247- सादगी..

सादगी जब दिन की आखिरी ट्रेन यदि स्टेशन से निकल गई.. तो फिर, कल सुबह ही अगली ट्रेन मिलने की कल्पना करते हुए..।

एक बूढी महिला के पैर तेजी से स्टेशन की तरफ बढ़े जा रहे थे.. किंतु आज भी स्टेशन पहुंचते पहुंचते आखिर ट्रेन फिर छूट गई तो बेचारी महिला निराश होकर एक बेंच पर बैठ गई,,

उसके चेहरे पर चिंता के भाव थे। बाई द वे एक कुली ने इसे देखा..

और माँ समान महिला से पूछा.. “माईजी, आपको कहाँ जाना था?” महिला ने बताया,”मैं अपने बेटे के पास दिल्ली जाऊंगी….”

कुली बोला! पर अब कोई ट्रेन नहीं है माई.. अब, तो कल सुबह ही मिलेगी।। महिला बेबस लग रही थी तो कुली ने सहानुभूति पूर्ण भाव में कहा,,,, माई अगर आपका घर दूर हो तो यहीं प्रतीक्षालय में आपके लेटने का प्रबंध कर दूं और भोजन भी आपको वहीं मिल जायेगा। आपको कोई दिक्कत नही होगी,,,

बाद में फिर कुली ने पूछा ! अम्मा जी वैसे दिल्ली में आपका बेटा काम क्या करता है??? वृद्ध महिला ने जवाब दिया कि उसका बेटा रेल महकमे में काम करता है।

कुली ने उत्सुकता से उस वृद्ध महिला से उसके बेटे का नाम जानना चाहा..माई आप जरा उनका नाम बताओगी, अगर संपर्क संभव हुआ, तो तार.. अर्थात (प्राचीन भारत का टेलीफोनिक सिस्टम) से आपकी बात करवाने का प्रयास करता हूं,,,,,

वृद्ध महिला ने कहा, मैं तो सदैव उसे “लाल” कहकर ही बुलाती हूं। मगर और लोग उसे ज्यादातर लाल बहादुर शास्त्री कहा करते हैं। वृद्ध महिला के मुंह से उनके बेटे का नाम सुनकर कुली के पैरों तले जमीन खिसक गई वो आवाक रह गया,,भागकर स्टेशन मास्टर के कमरे में पहुंचा और एक ही सांस में ये पूरा वाकया कह सुनाया। स्टेशन मास्टर तुरंत हरकत में आए..

कुछ लोगो से आनन फानन में टेलीफोन से बात की.. और अपने मातहतों के साथ भागकर बूढ़ी महिला के पास पहुंच गए,,,,,,,,

उन महिला को सादर प्रणाम कर स्टेशन मास्टर ने पूछा,,,,,, मां जी आपके बेटे ने कभी आपको बताया नही कि वह रेल महकमे में क्या काम करते हैं????

हां! बताया था ना मुझे,, कि “अम्मा मैं रेलवे के दिल्ली दफ्तर में छोटा सा एक मुलाजिम हूं!!”

मां जी,,आपकी शिक्षा व संस्कारों ने आपके बेटे को बहुत बड़ा एक महान व्यक्ति बना दिया है,,जानना नही चाहेंगी कि, आपके सुपुत्र जी रेल महकमे में कौन सा काम करते हैं???

स्टेशन मास्टर के मुखारविंद से ऐसा सुनके महिला के चेहरे पर विस्मय के भाव दिख रहे थे……

फिर स्टेशन मास्टर ने कहा, “मां जी,,,इस पूरे भारत में जितनी ट्रेन चल रही हैं और मेरे जैसे लाखों रेलवे कर्मचारी हैं ..आपका “लाल” तो उन सबके ऊपर है, उनके मुखिया हैं। यानि वे भारत के माननीय रेलवे मंत्री हैं। स्टेशन मास्टर व वृद्ध महिला के बीच चल रहे.. वार्तालाप के दौरान ही उस स्टेशन का माहौल पूरी तरह बदल चुका था,,,

सायरन की हुंकार के साथ जिले के पुलिस कप्तान जिला कलेक्टर सहित रेलवे पुलिस बल के जवान व अधिकारी स्टेशन पर पहुंच रहे थे। तभी कई एक एंबेसडर कार भी आ चुकी थी।।

सभी लोग उस “वृद्ध मां ” को सलामी देते हुए उनको पूरे सम्मान के साथ रेलवे के सुरक्षा गार्डों के सुपुर्द कर शास्त्री जी के पास दिल्ली के लिए रवाना कर दिया गया।।

जबकि बनारस के छोटे से स्टेशन पर चल रहे इस बड़े घटनाक्रम से दिल्ली दरबार में बैठा वह “छोटे कद का बड़ा आदमी” इस घटनाक्रम से पूरी तरह अनजान था। ऐसे थे भारत मां के सच्चे सपूत श्री लाल बहादुर शास्त्री जी❣️

आज उनकी 120 वीं जन्म जयंती पर.. कृतज्ञ राष्ट्र की विनम्र श्रद्धांजलि 🙏🙏

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