!!”Another-Theory”of Power…!!
देश के नेता जब चुनाव जीत जाते हैं मंत्रालय मिल जाता है, तो उसे अपनी बपौती समझकर और फिर अगले पांच वर्ष की तैयारी में जुट जाने के अतिरिक्त कुछ नहीं करते। सेवा भाव तो लगभग शून्य ही हो जाता है। इसके उलट आज के नेताओं में असीमित .. धन लोलुपता दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है।
ये सब देखते हुए आज देश जिस दिशा में जाता दिख रहा है, उस मंज़र को सोचकर भी दिल कांप उठता है। मेरा ऐसा मानना है कि देश में आये दिन ऐसे हालात बनते जा रहे हैं जो चिन्तनीय और निन्दनीय दोनों हैं। अब “सिर्फ समाज और देश की युवा शक्ति की जागरूकता में ही वो ताकत है जो समय रहते देश के भविष्य को अंधकारमय होने से बचा सकती है।” अब ना चाहते हुए, मैं भी “शक्ति” के “दूसरे सिद्धान्त” पर बल देने की बात कहने को मजबूर हूँ। देश के हालातों ने आज मेरी मनः स्थिति को भी ऐसा कर दिया है कि, मैं खुद नहीं समझ पा रहा हूँ कि शक्ति के “दूसरे सिद्धांत” की बात मुझे आप से करनी भी चाहिये या नहीं। और ये भी हो सकता है कि, कुछ देर तो “हायर मॉरल वैल्यूज” के लोगों को मेरी ये कवायद डाइजेस्ट भी न हो.. लेकिन न जाने क्यों मुझे ऐसा लगता है कि, इस विचार से लोगों को अपने राष्ट्र के प्रति कुछ सोचने की प्रेरणा तो अवश्य मिलेगी।
क्योंकि, मैं “इतिहास” को सदैव दुनियाँ की सबसे बड़ी अदालत का दर्जा देता आया हूँ । सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ..?, हाई कोर्ट में क्या हुआ..?,लड़ाई के मैदान में क्या हुआ..? और चुनावों में क्या हो रहा है..? इस तरह की बातें एक तरफ से ख़बर बनकर आती हैं और दूसरी ओर चली जाती हैं। क्योंकि दिन प्रतिदिन घटनाओं और खबरों के अम्बर लगे रहने से लोग विस्मृति के शिकार हो गए हैं। इसलिए केवल “इतिहास” ही है,जो पुनः स्मृति दिलाता है। अतः मैं उसे वक़्त के छोटे भाई के रूप में देखता हूँ।क्योंकि हर छोटी-बड़ी घटना का ख़ुद वही तो साक्षी होता है।
अब आप इतिहास के पन्नों में झांकिए और गौर से देखिये कि, इतिहास का निर्णय सदैव उसी के पक्ष में गया है, जो शक्तिशाली होता है।
कैसी विडम्बना है कि इतिहास ने कभी भी उसका साथ नहीं दिया जो ‘न्याय के साथ’ था। और ‘सही’ था। उदाहरण के तौर पर आप ख़ुद देख लें कि “दिल्ली में बाबर रोड तो है लेकिन राणा सांगा रोड नहीं है।क्योंकि बाबर आया और विजयी हुआ..भले ही देश राणा सांगा का है मग़र वो तो हार गये थे, तो रोड उनके नाम से क्यों बनता..? दूसरी तरफ अगर ऐसा नहीं होता तो,हिन्दू शाही किंगडम अफगानिस्तान से होती हुई सिकुड़ती-सिकुड़ती यहाँ तक न आ जाती..?
सुसंस्कारी सच्चे और अच्छे “लोग” या बड़े स्तर पर “देश” कभी किसी पर कुदृष्टि नहीं डालते, इतिहास गवाह है कि, भारतीयों ने कभी किसी के जीवन मूल्यों,धर्म-ग्रंथों और धर्म स्थलों को नष्ट नहीं किया। इससे सिद्ध होता है कि हम भारतीय न्याय संगत थे और सत्य भी हमारे पक्ष में था। मग़र गौर तलब है कि, “शक्ति” हमारे साथ नहीं थी। जो कि सदैव से नितांत आवश्यक है। इसलिए दोष इतिहास का नहीं हमारा है इतिहास ने हमें वही सजा दी है। जिसके हम हकदार थे। ध्यान रहे इतिहास हमेशा उन्हें सजा देता है,जो “विचारों” को “कर्म” से और “न्याय” को “शक्ति” से अधिक महत्व देते हैं।
मग़र यहां मेरे इस कथन का आशय ये विल्कुल मत निकालियेगा कि, हमें “न्याय” और “सत्य” को तिलांजलि दे देनी चाहिए। मेरा मतलव ये विल्कुल नहीं है कि न्याय का अपना महत्व नहीं है। लेकिन यदि कंसिस्ट ऑफ़ इंटरेस्ट” (Consist of interest) हो, तो शक्तिशाली बनना ज्यादा आवश्यक है। अच्छा एक बार आप चारों ओर अपनी नज़र फैला के देख लीजियेगा कि, कोई “व्यक्ति” या फिर कोइ “देश” रसूख़दार या वजूददार तभी बनता है जब वह अन्य आवश्यक फैक्टर्स के साथ-साथ शक्ति के सिद्धान्त को भी तरज़ीह देता है। अर्थात सभी के बीच एक सही संश्लेषण बना के चलता है। उसी आधार पर किसी व्यक्ति या देश की शक्ति का आंकलन किया जाता है। तब कहा जाता है कि, वह शक्तिशाली है या फिर कमज़ोर!!
जैसे; कि हम वॉर-फेयर के उसूलों के नज़रिये से देखें, किसी भी राष्ट्र की कॉम्प्रीहेंसिव-स्टेट “पॉवर” होती है। जिन चीजों से वह फाइट करता है। भारत के पास सदैव जनशक्ति, धनशक्ति, ज्ञानशक्ति व टेक्नोलॉजी आदि सब कुछ समुचित व्यवस्था में था। और है। जिन्होंने भारत पर आक्रमण किये, अनुपातिक तुलनात्मक स्थिति में उनसे हम हज़ार गुना बेहतर थे, इसके बावजूद भी न्याय हमारे पक्ष में नहीं रहा..क्यों..?
कश्मीर के राजा ने हमें हस्ताक्षर करके दिए थे, जिस आधार पर संविधान कहता है कि “कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है।” फिर, अभी भी उस पर जिद्दोजहद है.. क्यों..?
करोड़ों की संख्या में बंगलादेशी हमारे देश की सीमा में घुसपैठ कर भारत में आ जाते हैं। जबकि हमारी सीमाओं व सभी एयरपोर्ट पर साफ-साफ लिखा हुआ है कि, “पूर्ण चौकसी रखी जाय, ताकि एक भी व्यक्ति बिना वीजा या पासपोर्ट के भारत में प्रवेश न कर पाय।”
अगर आप देश और दुनियां के कर्रेंट अफेयर्स में रुचि रखते हों,तो 25 जुलाई,2005 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इसका संज्ञान लेते हुए कहा था कि, “भारत में सीमा पार से होने वाली घुसपैठ किसी आक्रमण से कम नहीं है। इसके दुष्परिणाम देश की आने वाली पीढ़ियों के लिए भयंकर होंगे।” दुर्भाग्य देखिये कि वही सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के तीन दिन के अंदर एक नया अध्यादेश जारी करके उन सारे कानूनों को “फोरिनर-एक्ट” के तहत… “इन कॉर्पोरेट”(समाविष्ट) कर लेती है। क्योंकि जो I.N.Duty-act था। उसे सुप्रीम कोर्ट ने Null & void(अमान्य) कर दिया था।
आप ही बताइये कि, इस तरह की बातें हमें “सोचने” के लिए बाध्य करती हैं या नहीं..?
अब मै, और अधिक गहराई में न जाते हुए..एक बहुत ही प्रमुख बात की ओर आपका रुख़ चाहूँगा। भारत कभी विदेशियों से नहीं हारा। अंग्रेजों ने भी भारत से क़भी कोई ऐसी लड़ाई नहीं जीती कि जिसकी फौज में भारतीय सिपाही न हो। चाहे अंग्रेजों ने हम से कोई भी लड़ाई लड़ी हो मग़र अंग्रेजों के साथ सदैव हमारी “नेटिव-आर्मी” रही है।
अगर बिना किसी लाग्-लपेट के कह दूँ, तो “हिंदुस्तान को सदैव हिंदुस्तानियों ने ही शिकस्त दी है।” जिन्हें हम अपने कहते हैं उन लोगों ने कभी देश का साथ नहीं दिया। ये कड़वा जरूर है मग़र सच है। आप स्वयं देख रहे हो अभी भी लगातार वैसे ही प्रपंच आये दिन रचे जाते रहे हैं। इसलिए आज “समाज” को और देश की “युवा शक्ति” को ऐसे धोखेवाजों से देश को सुरक्षित रखने का संकल्प लेने की दरकार है।
मुझे ही क्या आज देश के हर सच्चे विचारक को अगर कष्ट है,तो केवल इसी बात का। कि अपने ही सदैव से आस्तीन के सांप बनकर काटते रहे हैं। मग़र ऐसा आख़िर कब तक..?
दर्द इस बात का नहीं है कि, बाहरी लोगों ने या विदेशियों ने हमारे साथ क्या किया..? वो तो दुश्मन के रूप में सामने थे। जो किया वो स्वीकार है। मग़र जो पार्टिबन्द अपनों का चोला पहन कर भितर-घात में लगे थे और आज भी लगे हैं कष्ट… तो इस बात का है।
भारत को वाह्य शक्तियों से जो खतरा है, उससे तो वह निपट लेगा लेकिन अपनों की जब तक काऊन्सिललिंग नहीं होगी तब तक खतरे टलेंगे नहीं..? हमें आपस में बांट कर कहीं राष्ट्र की सुरक्षा,अस्मिता और राष्ट्र के गौरव का ये लोग सौदा न कर बैठें। क्योंकि तुच्छ सोच रखने वाले,धन लोलुप अपने आज के सुख के लिए आने वाली पीढ़ी के भविष्य को अंधकारमय कर सकते हैं। ये सम्भव है।
इसीलिए.. मेरा प्रबुध्द वर्ग से आग्रह है, अब समय आ गया है। “युवा शक्ति” व “भारतीय समाज” को भटकाव से बचते हुए हर वक़्त जागरूक नागरिक का परिचय देना होगा।
धन्यवाद
विचारक ; युग पचहरा
जैन कॉलेज,सासनी,हाथरस, मूलनिवासी; नीमगाँव,राया,मथुरा।