ये तो वैश्विक जलवायु में कुछ उथल पुथल के कारण हफ्ते दस दिन के अंतराल पर इस वर्ष कुछ बूंदा बांदी होती रही है..
वर्ना आज के इंसान पर न गर्मी / ठंड सहन हो पाती हैं,और ना ही वर्षा।
क्योंकि आज खाने की हर चीज केमिकल बेस्ड है। एक सवाल ये भी बनता है कि जब हमारे आचरण में ही शुद्धता नहीं रही, तो हमें चीजें शुद्ध मिल कहां से जाएंगी..??
दरअसल, हमें ये भी जानना होगा कि, इंसान में अधिक मुनाफे के लालच के पीछे वास्तविकता क्या है..??
इसका साधारण सा जवाब हम सभी जानते हैं..अधिक जनसंख्या ही इसका असल कारण.. है।उसी की पूर्ति के लिए इंसान को कैमिकल्स और हाइब्रिड सीड्स की खोज करनी पड़ी..देश दुनियां बिच बहुत सी समस्याओं के मूल में आप जाइयेगा,तो “जनसंख्या घनत्व” को ही पाइयेगा।
देश में त्वरित गति से बढ़ता हुआ ये ‘जनसंख्या-घनत्व ‘ ही है जो देश में सत्ता पर काबिज़ लोगों ने वोट को सबकुछ मानकर “तुष्टिकरण” जैसी घिनौनी नीतियों को इतना बढ़ावा दिया.. कि देश की मध्यम वर्गीय असल जनता को उपेक्षित करते चले गए।
केमिकल बेस्ड “फूड” सदैव मनुष्य की शरीरिक प्रतिरोधक क्षमता को घटाता है।
इसी से आज के लोगों को लगता है कि गर्मी बहुत हैं ..
दूसरे ये भी बात अपनी जगह सही है कि, एक निश्चित सीमा तक ही आप ऐ.सी.,कूलर आदि कृत्रिम साधनों के सहारे जी..सकते हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दूं एक सर्वे के आधार पर आज हिंदुस्तान में लगभग 500 करोड़ और नए पेड़ों की आवश्यकता हैं l
जबकि अभी तो ये शुरूआत हैं..
भारत की क्लाइमेट फिगर ये कह रही है कि, 45°C से 49°C डिग्री को 55°C से 60°C होने में देर नहीं लगेगी,
वैज्ञानिक लोगों की चेतावनी… 56°C पर इंसान जीवित नहीं रहेगा!!!!!!
युवा पीढ़ी का इनकी अहमियत न समझने में कोई बहुत बड़ा दोष नहीं है।
वो इसलिए कि, उन्हें अपने वरिष्ठ लोगों के दैनिक व्यवहार में प्राकृतिक संसाधनों की रेस्पेक्ट करने वाला “चरित्र” कहीं नज़र आता ही नहीं।
हां वे दिखावा वाले चरित्रों को तो हर संस्थान व सरकारी महकमों में हर वर्षा ऋतु में देखते रहे हैं।
फिर युवा इन संसाधनों का सम्मान करें..भी तो कैसे??
नहीं समझे..मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि,
जब हम लोग पानी,पेट्रोल,डीजल,बिजली,गैस, खनिज और वन संपदा आदि का सम्मान करते हुए उन्हें दिख ही नहीं रहे हैं। तो बताइए वे सीखेंगे किन से..??
..और कुछ लोग तो ..अकारण ही चीजों को नष्ट करने में लगे पड़े हैं..अब आप ही बताइए.. कि, युवा इनका सम्मान करना कहां से और किससे सीखेंगे..?? वे जैसा देख रहे हैं वैसा ही तो करेंगे।
थोड़े लिखे को अधिक समझकर अब समय रहते हमें ये लोक कल्याण के लिए पौधे लगाने वाला मिशन शुरू करना ही होगा,
क्योंके एक पौधे को बड़ा होने में भी कम से कम 5 से 7 वर्ष लग जाते हैं, अब वर्षा ऋतु भी आने वाली है, कृपया जहां भी संभव हो हम सभी न केवल दो-दो पौधे लगाकर उनके साथ सेल्फी लेकर इतिश्री कर लें, बल्कि उन दो दो पौधों को अपने बच्चों की तरह अपनी देख रेख में सींच कर उन्हें “वृक्ष बनाने तक” का संकल्प लें,तो ही बात बनेगी।
ध्यान दें कि, स्कूल में अध्ययन के दौरान जब हम ईश वंदना में प्रतिदिन प्रातः बड़े विनम्र भाव से बोलते हैं कि,
“वह शक्ति हमें दो दयानिधे, कर्तव्य मार्ग पर डट जावे। पर सेवा, पर उपकार में हम निज जीवन सफल बना जावें।।”
अब फिर सवाल खड़ा होता है कि,हम कितने दिन अपने “कर्तव्य मार्ग” पर डटे हैं.. सोचिए भाई जी!! ?? क्या आपको लगता है कि आज के बाद डट जाएंगे..??
और हम ने अपने अबतक के जीवन में “पर सेवाएं” कितनी की हैं..?? या क्या अब करने लगेंगे..??
विशेष;- “आंख खुली तभी सबेरा ” वाले सिद्धांत से तो सब संभव है। मनुष्य कभी भी और किसी भी अवस्था में ट्रांसफॉर्म हो सकता है।
विद्यालय की प्रेयर, अच्छी पुस्तकें एवं हमारे बड़े बुजुर्ग तो हमें और आने वाली संततियो को जीवन के सारे “नैतिक दायित्व” न केवल सिखाते रहे हैं अपितु सदैव सिखाते भी रहेंगे।
लेकिन हम उन्हें अपने दैनिक जीवन में क्रियान्वित करें तब ना!!!
अच्छी बात के लिए हमें तुरंत सजग हो जाना चाहिए।
सिर्फ बोलने भर से कुछ नहीं होगा। इसलिए बड़े अदब के साथ मेरा सभी (स्वयं) से भी निवेदन है हम सभी देखें कि कहीं हम ही तो इन प्रश्नों के घेरे में नहीं आ रहे हैं..??
सब कुछ सरकारों पर ही मत छोड़िए, स्वयं भी कुछ चीजों की जिम्मेदारी लीजिएगा। और
अन्य लोगो को भी इस बाबत जागरूक करने के लिहाज से बरसात से पूर्व इस सन्देश को आगे बढ़ाते रहिएगा..
कितना ही अच्छा हो, कि हम समय रहते प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान करना सीख जाएं.. वृक्षों को लेकर राजस्थान ने समूचे देश में जो मॉडल प्रस्तुत किया है वाकई वह सराहनीय है.. उन लोगों ने न सिर्फ माना है..वल्कि दिल से स्वीकारा हैं .. कि “वृक्ष ही जीवन हैं” धन्यवाद
विचारक ; योगेंद्र सिंह पचहरा, के एल जैन इंटर कॉलेज,सासनी,हाथरस। (मूल निवासी नीमगांव,राया मथुरा)
श्री राधे गोविंद 🙏🏻🌱🙏🏻
Badiya sir
LikeLiked by 1 person