46-“कोरोना से डरो..ना !”

डॉक्टर लोग अक्सर अपने-अपने तरीके से हमें समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि हमें अपने अंदर से कोरोना का डर निकाल देना चाहिए। बात भी ठीक है।
लगभग दो महीने के लोकडाउन से एक बात तो हम लोग समझ ही गए हैं कि कोरोना तो अब हमारे साथ रहेगा। इसलिए..कम से कम वैक्सीन आने तक।
अब सवाल बनता है कि बिना डरे कोरोना के साथ..अपने आपको सुरक्षित रखते हुए Q.जीया कैसे जाय..?

सबसे पहले हमें ये समझना है कि ये वायरस नाक और मुंह के जरिये ही शरीर में प्रवेश करता है।

दूसरे मास्क अवश्य पहनना है।
तीसरी बात ये कि हमें साथ में एक सेनेटाइजर की बोतल भी रखनी चाहिए, ताकि जाने अनजाने में यदि किसी से टच भी कर जाएं तो अपने हाथों को सेनेटाइज सकें। सिर्फ सोशल-डिस्टेनसिंग-मेन्टेन करना है। अगर कभी गलती से किसी के नज़दीक आ भी जाय,तो घबराना नहीं है क्योंकि ऐतियात तो वो सामने वाला भी बरत रहा है।

जब इतना पालन कर लिया, तो यदि आप रेडजोन में भी है, तो भी आपको चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योकि डर लोगों को कहीं ज्यादा सता रहा है असल में “रोग” इतना नहीं सताता। और भगवान न करे अगर ये रोग किसी को लग भी गया तो भी कोई बात नहीं है अपने शरीर के अंदर प्रतिरोधक-क्षमता(ईमयूनिटी) को सही रखना है।और हाँ ये रोग थोड़ा जल्दी फैलने वाला तो है, इसलिए दूरी तो सदैव बनाके रखनी ही है। कई बार कॉलोनी में आते जाते मुझ से साथी-लोग पूछ लिया करते हैं कि sir ये इम्युनिटी कैसे बढ़ेगी..? तो मेरा उनसे यही कहना होता है कि अगर कर सको..और मेरे तरीके से चलो, तो भई ये एक बड़ा आसान सा फार्मूला है।
1- रात को सोने से पहले परिवार में बोल दीजिए जो भी दूध बनाएं, वो लगभग एक जग दूध में एक या ढेड़ चम्मच हल्दी डाल के उबाल दें। और परिवार में सब को दवा के माफ़िक एक-एक कप पीने को दे दें। और..

2- विल्कुल इसी प्रकार सुबह उठें तब एक जग नीबू पानी गर्म करके बना दें और जो भी विस्तर या बेड-रूम से निकले पहले एक गिलास पानी पिएं तभी आगे बढे..जब तक हम ये सारी बातें मेन्टेन करते रहेंगे तो हमारी इम्युनिटी गेरण्टी के साथ सही रहेगी। अब आप जान लीजिए आपने देखा होगा कि हर बड़े बदलाव के लिए एक हादसा जरूरी है। जिससे ज़हन में स्वतःएक इमरजेंसी क्रिएट हो जाती है। जो इंसान से काफ़ी दुर्लभ सी लगने वाली बातों को भी बडी आसानी से अपने अंजाम तक पहुंचवा देती है। ये आप भी जानते हैं कि इंडियंस ने कभी भी क्वालिटी “लाइफ-स्टाइल” की तरफ बहुत ज्यादा ध्यान नहीं दिया, तो मेरे ख्याल से अब वो समय आ गया है कि, कुदरत हमें फ़ोर्स करके नीट & क्लीन रहने, बिना किसी ख़ास कारण के लोगों से मिलने, होटल या मार्किट का कचड़ा जैसा खाना न खाने ,पार्टी से बचने आदि हमारे रोज मर्रा के तौर-तरीके जो बिगड़ गए थे, अब कुदरत हमें उनके सही तरीके सिखा रही है। तो कोई बात नहीं ये सब हमें ख़ुशी-ख़ुशी सीख भी लेने चाहिए। किसी तरह का ऑब्जेक्शन, ना पसन्द जैसी बातें नही करनी हैं, हो सकता है इस लोकडाउन में आपकी पसंद की चीजें न हो पा रहीं हों। मग़र चिंता करने की जरूरत नहीं है। पौष्टिकता के हिसाब से अगर आप मूंग,चने की दाल व चावल या दो एक चपाती सुबह-शाम दो दफ़े खाते हो, और सुबह दूध के साथ ब्रेड हल्का सा ब्रेक-फ़ास्ट भी लेते हो, तो आपके शरीर को सब कुछ मिल जायेगा आपको फिर कुछ भी होने वाला नहीं है। क्योंकि ये तो आप भी समझ रहे हो ये समय कोई लाइफ-टाइम तो रहने वाला नहीं है। दो या चार महीने दाल-चावल खा कर मूंग-चने की दाल में सारे पौष्टिक आहार आ जाते हैं तो बताओ क्या फर्क पड़ने वाला है, मैं कहता हूँ कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है।अगर ये व्यवस्था बना लेते हो तो
ज़नाब! अब लाइफ को इसी तरह पोजीटिवली मैनेज कीजिये, और अपने-अपने काम धंधे पर खुशी-खुशी लग जाये। कुछ लोग हैं बात का बतंगड़ बनाने में माहिर होते हैं ,अफवाएँ फैला कर मज़ा लेते हैं कि “अरे वहां इतनी भीड़ है, प्रशासन क्या कर रहा है.. ? वगैरा वगैरा। तो क्या हुआ घबराओ नहीं भीड़ लगी है तो छट भी जाएगी। इसीलिए आप पिछले लगभग दो महीने से देख भी रहे हो लोग सीख रहें हैं कुछ पुलिस के थापड़ से, कुछ डंडे से और कुछ ज्यादा ही ढीठ हैं वो बीमार होकर.. मग़र सीख अवश्य रहे हैं..पर इस हादसे से गुज़रना जरूरी है। अगर हादसे से गुज़रेंगे नहीं, तो कोरोना के बाद का जो “नया जीवन” है उस तक पहुंचेंगे नहीं। इसलिए उस जीवन तक पहुंचने के लिए इस हादसे को postponed नहीं करना है, उससे गुज़रना है। परेशानियों का अनुभव लेना है। इन सारे नियमों का पालन करते हुए एक जांबाज सियाही की तरह safe रहेंगे। जिस प्रकार सीज़नल रोग ड़ेंगू, मलेरिया, हैजा हर वर्ष आते हैं हम उन्हीं के अनुसार एतियात भी बरतते हैं,और वो वक्त गुज़र जाता है। उम्मीद रखो ठीक वैसे ही ये महामारी का वक़्त भी गुज़र जाने वाला है। इसलिए किसी को डरने की कोई जरूरत नहीं है। मतलव “कोरोना से डरो.. ना ! ”
जय हिंद जय भारत ;
पब्लिक राइटर ; युग पचहरा

मूलनिवासी ; नीमगाँव, मथुरा।

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