244- पनीर

In the purpose of good health for ever we must know the fact about.. Ayurvedic nature.

🍶आयुर्वेद ज्ञानामृत 🍶 कहता है एक सर्वे के मुताबिक पनीर आधुनिक युग में बीमारियों का सबसे बड़ा कारण साबित होता जा रहा है।

__________जब गहराई से इसकी पड़ताल की गई तो पता चला कि आयुर्वेद में पनीर को सबसे “निकृष्टतम” भोजन बताया गया है, उनकी भाषा में बोले तो कचरा और कचरा भी ऐसा वैसा नहीं, ऐसा कचरा जिसे जानवरों को भी खिलाने से मना किया गया है। ये तो जग ज़ाहिर है कि पनीर दूध को फाड़ कर या दूध का रूप विकृत करके ही बनता है, जैसे कोई सब्जी सड़ जाए तो क्या आप उसे खाएंगे ? क्यों..? इस आधार पर तो खा लेना चाहिए केवल उसका रूप और थोड़ा सा स्वाद ही तो विकृत हुआ है।

दरअसल, पनीर सड़ा हुआ दूध ही तो है, बस बात इतनी सी है कि वह दिखने में सफेद है..और उसका स्वाद लोगों के मुंह लग गया है।

आज भी ग्रामीण अंचल के घरों में महिलाएं अपने हाथ से कभी दूध नहीं फाड़ती!

भारतीय इतिहास में कहीं भी पनीर का उल्लेख नहीं है। ना, ही ये भारतीय व्यंजन में सुमार है। जबकि भारत में तो प्राचीन काल से दूध को विकृत करने की सख्त मना की गई है। भारतीय बुजुर्ग अक्सर “दूध और पूत” को समानता के नजरिए से देखते रहे हैं। शायद इसलिए दूध और पूत का बिगड़ना किसी की सेहत के लिए अच्छा नहीं हो सकता।

पनीर खाने के नुकसान;

आयुर्वेद ने तो शुरू से ही मना किया था कि विकृत दूध लिवर और आंतों को नुकसान पहुंचाता है,

लेकिन अब आधुनिक विज्ञान ने भी अपने नए शोध में साबित किया है कि पनीर खाने से आंतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है जिससे पाचन संबंधी रोग होते हैं।

अगर प्रोटीन की बात करें, तो पनीर से प्राप्त प्रोटीन को पचाने की क्षमता, तो जानवरों में भी नहीं होती। फिर मनुष्य की क्या बिसात है जो उसे पचा सके।

उसी का नतीजा है.. खतरनाक कब्ज, फैटी लीवर और आगे चल कर शुगर, कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लडप्रेशर और यही पनीर पेट की खतरनाक बीमारी IBS को भी पैदा करता है। ज़्यादा पनीर खाने से खून में थक्के जमने की शिकायत होती है, जो ब्रेन हैमरेज और हार्ट फेलियर का कारण बनता है। वहीं ये पनीर हार्मोनल डिसबैलेंस का कारण बनता है जिससे हाइपोथायरायडिज्म या हाइपरथायराइडिज्म पनपता है।

महिलाओं में गर्भ धारण करने की क्षमता कम होती है पुरुषों में नपुंसकता आती है।

कुल मिला कर यदि देखा जाए, तो पनीर से थोड़ा सा लाभ या स्वाद दो एक सैकंड के लिए जीभ को तो मिलता है, लेकिन हानि पूरे शरीर को होती है।

पर कढ़ाई पनीर, शाही पनीर, मटर पनीर, चिली पनीर और भी न जाने क्या क्या पनीर….समोसे में पनीर, पकौड़ी में पनीर, पिज्जा में पनीर, बर्गर में पनीर, मतलब जहां देखो वहां पनीर, पनीर पनीर।

आप सर्वे की रिपोर्ट पढ़कर देख लीजिएगा, भारत में जितना दूध पैदा नहीं होता उससे कहीं ज़्यादा पनीर बनकर बिक जाता है।

भारतीय लोग तो पनीर के इतने दीवाने हो चुके हैं कि इन्हें जब पनीर मिल जाता है बहुत ही मजे से चाप लेते हैं, होटल में गए तो बिना पनीर खाये एक भी निवाला इनके गले से नीचे नहीं उतरता।

चिकित्सा विज्ञान में सबसे प्राचीन विधा आयुर्वेद में दूध,दही,घी का जिक्र हर जगह मिलता है किन्तु इस नामुराद पनीर का जिक्र कहीं भी नहीं मिलता, आखिर क्यों ?

यदि पनीर इतना ही अच्छा है तो इसके बारे में किसी ऋषि-मुनि ने कभी कुछ लिखा क्यों नहीं ..??

पनीर के दीवाने तो फिर भी खाएंगे..वैसे भी आज सही बात की अवहेलना करने का एक दौर सा चल पड़ा है। इसलिए किसी पर कोई जोर है भी नहीं।

लेकिन जो लोग सेहत को सर्वोपरि मानते हैं और थोड़ा बहुत बेवजह की बीमारियों से भी डरते हैं, कम से कम ऐसे महानुभाव अगली बार पनीर खाने से पहले एकबार सोचिएगा अवश्य ।

धन्यवाद “आयुर्वेद ज्ञानामृत”

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