201.. धैर्य

एक बार ईश्वर का एक सच्चा भक्त अकेला उदास बैठा हुआ कुछ सोच रहा था..उसको दुखी देख..भगवन उसके पास आये।अचानक भगवान को अपने सामने देख भक्त ने पुछा! हे प्रभो!

मुझे ज़िन्दगी में बहुत असफलताएं मिलीं हैं, जिनसे मैं अब निराश हो चूका हूँ। आप ही मुझे बताओ कि मेरे इस जीवन का अब क्या प्रयोजन है..? और इसकी क्या कीमत है..??

भगवान ने अपने उस अनन्य भक्त को एक लाल रंग का चमकदार पत्थर देते हुए, कहा “जाओ दुनियां में इस पत्थर की कीमत का पता लगाओ, इसके साथ ही तुम्हें अपनी ज़िन्दगी की कीमत का भी पता चल जाएगा..

लेकिन ध्यान रहे कि इस पत्थर को बेचना नहीं।”

वो भक्त उस लाल चमकदार पत्थर को लेकर सबसे पहले एक फल वाले के पास गया और कहा “भाई.. ये पत्थर कितने में खरीद लोगे?” फल वाले ने पत्थर को ध्यान से देखा और कहा “मुझसे 10 संतरे ले जाओ और ये पत्थर मुझे दे दो।”

उस व्यक्ति ने कहा कि, नहीं मैं, इसे बेच तो नहीं सकता..

फिर वो आदमी एक सब्ज़ी वाले के पास गया और उसे कहा “भाई… ये लाल पत्थर कितने का खरीद लोगे?” सब्ज़ी वाले ने कहा कि मुझसे एक बोरी आलू ले जाओ और ये पत्थर मुझे बेच दो।

लेकिन भगवान् के कहे अनुसार उस भक्त ने कहा कि नहीं मैं ये बेच ही तो नहीं सकता।

फिर वो व्यक्ति उस पत्थर को लेकर एक सुनार की दूकान में गया जहाँ कई तरह-तरह के आभूषण पड़े हुए थे। उस व्यक्ति ने सुनार को वो पत्थर दिखाया और उस सुनार ने बड़े गौर से उस पत्थर को देखा और फिर कहा “मैं तुम्हें 1 करोड़ रुपये दूंगा, ये पत्थर मुझे बेच दो।” फिर उस व्यक्ति ने सुनार से माफ़ी मांगी और कहा कि ये पत्थर मैं बेचने नहीं केवल इसकी कीमत ही जानने आया हूं।

सुनार ने फिर कहा “अच्छा चलो ठीक है, मैं तुम्हें 2 करोड़ दे दूंगा, ये पत्थर मुझे दे दो।” सुनार की बात सुनकर अब वो भक्त चौंक गया।

लेकिन सुनार को मना करके वो आगे बढ़ गया और अब वह एक हीरे बेचने वाले की दूकान में पहुंचा, हीरे का व्यापारी उस लाल चमकदार पत्थर को पूरे 10 मिनट तक देखता ही रहा.. और फिर एक मलमल का कपडा लिया और उस पत्थर को उस पर रख दिया. फिर उस व्यापारी ने उस पत्थर पर अपना माथा टेका और कहा “तुम्हें ये वेश कीमती चीज कहाँ से मिली!!, मेरे भाई ये तो इस दुनिया का सबसे “अनमोल रत्न” है। अगर दुनिया की सारी दौलत भी लगा दी जाए तो भी इस लाल पत्थर को नहीं खरीदा जा सकता।

ये सुनकर..तो वो भक्त बहुत ही हैरान हुआ और दौड़ा.. दौड़ा.. सीधा भगवान के पास गया और उन्हें सारी घटनाएं बताई और फिर उसने भगवान से पुछा “हे प्रभो! अब मुझे बताईये कि मेरे इस जीवन की क्या कीमत है?” भगवान ने कहा “फल वाले ने, सब्ज़ी वाले ने, सुनार ने और हीरे के व्यापारी ने। तुम्हें जीवन की वास्तविक कीमत बता तो दी। बड़े भोले हो नहीं समझे!!

हे मनुष्य, किसी के लिए तुम एक पत्थर के टुकड़े के ही सामान हो, तो किसी के लिए बहुमूल्य रत्न समान। हर किसी ने अपनी अपनी क्षमता व जानकारी के अनुसार तुम्हें उस पत्थर की कीमत के रूप में तुम्हारी कीमत बता दी है। लेकिन उस हीरे के व्यापारी ने जिस प्रकार इस पत्थर को पहचान कर..वास्तविक कीमत लगाई है। ठीक वैसे सभी लोग तुम्हारी अर्थात किसी भी सांसारिक ‘व्यक्ति’ की असल कीमत नहीं जान पाते.. अतः वे अंडर एस्टीमेट करते हैं..

इसीलिए अब ज़िन्दगी में कभी निराश मत होना, बस त्यागपूर्ण भाव में जीते.. हुए ‘धैर्य’ से अपना कर्म करते चले जाइयेगा। इसी में “जीवन” का सार है।

शिक्षा:

इस दुनिया में हर मनुष्य के पास कोई ना कोई ऐसा हुनर अवश्य होता है जो सही वक़्त पर निखर कर आता ही है। लेकिन उसके लिए परिश्रम और धैर्य की ज़रूरत पड़ती है।

सदैव प्रसन्न रहिये। जो प्राप्त है, मेरे ख्याल से वही पर्याप्त भी है।। 👍 पचहरा सर

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