220 – गेहूं की तोंद

Yes ‘ Wheat Belly ‘ अर्थात ‘ गेहूं की तोंद ‘ अमेरिका में ह्रदय रोग विशेषज्ञ एम डी डॉक्टर विलियम डेविस ने 2011 में एक “व्हीट बैली”..नामक पुस्तक लिखी..जो आज तक फूड हैबिट पर लिखी गई दुनियां की सर्वाधिक चर्चित पुस्तक बन चुकी है। अमेरिका में तो गेहूं से बने हर प्रोडक्ट को त्यागने का एक अभियान चल रहा है।

मैं बिना कोई भूमिका बनाए..सीधे सीधे कहूं,तो यदि जीवन में स्वस्थ एवं फिट रहना है,तो तत्काल गेहूं को अपनी खाने की थाली से दूर हटा दीजिए.. या एकदम नहीं तो धीरे धीरे इसका स्तेमाल कम करते जाइए.. हो सकता है आज की पीढ़ी को ये अप्रत्यासित निर्णय लगे..

लेकिन अब इसकी दरकार है। हमारे लिए अपने पूर्वजों वाला मोटा अनाज..मक्का,बाजरा, जौ, ज्वार,जई , रागी,चना,मटर आदि अनाजों का भोजन ही लाभप्रद है, कहना, न होगा कि हमें अपनी “फूड-हैबिट” में मोटे अनाजों से युक्त भोजन ही लाना होगा।

डॉक्टर विलियम डेविस का कहना है कि यदि हमें खुद व अपनी आने वाली पीढ़ियों को यदि ओबेसिटी, डायबिटीज एवं ह्रदय रोगों से स्थाई मुक्ति चाहिए, तो इस तथ्य पर गंभीरतापूर्वक विचार करना होगा।

जबकि, भारत में पहले जौ मटर या चना आदि की मिक्स रोटी बड़ी मशहूर थी। जिसे हमारे परिवारों में दादी अम्मा जी बतातीं थीं कि उस मिक्स अनाज को ‘ बेझर ‘ कहा जाता था..अंग्रेजों से पूर्व यही अनाज हमारी फूड हैबिट में था। जो बहुत सॉलिड यानि ताकतवर भी था। बुजुर्ग बताते हैं कि,गेहूं की रोटियां तो भारतीय घरों में अतिथियों के आने पर ही बनती थीं।

आप गौर कीजिएगा.. हमने अपनी जिन जिन चीजों व आदतों को विदेशी प्रभाव में आकर छोड़ा है, आज वही प्रभाव हमारी बहुत सी परेशानियों का सबब बना हुआ है। आज 77% भारतीय ओवरवेट हैं और लगभग उतने ही प्रतिशत कुपोषित भी। भारत में अधिकतर तीस की उम्र के पार वाला हर व्यक्ति अपनी तोंद के लिए चिंतित हैं। मगर मेरे भाई ! वो “गेहूं की तोंद” है न कि आपकी। आप उसे लटकाए-लटकाए यदि थक गए हो,तो ध्यान रहे! गेहूं से दूरी बनाने के बाद ही तोंद से दूरी बन सकेगी।

कोरोनाकाल के आंकड़े उठाकर देख लीजिएगा.. उस दौरान डायबिटीज, व ह्रदय रोग से पीड़ित लगभग एक लाख लोगों को शरीर में प्रतिरोधक क्षमता की कमी के कारण ही अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। डॉक्टर विलियम डेविस के अनुसार इन बीमारियों की जड़ में आज का ये हाईली केमिकल बेस्ड गेहूं ही है।

आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि,भारत के फिटनेस आइकन 54 वर्षीय टॉल डार्क हैंडसम (TDH) मिलिंद सोमन बिल्कुल भी गेहूं नहीं खाते हैं।

आपने हिंदी की ये कहावत पढ़ी या फिर सुनी तो अवश्य ही होगी कि, “समझदारों के लिए, इशारा ही काफ़ी होता है।”

कहना न होगा कि आप ‘समझदार’ हैं। आई मीन टू से..,”आप समझदार ही हैं।”

थैंक्स फॉर रीडिंग

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