “दो करोड़ अस्सी लाख” लोगों के लिये अनाज पैदा कर रहा है … “उरुग्वे” के इस सफल प्रदर्शन के पीछे देश के किसानों और पशुपालकों का दशीयों- वर्ष का बहुत ही गंभीर अध्ययन शामिल है।
पूरी खेती को देखने के लिए 500 कृषि इंजीनियर लगाए जाते हैं और वे लोग ड्रोन और सैटेलाइट से किसानों पर नजर रखते हैं , ताकि किसान खेती का वही तरीका अपनाएँ जो विशेषज्ञों द्वारा निर्धारित किया गया है … यानि ” दूध , दही , घी , मक्खन ” के साथ आबादी से कई गुना ज्यादा अनाज उत्पादन होता है।
“सभी अनाज , दूध , दही , घी , मक्खन, दूसरे देशों में आराम से निर्यात भी होते हैं। जिससे हर किसान लाखों में कमाता है … ” एक आदमी की महीने की कम से कम आय 1,25,000/- रुपये है, यानि उरुग्वे के हिसाब से लगभग 19,000 डॉलर सालाना।
“इस देश का राष्ट्रीय चिन्ह सूर्य 🌞 व राष्ट्रीय प्रगति चिन्ह गाय 🐂 और घोड़ा 🐎 हैं।” “उरूग्वे में गाय की हत्या पर कानूनन “तत्काल-फाँसी” का प्रावधान है।
“मैं (योगेन्द्र सिंह) ऐसे कर्मशील व गौ-प्रेमी राष्ट्र को सादुवाद के साथ-साथ बार-बार नमन करता हूँ।
इस गौ-प्रेमी देश “उरुग्वे” की … एक और तारीफ की बात ये है , ” कि इसमें सभी गौ-धन भारतीय हैं … ” जिनका परिचय वहाँ “इण्डियन-काउ” के तौर पर होता है … ” विडम्बना देखिए, कि भारत में गौ-हत्याएं होती हैं और वहाँ “उरुग्वे” में गौ-हत्या पर मृत्युदण्ड का प्रावधान है।
” “क्या हम इस “कृषक राष्ट्र उरुग्वे” से कुछ सीख ले पाएंगे … ??? ” ;
विचारक; युग पचहरा, नीमगाँव,राया,मथुरा, (भारत वर्ष)