अक्सर लोग ऐसे ही अपनी बात शुरू कर देते है, कि “सुना आपने..!”
इसी से संबंधित एक मंजर है.. कि,
एक बार संत सुकरात से उनके मित्र मिलने आये।आते ही आते उन्होंने कहा, “सुना! आपने…”
तब सुकरात मुस्कराकर बोले “अक्सर लोग इसी तरह बात शुरू कर देते हैं। लेकिन न केवल तुमको बल्कि आज मैं सबके हित में एक
महत्वपूर्ण जानकारी शेयर कर ही लेता हूँ। इससे पहले कि तुम मुझे “सुना आपने” के संदर्भ में उस आदमी के बारे में कुछ बताओ..उससे पहले मैं आपको तीन सवाल पूछता हूँ…..???
यह सुन, वह मित्र कुछ सक पका सा गया, लेकिन जवाब देने के लिए हाँ, बोल दिया। सुकरात ने पहला सवाल पूछा…
1- मित्र ! जो बात आप मुझसे शेयर करना चाह रहे हो क्या वो सच है..?
मित्र का जवाब था : “पता नहीं” मैं, तो बस अभी-अभी सुनकर आ रहा हूँ..
2- तो क्या वह बात उस व्यक्ति की अच्छाई और गुणों के बारे में है..?
जो बात आप शेयर करने वाले हो..
इस पर भी मित्र ने कहा: “नहीं” वो बात तो उस व्यक्ति को बेइज्जत करने वाली है।
आखिरी एवं तीसरा प्रश्न पूछा..
3- क्या वो मेरे, आपके, समाज या दुनियाँ में किसी के भी हित की है..?
मित्र ने बड़े उदास मन से कहा: ”जी नहीं” मैं तो बस यूं ही तुम्हें बताने लग गया ऐसी तो उसमें कोई खासियत है नहीं..
अंत में ..
सुकरात लम्बी सांस लेकर उस मित्र को समझाते हुए बोले !.. तो फिर मुझे मांफ कीजियेगा मित्र, मैं तुम्हारी ये बात कतई नहीं सुन सकूंगा…
जो कि, न तो सच है
न उसमे किसी की अच्छाई का ही बखान है,
और नहीं वो मेरे, समाज व देश-दुनियाँ में किसी के हित की ही है। तो उसे सुनकर मैं अपना और आपका ‘समय’ ही बर्वाद क्यों करूँ।
क्योंकि ऐसी बातें सिर्फ “पर निंदा” वाली ही होती हैं जो मनुष्य की बेशकीमती तीनों चीजों…:- समय, ऊर्जा एवं जीवन को खराब करती हैं।
किसी विद्वान ने ठीक ही कहा है कि..
सामान्य दर्जे के व्यक्ति ” लोगों की बातें ” करते हैं।
औसत दर्जे के व्यक्ति “घटनाओं की.. ” कर लेते हैं।
जबकि …
महान व्यक्ति अपना “कीमती वक्त” “बौद्धिक लोगों के विचारों ” की चर्चा करके अपने समय,ऊर्जा और वेशकीमती जीवन का सदुपयोग करता है।
जिससे…उनमें सम्पूर्ण समाज को जीवन की नयी राह दिखाने की सामर्थ्य बनती हैं।
पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद
विचारक ; पचहरा सर, नीमगांव वाले
Really it’s very nice and inspiring
LikeLiked by 1 person
Thanks..
LikeLike
पचहरा जी बहुत अच्छा लिख रहे हो आप की तार्किक शक्ति और विचार विचार मंथन बहुत ही गजब का है।
LikeLike