194- ‘विश्वसनीय-मित्र’

हिंदी फिल्म ‘खुदगर्ज़’ का ये गाना..

“ज़िंदगी का नाम दोस्ती.. दोस्ती का नाम जिंदगी..”

लोगों को ‘दोस्ती’ के मायने समझाने में काफ़ी सहायक सिद्ध हुआ है।

मग़र अफ़सोस! फिर भी कुछ लोग ‘दोस्त’ या ‘मित्र’ शब्द को बड़े हल्के में लेते हैं। यदि इंसान मित्रता के मानकों पर खरा हो,तो मेरे ख़्याल से ‘मित्र’ एक भारी भरकम शब्द है।

दरअसल, दुनियाँ में ‘विश्वसनीय-मित्र’ न केवल इंसान की ख़ुशनसीब जिंदगी का आकार निर्धारित करता है। अपितु जीवन का सारा दारोमदार इसी रिश्ते पर टिका है।

ये “विश्वसनीय मित्र” का रिश्ता सदैव दुनियां के सारे रिश्तों को पीछे छोड़ सबसे ऊंचे पायदान पर स्थापित है।

लेकिन मित्र के असल मायने जानते हुए भी लोग दैनिक चलन में किसी को भी ‘मित्र’ बोल दे रहे हैं।

क्या आपके जीवन में ‘विश्वसनीय-मित्र’ है..? यदि है, तो वास्तव में आप दुनियाँ के ‘खुशनसीब-इंसानों’ में से एक हैं।

मित्रता के संदर्भ में,मैं सदैव कहता रहा हूँ कि, प्रत्येक के जीवन में एक ऐसा मित्र अवश्य होना चाहिए। जिसे आप जब चाहें ‘कॉल’ कर सकें, ‘कॉल’ से मेरा मतलव किसी दिक्कत में निःसंकोच उसे आवाज दे सकें, ‘पुकार’ सके, आज सोशल-मीडिया के युग में..किसी इमरजेंसी में उसके नाम कोई मैसेज छोड़ सकें, कभी ‘किंकर्तव्यविमूढ़’ वाली स्थिति बन जाय, तो उससे सलाह-मशविरा कर सकें, और अपने सुख-दुःख भी बाँट सकें।

यदि वह कभी भटके, तो बड़े भाई वाले आत्मीय-अंदाज से निःसंकोच उसे डांट सकें, निष्कपट लड़ सकें, ईश्वर न करे कभी हम विकट-परिस्थितियों में हों, ‘नियति’ के हाथों मजबूर यदि कभी ऐसा हो,भी तो हम उसके कंधे पर सिर रख कर रो सकें,अपना जी हल्का कर सकें।और ठीक वैसे ही एकदम फ्रैंकली खुशहाली में हम उसके साथ खुलकर हँस सकें, जब चाहें मिल सकें, बेझिझक, अपनी हर बात निःसंकोच होकर उसे बता सकें.. बिना इस बात की परवाह किये कि,’ वह ‘ क्या कहेगा…?,क्या सोचेगा..?

मग़र इसके मानकों में असल शर्त है कि, ऐसा तब होगा जब उसके सामने ‘हमारा’ पूरा जीवन और हमारे सामने ‘उसका’ पूरा जीवन विल्कुल एक ‘खुली-किताब’ की तरह होगा।

अगर ऐसा ‘विश्वसनीय-मित्र’ हमारे जीवन में है, तो वाकई हम दुनिया के सबसे ‘खुशनसीब-इंसान’ हैं।

इस बिंदु पर चिंतन कीजिएगा..

हो सके तो किसी के जीवन में एक ‘विश्वसनीय-मित्र’ की भूमिका निभाइयेगा..

जिसका ‘मूल-मंत्र’ है, पहले किसी को आत्मीयता से सु..निएगा। क्योंकि अधिकांश लोग जो अपने अकेलेपन के अवसाद से ग्रसित हैं, वे वही लोग होते हैं जिनके पास ऐसा ‘कान’ नहीं होता जो उन्हें पूरे विश्वास के साथ धैर्यपूर्वक सुनले, और ना हीं ऐसा कंधा होता है, जिस पर वह अपना सिर रखकर अपना जी हल्का.. कर ले।

आये दिन आप देख ही रहे हो दुनियाँ में कितनी आत्महत्याएँ होती हैं, क्या इस पर किसी ने कभी विचार किया, कि..ये क्यों होती हैं..?? इनके पीछे क्या कारण होते हैं ???

मेरे विचार से उनके जीवन में ‘सुनाने वाले’ तो बहुत होते हैं। परन्तु उनकी..’सुनने वाला’ कोई भी नहीं…होता! और ये एक लंबे समय तक होता है तब ऐसी घटनाएं घटती हैं।

शायद इसीलिए वे… ऐसा कर जाते हैं।😢पढ़ने के लिए thanks👍

2 thoughts on “194- ‘विश्वसनीय-मित्र’”

  1. मित्र दुनियां का सबसे बड़ा धन यदि किसी को विश्वासपात्र मित्र मिल जाए तो वह दुनियां का सबसे बड़ा खुशनसीब एवं धनवान होगा..👍👍

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