मानो या ना मानो
किसी ने ‘Silence is gold’ यूं ही नहीं कह दिया होगा.. कोई तो बजह रही होगी!!
मांफ कीजियेगा मेरा अबतक का अनुभव मुझे भी कुछ ऐसा ही कहने को मजबूर कर रहा है… “शायद खामोशियाँ ही बेहतर हैं,शब्दों से तो लोग अक्सर रूठ.. जाया करते हैं”
जिंदगी गुजर रही है, सबको खुश करने में, मग़र जो मुझ से खुश हुए इस जहां की परिभाषा में वे अपने नहीं कहे जाते!! और जो अपने कहे जाते हैं दरअसल उन्हें इतनी अपेक्षाएं हैं कि, वे कभी खुश ही नहीं हो पाये..?👍
धन्यवाद
; युग, पचहरा,नीमगाँव,राया,मथुरा
🙏राधे गोविंद🙏
सर जी आप सच में एक महान व्यक्ति है 🙏🏻
सर जी मुझे बहुत खुशी 🙂होती है जब मै आपके
द्वारा लिखे गए लेख पढ़ता हूं मैं अपने आप को कुछ समय देता हूं जिससे कि आपके लेख पढ़ सकूं 🙏🏻
सर मुझे खुशी है कि आप अपने द्वारा लिखे गए लेखों
की लिंक मेरे पास भेजते है
आपका आज्ञाकारी शिष्य ………….
मोहित उपाध्याय 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
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I also like your comments..👍
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राधे गोविन्द 🙏🏻
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👍👍
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