सवाल – क्या आपने कभी विचार किया है, ..कि “मानव-जीवन” में संकल्पों का क्या महत्व होता है..?
जवाब – हाँ, मैंने देखा…
है अधिकतर लोग नव-वर्ष के पहले दिन अपने जीवन की बेहतरी के लिए अक्सर छोटे या बड़े संकल्प (Resolutions) लिया करते हैं।
यद्यपि कुछ.. ही होते हैं, जो पूरे वर्ष या जीवन भर उन पर खरे उतर पाते हैं। लेकिन इस नेक काम के लिए “पूरे-वर्ष” जैसा लम्बा इंतज़ार क्यों..?
इस सन्दर्भ में मेरा “सिद्धांत” तो सदैव ये कहता है…कि “जब आँख खुलीं तभी सबेरा..अर्थात हम को अपनी कोई बुरी आदत या किसी ग़लत चीज़ का स्वयं जैसे ही आभास हो या कोई शुभचिंतक उस ओर संकेत कर दे।, तत्काल,उसे छोड़ देना चाहिये। अपनी “विल-पॉवर”ऐसी हो। क्योंकि इन बातों के लिए कोई मुहूर्त नहीं निकलते। मगर मैं ये समझ रहा हूँ कि, अपनी बात की पुष्टि करने के लिए this is a very great & legendary example of all humanity..about Resolutions ये सर्वोत्तम संकल्प इसलिए और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि I.I.T. दिल्ली के 68 वर्षीय पूर्व प्रोफेसर “Mr.आलोक सागर” को अपने सेवाकाल में लक्ज़री लाइफ जीते-जीते उन्हें एक दिन जब “असल-जीवन” के पहलू ने स्पर्श किया तो उन्होंने सरकारी कार्य से सेवानिवृत्त होने तक का इंतजार भी नहीं किया तुरन्त वे स्वेच्छा से मध्यप्रदेश में आदिवासियों के बीच रह कर बहुत सारे वृक्ष लगाने और उनकी देखभाल में अपना वाकी जीवन समर्पित करने का “संकल्प” लिया और उस नेक कार्य में जुट गए। उनकी इस “डाउन-टू-अर्थ” वाली सोच ने आज हम सबको जीवन के असल माइने समझने की प्रेरणा दी हैं।
अतः पुनः ऊपरयुक्त वीडियो को देखिए और इस संकल्पित महापुरुष को ध्यानपूर्वक सुनिए..धन्यवाद
प्रोफ़ेसर आलोक जी सागर सहित सम्पूर्ण प्रबुद्ध-वर्ग को योगेन्द्र सिंह पचहरा का नमस्कार…..
Namaskaar chacha g
Well said & true lines.
Most of the people don’t keep their promises and wait for year, month and week days to start new things.
But truth is “Jab Jago Tabhi Savera”.
Thank you for great thoughts
Regards
Shailendra Mittal
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Thanks शैलेन्द्र जी..डॉ आलोक सागर जी का वीडियो देखा हो तो comment करके बताइयेगा कैसा लगा..👍
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Thanks
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आलोक सागर जी के बहुत महान समर्पण से समाज, जल, जंगल, जमीन के लिए बहुत बड़ा योगदान है।
ऐसा तो करोड़ों में से कोई कर सकता है,
इतनी High class family वाले लोगों पर तो विलासिता का भूत सवार होता है।
अक्सर ऐसे लोग तो प्रकृति की ओर देखना भी छोड़ दिया करते हैं।
विलक्षण!
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जी विल्कुल…👍
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Good
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