191- स्वर्ग

क्या आप जानते हैं..? कि, पृथ्वी पर स्वर्ग कहाँ है..?

‘आध्यात्मिक’ दृष्टि से ईश्वर की शरण में रहते हुए शांत चित्त वाले प्राणी के लिए तो धरती के हर भू-भाग पर ‘स्वर्ग’ है।

मग़र शास्त्रों व ऐतिहासिक भू-अभिलेखों के आधार पर ‘उज्जैन’ नगरी “स्वर्ग” है।

प्रश्न है कि, ‘उज्जैन’ स्वर्ग कैसे है..? चलो! कुछ तथ्यों के आधार पर समझने का प्रयास करते हैं..👍

उज्जैन – मध्य प्रदेश (MP) में है। एक मात्र स्थान जहाँ शक्तिपीठ भी है, ज्योतिर्लिंग भी है,यहीं सदैव कुम्भ महापर्व का भी आयोजन किया जाता है ।

यहाँ साढ़े तीन काल विराजमान है। “महाँकाल,कालभैरव, गढ़कालिका और अर्धकाल भैरव।”

यहाँ तीन गणेश विराजमान है। “चिंतामन,मंछामन, इच्छामन” ।

यहाँ 84 महादेव व सात सागर भी हैं।

“ये भगवान कृष्ण की शिक्षा स्थली है।।”

ये मंगल ग्रह की उत्पत्ति का स्थान है।।

“यही वो स्थान है। जिस नगरी ने हमें महाकवि कालीदास दिए।”

‘उज्जैन’ विश्व का एक मात्र स्थान है जहाँ अष्ट चिरंजीवियों का मंदिर है।

यहीं वे 8 देवता हैं जिन्हें अमरता का वरदान प्राप्त है (बाबा गुमानदेव हनुमान अष्ट चरिंजीवी मंदिर)

“राजा विक्रमादित्य ने भी जन्म लेकर इस धरा का मान बढ़ाया है।”

‘विश्व की एक मात्र उत्तर दिशा में बहने वाली ‘क्षिप्रा-नदी’ भी तो है यहां!!’

“इसके शमशान को भी तीर्थ का स्थान प्राप्त है जिसे ‘चक्र तीर्थ’ कहा गया है ।

यहां नो नारायण और सात सागर दोनों मौजूद हैं।

भारत को सोने की चिड़िया का दर्जा यहां के राजा विक्रमादित्य ने ही दिया था। इनके राज्य में सोने के सिक्के जो चलते थे। सम्राट राजा विक्रमादित्य के नाम से ही विक्रम संवत का आरंभ हुआ जो हर साल चैत्र माह के प्रतिप्रदा के दिन मनाया जाता है। जिससे हिन्दू पञ्चाङ्ग का नववर्ष शुरू होता है।

उज्जैन से ही ग्रह नक्षत्रों की गणना होती है कर्क रेखा भी उज्जैन से ही होकर गुजरती है। और तो और पूरी दुनिया का “केंद्र बिंदु” अर्थात Central Point भी यहीं है।

🌹🙏🏻 हर हर महादेव हर हर गंगे नमामि गंगे🙏

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