
Q.- ज़रा विचार करें मनुष्य के खुश होने का सही क्राइटेरिया..क्या है..?
Ans.- अमूमन एक ही जवाब है.. कि इंसान की “सेहत का अच्छा” होना ही प्रसन्नता का सही क्राइटेरिया (Criteria) है।..
बात एकदम ठीक भी है। जब सेहत ही ठीक न होगी तो..सब कुछ बेकार है.. बड़ा-घर , गाड़ी-घोड़ा नौकर-चाकर आदि ये अपार सुविधाएं इंसान की खुशी का क्राइटेरिया तो नहीं है।
इसीलिए यदि आप जीवन को मेरे नज़रिए से देखें, तो इंसान की खुशी “Well-Being”अर्थात “सेहतमंद” होने में ही है। इसीलिये ये निम्न चार बातें मेरे ख़्याल से बेहद जरूरी हैं ; —
No.1 खाना प्रॉपर लें।,
No. 2 नियमित एक्सरसाइज करें।,
No. 3 स्लीपिंग यानि नींद भी प्रॉपर लें,
सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है..
No.4 फ़ुर्सत के पल (Leisure- Moments..) आज ये बेहद “अहम वक्त” लोगों के जीवन से तक़रीबन ग़ायब सा ही हो गया है।
कभी-कभी तो मुझे समाज के मौजूदा हालातों को देख कर बड़ा… ही दुःख होता है। कि आज का इंसान बचपन में पढ़ी हुई उस.. हैनी-पैनी & डकी-लकी वाली कहानी की तरह “Sky is falling..run-run sky is falling..” जैसी बे-वजह की “भागमभाग” में पड़ गया है.., और वाक़ई दुनियाँ के अधिकांश लोग उसी अंदाज में भाग रहे हैं…,पता नहीं वे कहाँ जा के रुकेंगे..और लग रहा है।कुछ तो रुकेंगे भी नहीं। इसी “भाग-दौड़” में अपने आनंदमयी जीवन को जीने के बजाय ढोने जैसे हालात बना लेते हैं।
इस लेख के माध्यम से दुनियाँ के सभी लोगों से बड़े अदब के साथ मेरी एक गुज़ारिश है।। कि “काम” आप चाहे जो भी करें..मग़र अपनी दिनचर्या में “Leisure-Time” को जगह अवश्य देनी चाहिए। वरना ‘सेहत’ गयी तो सब कुछ होते हुए.. भी आपके हाथ कुछ भी नहीं लगेगा।
किसान,मजदूर,दुकानदार,नौकरी-पेशा आदि लोग.. किसी भी रूप में आप अपनी जीविका चलाते हों ..चाहे थोड़े समय के लिए ही सही। सभी को “फुर्सत के पल” अवश्य बिताने चाहिए। जिससे स्ट्रेस, टेंशन,डिप्रेशन आदि परेशानियों से ख़ुद को दूर रख सकें।
ध्यान दीजिए, दुकान पर बैठना,शॉपिंग करना ये कोई Leisure-Time नहीं है।
जैसे;- मैं शिक्षक एवं विचारक अपनी स्वेच्छा से हूँ। और ये भी सत्य ही है कि क्लास में अपने स्टूडेंट्स के बीच लेक्चर के दौरान सदैव बहुत Enjoy भी करता हूँ। लेकिन..प्रबुद्ध-वर्ग की राय के मुताविक मेरे लिए भी वो Leisure-time नहीं कहा जाएगा।.. वैसे भी स्वाभाविक है। ड्यूटी टाइम Leisure Time तो नहीं हो सकता।
दरअसल Leisure-Moments यानि फुरसत के पल वो होते हैं जिनके लिए कोई एजेंडा न हो। एकदम Freeness in the mind..पूरी तरह “फ़ुर्सत में “..
इसे ठीक से स्पष्ट करने के लिए मैं आपको कुछ दशक पीछे ले जाना चाहूंगा। पहले गांवों में कई एक खास मौजूदा जगह ऐसी हुआ करती थीं। जहां घरों के सामने चौपाल पर या किसी अहाते में चारपाइयाँ या मूड़े या कहीं कहीं कुर्सियां अक्सर पड़ी रहा करतीं थीं। लोगों को “आओ-बैठना” देने के लिहाज़ से औऱ वहां सभी वर्गों के लोग बिना किसी संकोच के ,बिना किसी मक़सद(एजेंडा) के रोजाना पहुंते। और आपस में एक दूसरे की “खैर-ख़बर” लेते। मैंने अक्सर देखता है।लोगों की बहुत सी समस्याएं तो वहां बैठकर आपसी बातचीत में ही सुलझ जाया करतीं थीं। घण्टों वहां गपसप-कहानियां,किस्से आदि होते रहते थे। जिससे सब दिमांगी तौर पर एकदम Re-charge से हो जाया करते थे। आज मेरे अन्तर्मन की चिंता यही है। कि वो फुरसत के पल ( Leisure-Moments ) आज कहीं खो गए हैं=?
लेकिन आप ताज्जुब करेंगे..न केवल हमारे देश की संस्कृति एवं सभ्यता को पश्चिमी देश दिल से अपना रहे हैं,अपितु हमारी बहुत सी सामाजिक-व्यवस्थाएं आज वहां के समाज में देखी जा सकती हैं। मग़र तेजी से बदलते हुए भारतीय समाजिक-ढांचे एवं हमारे बड़ों का युवाओं के साथ “कम्युनिकेशन-गैप” भी नई-पीढ़ी का अपनी समाजिक-व्यवस्थाओं के प्रति बेरुखी के पीछे एक बहुत बड़ा कारण है। वो उन व्यवस्थाओं के बारे में जानें भी तो कैसे…?
जबकि हमने सदैव ये सुना है कि पश्चिमी देशों में लोगों की लाइफ बहुत .. Calculated होती है।मग़र फिर भी वहां के लोग अपने निर्धारित व्यस्ततम समय में से कुछ “फुर्सत के पल” आवश्य निकाल लेते हैं क्योंकि वे इसकी अहमियत समझते हैं। जैसे..म्यूजिक Programmes, कैफे में बैठ कर आपस में बात करना।या बच्चों के साथ सैर-सपाटे पर निकल कर आदि तरीके से Leisure-Moments में एन्जॉय करना आदि उनकी दिनचर्या का हिस्सा है।
आज हमारे देश के लोगों की दिनचर्या में भी इसकी बहुत कमी महसूस की जा रही है। इसलिए मेरे विचार से “well being” को तरज़ीह देने की महती आवश्यकता है।
सभी प्रबुद्ध पाठकों को इसे “पढ़कर अपनी दिनचर्या में स्थान देने” के लिए
; युग, पचहरा आपका दिल से आभार प्रकट करते हैं।
(विनम्रता के साथ एक अपीलीय विचार)
88A Vasundhra,Mandi samity Road,Hathras.,UP. India. Contact No. For Feedback
( 8006943731)
गुरू जी एक चरित्र गया तो सब कुछ गया
LikeLiked by 1 person
जी हाँ, चरित्र ही वो हीरा है जिसके जरिये आप पूरी दुनियाँ में परचम लहरा सकते हो।धन्यवाद
LikeLike
Respected sir, it’s really great thoughts, mean full experience and examples for humanity. that’s written by you. It’s necessary subject today that needs we can change our life style. Thank you very much sir.
Regards
V.P.Singh
LikeLike
Thanks for this appreciation…
LikeLiked by 1 person