26-“कोरोना” एक गुणात्मक वृद्धि …

“कोरोना” महामारी को एक “संख्यात्मक वृद्धि” समझने की भूल मत करियेगा “संख्यात्मक-वृद्धि एवं गुणात्मक-वृद्धि ” में जमीन-आसमान का फर्क होता है… आइए इस फ़र्क़ को वीरबल के नज़रिए से समझने का प्रयास करते हैं….
कोरोना महामारी के फैलने की “गुणात्मक-वृद्धि को समझने के लिए मैं आपको इतिहास के पन्नों से एक बहुत रोचक किस्सा सुनता हूँ…जो देश-दुनियाँ के आज के हालातों पर एकदम सटीक है..
ज़नाब ! हुआ यूं एक बार बादशाह अकबर और उनका प्रिय मंत्री बीरबल दोनों शतरंज खेलने बैठ गए। खेलने से पूर्व दोनों में शर्त लगी कि उनमें से जो भी आज के शतरंज की बाजी हार जाएगा। उसे विजेता की इच्छा के अनुसार जुर्माना चुकाना होगा। बीरबल ने कहा हुजूर यदि आप जीत गए और मै हार गया तो… आप हुकुम फ़रमायें कि मै आपको क्या जुर्माना चुकाऊंगा..? बादशाह ने तुरन्त कहा, यदि ऐसा हुआ तो तुम्हें, 100 स्वर्ण मुद्राएं देनी होंगी। ये शर्त बीरबल ने स्वीकार कर ली।
अब बीरबल ने कहा जहाँपनाह यदि इसका उलट हुआ। यानी आप हारे तो,… अकबर ने कहा ये तो तुम बताओ तुम्हें जुर्माने में क्या चाहिए… बीरबल ने बड़े हल्के से स्वर में बोल दिया कि जहाँपनाह हम लोगों को तो सदैव अपने खाने-दाने की ही फ़िकर लगी रहती है सो आप मुझे शतरंज के 64 खानों में गेंहूँ के दाने रखकर अपनी शर्त पूरी कर दीजियेगा। जैसे… पहले खाने में 1 दाना, दूसरे खाने में पहले के दो गुने दाने 2, तीसरे में दो के दो गुने यानी 4 दाने, इसी प्रकार चौथे में चार के दो गुने 8 दाने, पांच वें खाने में 16 इसी तरह गुणात्मक-वृद्धि में गेंहूँ के दाने रखते जाईयेगा मै उठवाता चलूंगा। बीरबल की इस छोटी सी शर्त को सुनकर बादशाह अकबर ने जोरदार ठहाका लगाया।और बोला “छोटे-लोग छोटी-सोच”बीरबल मुझे तुम्हारी ये शर्त मंजूर है।उसके बाद शतरंज का खेल शुरू हुआ। अब संयोग देखिए कि बीरबल ही इस बाजी को जीत गया। अब बारी थी हारने वाले को जीतने वाले की शर्त पूरी करने की। अकबर ने बड़े ही अहंकार के साथ अपने खजांची को हुकुम दिया कि “वह शतरंज के 1 से 64 खानों में गुणात्मक-वृद्धि, जैसे ये बोल रहे हैं… , करते हुए गेंहूँ के दानों का हिसाब लगा कर शर्त को मुकम्मल कर दें….
खजांची ने जब हिसाब फलाया तो उसका मुंह खुला का खुला रह गया। वह बादशाह के सामने आकर हाथ जोड़कर🙏 खड़ा हो गया। और बोला यदि हम सारे भण्डार का गेंहूँ तोल दें तो भी बीरबल की शर्त को मुकम्मल नहीं कर पाएंगे। एकबार को तो अकबर ने इस बात पर विश्वास नहीं किया।
ऐसा लग रहा है। एकदम तो आप को भी ये बात अजीब ही लग रही होगी। क्यों नहीं..सामान्यतः स्वाभाविक भी है।
चलिए अब मेरा गणित तो ज्यादा अभ्यास में है नहीं… कैलक्यूलेटर की सहायता से ही हिसाब लगाते हैं..शतरंज के पहले खाने में 1 दाना, दूसरे में 2 दाने, तीसरे खाने में 4 दाने चौथे खाने में 8 दाने…इसी तरह गुणात्मक-वृद्धि करते हुए कैलकुलेशन से शतरंज के सबसे आखिरी अर्थात अकेले 64 वें खाने में गेंहूँ के 9223372036854775808 दाने रखने का हिसाब बना।
और एक से लगा कर 64 तक के सभी खानों में रखे जाने वाले गेंहूँ के “कुल दानों” की संख्या हो रही थी।..18446744073709551615.

जानकरों के अनुसार जिनका कुल वज़न होता है..1,19,90,00,00,000 मैट्रिक टन ।
जो कि वर्ष 2019 के सम्पूर्ण विश्व के गेंहूँ के उत्पादन से भी 1645 गुना अधिक है।
साथियो ! वृद्धि दो तरह की होती है। एक संख्यात्मक, दूसरी गुणात्मक..यदि शतरंज के खानों में क्रमशः1,2,3….62, 63, 64.करके प्रत्येक खाने में उसकी संख्या के अनुसार दाने रखे जाते.. तो सभी 64 खानों में कुल 2080 दाने ही आते। ये कहलाती “संख्यात्मक वृद्धि” जबकि बीरबल की शर्त के मुताविक गणना है। “गुणात्मक वृद्धि”
साथियो Covid-19 यानी “कोरोना वायरस” की तेज वृद्धि और उसके विश्वव्यापी दुष्प्रभाव को देखते हुए मेरे मन में आज की इस भयावह महामारी की वृद्धि को लेकर चिन्ता हुई कहीं हम इसे “संख्यात्मक वृद्धि” समझने की भूल न कर बैठे, इसलिए लोगों को सचेत करने के उद्देश्य से इस विषय पर लिखने का विचार आया।

भाइयो ! ये “गुणात्मक वृद्धि” है। जो सामान्य लोगों के अनुमान से परे है। इसे हल्के में विल्कुल न लें। मेरा सभी से🙏हाथ जोड़कर निवेदन है। इस सम्बंध में हम सभी अवश्य गम्भीर हो जाएं। और प्रधानमंत्री जी के अनुसार 21 दिन या और यदि आवश्यक हो तो 40 दिन भी क्योंकि ” जान है तो जहान है।” आप अपने परिवार के साथ घरों में ही बने रहें। इससे आप तो सुरक्षित होंगे ही। इस महामारी को आगे बढ़ने से रोकने की भी आप एक अहम कड़ी साबित होंगे।
I Mean ऐसा करके ही हम Corona cycle (चक्र) को तोड़ पाएंगे….धन्यवाद।

विचारक ; युग,पचहरा,
जन्म-भूमि ; नीमगाँव,राया,मथुरा।
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