.🙋🏻♀ There is a knowledgeful Dialogue delivery Between Husband-Wife 🙋🏻♂ by the title “Jeevan Sangini” इसका हिंदी रूपांतरण पढ़िएगा..
फरबरी,दो हजार पंद्रह में जब से बेटी की शादी..होकर वह अपने पति देव के घर गयी, और 2017 में बेटे ने ट्रायल दिया,तो उसका Delhi Cant फ़ुटबॉल क्लब में सलेक्शन हो गया। तब से अर्थात पिछले चार या पांच वर्षों से अक्सर हम दोनों (पति+पत्नी) ही घर पर अकेले होते हैं..
ये भी एक कॉमन बात है कि, शाम को फुर्सत के पलों में चिर-परिचित लोगों के विचारों का अक्सर समीक्षात्मक विश्लेषण..हर घर में होता ही है।
दूसरी बात.. सौभाग्य से हमारे घर पर हम दोनों की पसंद की कुछ पुस्तकों व पत्रिकाओं का एक अच्छा संग्रह भी है जिसे मिनी लाइब्रेरी कह दिया जाए, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
अतः हम, अपनी-अपनी रुचि के मुताबिक रोज़ाना कुछ न कुछ पढ़ते-पढ़ाते या डिस्कस करते रहते हैं। और आपस के इस डिसकशन के अतिरिक्त मैं, तो सेप्टेंबर,2019 से अपने विचार ब्लॉग के थ्रू आप जैसे गुणी शुभचिंतकों के साथ शेयर भी करने लगा हूँ।
शाम को खाने के वक़्त लगभग नब्बे फीसदी घरों में भोजन के दौरान डायनिंग-हॉल में पारिवारिक सदस्यों के बीच किसी न किसी पॉइंट पर “टेबल-टॉक” होता ही है।
वैसे ही एक दिन मैंने अपनी “जीवन-संगिनी” (एक्सपर्ट इन रिलेशनशिप & होम मैनेजमेंट) देवी नीरज जी से पूछा, कि, देवी जी! आपको कभी बुरा नहीं लगता, जब मैं बार-बार तुम्हें निर्देशित भाषा में, ऐसा करो, वैसा मत करो, करता रहता हूं। और तुम अपने गम्भीर स्वभाव पर अडिग..ख़ुद को इतना संयमित कैसे रख लेती हो.. ?
मैं, ह्यूमैनिटी का विद्यार्थी रहा हूँ। और देवी जी विज्ञान-वर्ग की। शायद इसीलिए उनकी रुचि और उत्सुकता जन-मानस के लिए विज्ञान द्वारा बनाये गए उत्पादों व संसाधनों, की सुविधाओं आदि में कहीं अधिक रही है।
देवी जी आध्यात्मिक-सोच में भी आगे है,
मैंने चीजों को पढ़ा अवश्य है, मग़र “Know exactly what you know.” वाला सिद्धांत नीरज जी पर जितना चरितार्थ होता है। उतना मुझ पर नहीं।
उनमें शुरू से एक ख़ास गुण है कि, वे अपनी जानकारी के साथ सदैव कन्फर्म होती हैं। कन्फ्यूज, नहीं। मेरे ख़्याल से इसीलिए उनके डिसीजन मेरे से अधिक बोल्ड होते हैं। उनके इस गुण के लिए मैं उनका तहे दिल से न सिर्फ सम्मान करता हूं,अपितु किसी भी नए कार्य में उनकी राय को हमेशा वरीयता देता हूं।
शुरू में तो, मेरे प्रश्न पर, वे जरा सी मुस्कराईं, और बोली! कि, ऐसा है किसी भी परिवार में जब पिता अपनी सही भूमिका में होता है, तो स्वाभाविक है बच्चे पिता का अनुसरण करते हैं। यहां “मैं, ऐसा मानती हूँ कि, शादी से पूर्व बेटियों के लिए पिता एक आदर्श स्वरूप होता है। ठीक वैसे ही शादी के बाद लडक़ी जब ससुराल में आती है.. तब उसे सौभाग्य से पति मर्यादित व अच्छे आचरण वाला मिल जाता है, तो स्वाभाविक सी बात है। फिर उसके आदर्श फिगर में पति आ जाता है।”
अब आप भी मुझे एक बात बताइए.., बेटा या बेटी जब अपनी माँ के आज्ञाकारी होते हैं, तो.. उन्हें लोग “मातृ-भक्त” कह कर पुकारते हैं। ठीक है👍
मग़र माँ अपने बच्चों की कितने ही अच्छे तरीके से परवरिश क्यों न करें..उनके लिए हर पल समर्पित होकर रहे..तो,भी उसे “पुत्र या पुत्री-भक्त” या संतान-प्रेमी क्यों नहीं कहते..??
उस वक़्त, मैं सोच रहा था, कि अब देवीजी का लेक्चर शुरू हो गया.. जानबूझ कर उनकी बात का जवाब न देते हुए..
तभी मैंने समानता को लेकर.. उनके सामने एक और विचार रखा!!…वह तो तुम भी जानते हो..मग़र ये बताओ ….
सृष्टि के आरंभ में जब दुनियाँ में जीवन शुरू हुआ होगा, तब तो पुरुष और स्त्री समान ही रहे होंगे.. तो
फिर ये पुरुष, बड़ा कब से हो गया..? जबकि मैने कई जगह पढ़ा है कि, स्त्री सदैव साक्षात “शक्ति स्वरूपा” होती है।
फिर मुस्काते हुए अपने चिर-परिचित अंदाज में वे बोलीं..
महोदय, आपको थोड़ा बहुत विज्ञान भी पढ़ लेना चाहिए था !
तब मैं थोड़ा झेंप गया.. उन्होंने अपने विवेकपूर्ण विचारों को अभिव्यक्त करते हुए बताया..
श्रीमान जी! मत भूलिए! दुनिया का प्रादुर्भाव मात्र दो वस्तुओं से हुआ है …
पहला “ऊर्जा” और दूसरा है “पदार्थ”। पुरुष –> ऊर्जा का प्रतीक है, जबकि स्त्री –> पदार्थ की प्रतीक है।
ध्यान ये भी रहे! पदार्थ को जब विकसित होना होता है, तो पदार्थ स्वयं ऊर्जा का आधान करता है। ना की ऊर्जा पदार्थ का।
ठीक इसी प्रकार … जब एक स्त्री पुरुष का आधान करती है, तो वह ‘शक्ति-स्वरूपा’ हो जाती है, और
शायद इसीलिए आने वाली पीढ़ियों अर्थात् अपनी संतानों के लिए वह प्रथम पूज्या होती है।
क्योंकि, स्त्री पदार्थ और ऊर्जा दोनों की स्वामिनी होती है, जबकि पुरुष सिर्फ ऊर्जा का एक ‘अंश’ मात्र है।
ये सुनकर मैंने चुष्की लेते हुए कहा, फिर तो तुम मेरी भी पूज्य हो गई .. क्यों..?
तुम तो ऊर्जा और पदार्थ दोनों की स्वामिनी हो.. न ?
इस पर उन्होंने थोड़ा सा सहमते हुए कहा !
मुझे थोड़ा आरोपित करते हुए कहा, आप कभी हेल्दी डिस्क्सन नहीं कर पाते हो! अक्सर “जोश में होश” खो जाते हो। ये बात ठीक है, पुरुष के सानिध्य में आकर ऊर्जा का अंश स्त्री ने ग्रहण किया है, और वह पहले से शक्तिशाली भी हुई है, तो क्या स्त्री उस शक्ति का प्रयोग
अपने पति पर ही कर दे ? ये एक अहसान-फरामोशी की बात नहीं हो जाएगी!!
मैंने बीच में उनकी बात काटते हुए कहा, क्यों मैं तो तुम को कई बार अनावश्यक बातें भी बोल जाया करता हूँ। फिर तुम क्यों नहीं.. ? आप अक्सर व्यक्तिगत हो जाते हो.. ये रवैया ठीक नहीं है डिसकशन के दौरान हमें सदैव मुद्दे पर रहना चाहिए।
यहाँ, उनका उत्तर सुनकर,तो… मैं वाक़ई उनके मर्यादित आचरण का मुरीद हो गया। उन्होंने फिर कहा, “पुरुष के संसर्ग मात्र से स्त्री जीवन उत्पन्न करने की क्षमता के साथ-साथ “माँ” बनकर दुनियाँ में ईश्वर तुल्य पद प्राप्त करती है। फिर भी नारी के लिए पुरुष सदैव पूज्य है। क्योंकि इस सब का आधार भी तो पुरुष ही है।
अब आप ही बताइये, जब उनका विचार इतना प्रखर एवं सकारात्मक है, तो मेरा उनके साथ मत भिन्न कभी हो.. कैसे सकता है..? मुझे इस बात पर सदैव गर्व रहेगा कि हम दोनो “मतैक्य” हैं ।
शायद मेरे कमेंट आदि से प्रभावित होकर.. फिर उन्होंने भी थोड़ा व्यक्तिगत होते हुए मुझे छेड़ा और कहा !
ईश्वर न करें हमारे जीवन में कभी कोई ऐसी परिस्थिति बने, और आपसे मुझे कभी कुछ कहने की नहोबत आये!!! फिर भी
मैं,तो नहीं कहूँगी..? मैं हमारी सन्तान जो आपके सानिध्य से “दो अनमोल रत्न” प्राप्त हुए हैं। वे माता “सीता” जी के “लव कुश” की तरह आपसे सारा..हिसाब कर लेंगे।
🙏 इसी के साथ-साथ दुनियां की समस्त मातृ शक्तियों को जिन्होंने अपने प्रेम और मर्यादा में सारी सृष्टि को बाँध रखा है। मैं उन्हें तहे दिल से नमन करता हूं..ये कहता हुआ मैं, ड्राइंग रूम की ओर चल दिया..और ” सुलझी हुई “जीवन संगिनी” के साथ उस दिन का डिस्कशन समाप्त हुआ।👍
धन्यवाद🙏🏾
🙇🙇🙏💞🥰 respectable 🙏🙏
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Aggressive,,👍
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Thanks
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