56- “नौ आदतें” बनाम “नवग्रह-शांति”

👇जरूर ध्यान दे:- “नौ आदतें या नौ ग्रह”
🕉 ज्योतिष व सांईटिफिक सोच के अनुसार आपके यश व सफलता के लिए नीचे लिखी “नौ आदतें” आपके जीवन में यदि हैं, तो बहुत अच्छा है और अगर ये आदतें नहीं हैं, तो आप मनुष्य-जीवन मिलने के बाद भी पशु समान ही हैं।

✒ आदत नम्बर 1…
अगर आपको बेवज़ह कहीं पर भी थूकने की आदत है तो यह निश्चित है कि, आपको यश, सम्मान मुश्किल से ही मिलेगा और यदि अकारण मिल भी जाता है तो ज्यादा देर नहीं टिकेगा।

✒ आदत नम्बर 2…
जिन लोगों को अपनी ‘जूठी थाली या बर्तन’ खाना खाने वाली जगह पर ही छोड़कर उठ जाने की आदत होती है “उनको सफलता,” स्थायी रूप से नहीं मिलती.. ऐसे लोगों को औरों की तुलना में अधिक मेहनत करनी पड़ती है।

✒ आदत नम्बर 3…
आपके घर पर जब भी कोई बाहर
से आये, चाहे मेहमान हो या कोई काम करने वाला, उसे कम से कम स्वच्छ पानी तो ज़रुर पिलाएं। ऐसा करने से हम राहु का सम्मान करते हैं। ये आदत अचानक आ पड़ने वाले कष्ट-संकट नहीं आने देती।

✒ आदत नम्बर 4…
घर के पौधे आपके अपने परिवार के सदस्यों जैसे ही होते हैं, उन्हें भी प्यार और थोड़ी देखभाल की जरुरत होती है। जो लोग नियमित रूप से पौधों को पानी देते हैं, उन लोगों को Depression या Anxiety जैसी परेशानियाँ कभी नहीं पकड़ पातीं।

✒ आदत नम्बर 5…
जो लोग बाहर से आकर घर में
अपने जूते,चप्पल, मोज़े इधर-उधर फैंक देते हैं, यथा स्थान नहीं रखते, उन्हें उनके शत्रु या प्रतिद्वन्दी सदैव परेशान करते हैं। इससे बचने के लिए अपने चप्पल-जूते करीने से लगाकर रखें, आपकी प्रतिष्ठा न केवल बनी रहेगी अपितु दिन प्रतिदिन बढ़ेगी।

✒ आदत नम्बर 6…
उन लोगों का राहु और शनि खराब होगा, जिनका अपना बिस्तर उनके उठकर जाने के बाद हमेशा फैला हुआ होगा, सिलवटें ज्यादा होंगी, चादर कहीं, तकिया कहीं, कम्बल कहीं.. ? ऐसे लोगों की दिनचर्या भी कभी भी व्यवस्थित नहीं रह पाती जीवन में सदैव उथल-पुथल बनी रहती है।

✒ आदत नम्बर 7…
पैरों की सफाई पर हम लोगों को हर वक्त ख़ास ध्यान देना चाहिए, जबकि हम में से बहुत सारे लोग पैरों को धोना या साफ करना भूल जाते हैं। रोज़ाना नहाते समय अपने पैरों को अच्छी तरह से धोयें, जब कभी भी बाहर से घर आयें तो हमेशा पांच मिनट रुककर मुँह और पैर अवश्य धोयें। आप खुद यह पाएंगे कि आपका चिड़चिड़ापन कम होगा, दिमाग की शक्ति बढे़गी और क्रोध धीरे-धीरे कम होने लगेगा और आपके जीवन में आनंद और शान्ति बढ़ेगी।

✒ आदत नम्बर 8…
जो लोग रोज़ खाली हाथ अपने घर लौटते हैं, धीरे-धीरे उस घर से “धन-लक्ष्मी” दूर चली जाती है और उस घर के सदस्यों में नकारात्मक या निराशा के भाव आने लगते हैं। इसके विपरीत घर लौटते समय बच्चों या बुजुर्गों के लिए कुछ न कुछ आवश्यक वस्तु या खाने के लिए जैसे; फल,टॉफी,चॉकलेट,मूंगफली,चना-चिरवा आदि मौसम के मुताविक लेकर आएं तो इस आदत से उस घर में बरकत बनी रहती है। उस घर में लक्ष्मी का वास स्थायी होता जाता है। हर रोज घर में कुछ न कुछ लेकर आना वृद्धि का सूचक माना गया है। ऐसे घर में सुख, समृद्धि और धन हमेशा बढ़ता जाता है। और घर में रहने वाले सदस्यों की भी तरक्की होती है।

✒ आदत नम्बर 9…
थाली में जूठन बिल्कुल न छोड़ें और ऐसी आदत अपनाने के लिए आज ही ठान लें और एकदम पक्का तय कर लें। इस आदत से आपको पैसों की कभी कमी नहीं होगी। अन्यथा सभी नौ के नौ ग्रहों के खराब होने का खतरा सदैव मंडराता रहेगा। कभी कुछ तो कभी कुछ करने योग्य फायदे वाले काम अधूरे पड़े रह जायेंगे और आपका समय, पैसा व ऊर्जा कहां नष्ट हो जायेगी, आपको पता ही नहीं चलेगा।
👉मेरा मानना है कि अच्छी बातें बाँटने से किसी न किसी का फायदा तो होता ही है। साथ साथ इस तरह के ज्ञान की बहुत अच्छी बातों का महत्त्व समझने वाले लोगों में आपकी इज़्जत भी बढ़ने की सम्भावना बनी रहती है…🥀 धन्यवाद

🌷 ईश्वर सबका भला करें 🌷

🙏राम राम जी🙏🌻आपका आने वाला वक्त शुभ व मंगलकारी हो🌻
विचारक

;युग पचहरा,
नीमगाँव, राया,मथुरा।

3 thoughts on “56- “नौ आदतें” बनाम “नवग्रह-शांति””

  1. ♦️♦️♦️♦️♦️♦️♦️♦️
    *आज का प्रेरक प्रसंग👇👇👇*
    *!! मदद !!*
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    *उस दिन सवेरे आठ बजे मैं अपने शहर से दूसरे शहर जाने के लिए निकला. मैं रेलवे स्टेशन पँहुचा, पर देरी से पँहुचने के कारण मेरी ट्रेन निकल चुकी थी. मेरे पास दोपहर की ट्रेन के अलावा कोई चारा नहीं था . मैंने सोचा कही नाश्ता कर लिया जाए .*
    *बहुत जोर की भूख लगी थी . मैं होटल की ओर जा रहा था . अचानक रास्ते में मेरी नजर फुटपाथ पर बैठे दो बच्चों पर पड़ी . दोनों लगभग 10-12 साल के रहे होंगे . बच्चों की हालत बहुत खराब थी .*
    *कमजोरी के कारण अस्थि पिंजर साफ दिखाई दे रहे थे . वे भूखे लग रहे थे . छोटा बच्चा बड़े को खाने के बारे में कह रहा था और बड़ा उसे चुप कराने की कोशिश कर रहा था . मैं अचानक रुक गया . दौड़ती भागती जिंदगी में पैर ठहर से गये .*
    *जीवन को देख मेरा मन भर आया . सोचा इन्हें कुछ पैसे दे दिए जाएँ . मैं उन्हें दस रु. देकर आगे बढ़ गया . तुरंत मेरे मन में एक विचार आया कितना कंजूस हूँ मैं . दस रु. का क्या मिलेगा ? चाय तक ढंग से न मिलेगी . स्वयं पर शर्म आयी फिर वापस लौटा . मैंने बच्चों से कहा – कुछ खाओगे ?*
    *बच्चे थोड़े असमंजस में पड़ गए . मैंने कहा बेटा ! मैं नाश्ता करने जा रहा हूँ , तुम भी कर लो . वे दोनों भूख के कारण तैयार हो गए . मेरे पीछे पीछे वे होटल में आ गए . उनके कपड़े गंदे होने से होटल वाले ने डांट दिया और भगाने लगा .*
    *मैंने कहा भाई साहब ! उन्हें जो खाना है वो उन्हें दो , पैसे मैं दूँगा . होटल वाले ने आश्चर्य से मेरी ओर देखा..! उसकी आँखों में उसके बर्ताव के लिए शर्म साफ दिखाई दी .*
    *बच्चों ने नाश्ता मिठाई व लस्सी माँगी . सेल्फ सर्विस के कारण मैंने नाश्ता बच्चों को लेकर दिया . बच्चे जब खाने लगे, उनके चेहरे की ख़ुशी कुछ निराली ही थी . मैंने भी एक अजीब आत्म संतोष महसूस किया . मैंने बच्चों को कहा बेटा ! अब जो मैंने तुम्हे पैसे दिए हैं उसमें एक रु. का शैम्पू लेकर हैण्ड पम्प के पास नहा लेना और फिर दोपहर शाम का खाना पास के मन्दिर में चलने वाले लंगर में खा लेना . और मैं नाश्ते के पैसे चुका कर फिर अपनी दौड़ती दिनचर्या की ओर बढ़ निकला .*
    *वहाँ आसपास के लोग बड़े सम्मान के साथ देख रहे थे . होटल वाले के शब्द आदर में परिवर्तित हो चुके थे . मैं स्टेशन की ओर निकला, थोडा मन भारी लग रहा था . मन थोडा उनके बारे में सोच कर दुखी हो रहा था .*
    *रास्ते में मंदिर आया . मैंने मंदिर की ओर देखा और कहा – हे भगवान ! आप कहाँ हो ? इन बच्चों की ये हालत ! ये भूख आप कैसे चुप बैठ सकते हैं ! !!*
    *दूसरे ही क्षण मेरे मन में विचार आया, अभी तक जो उन्हें नाश्ता दे रहा था वो कौन था ? क्या तुम्हें लगता है तुमने वह सब अपनी सोच से किया ? मैं स्तब्ध हो गया ! मेरे सारे प्रश्न समाप्त हो गए .*
    *ऐसा लगा जैसे मैंने ईश्वर से बात की हो ! मुझे समझ आ चुका था हम निमित्त मात्र हैं . उसके कार्य कलाप वो ही जानता है , इसीलिए वो महान है ! !!*
    *भगवान हमें किसी की मदद करने तब ही भेजता है , जब वह हमें उस काम के लायक समझता है . यह उसी की प्रेरणा होती है . किसी मदद को मना करना वैसा ही है जैसे भगवान के काम को मना करना .*
    *खुद में ईश्वर को देखना ध्यान है ! दूसरों में ईश्वर को देखना प्रेम है ! ईश्वर को सब में और सब में ईश्वर को देखना ज्ञान है !*
    *सदैव प्रसन्न रहिये।*
    *जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
    ✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
    राहुल फोटो सासनी*आज का प्रेरक प्रसङ्ग*
    *!! काबिलियत की पहचान !!*
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    किसी जंगल में एक बहुत बड़ा तालाब था . तालाब के पास एक बागीचा था , जिसमे अनेक प्रकार के पेड़ पौधे लगे थे . दूर- दूर से लोग वहाँ आते और बागीचे की तारीफ करते। गुलाब के पेड़ पे लगा पत्ता हर रोज लोगों को आते-जाते और फूलों की तारीफ करते देखता, उसे लगता की हो सकता है एक दिन कोई उसकी भी तारीफ करे. पर जब काफी दिन बीत जाने के बाद भी किसी ने उसकी तारीफ नहीं की तो वो काफी हीन महसूस करने लगा . उसके अन्दर तरह-तरह के विचार आने लगे—” सभी लोग गुलाब और अन्य फूलों की तारीफ करते नहीं थकते पर मुझे कोई देखता तक नहीं।
    शायद मेरा जीवन किसी काम का नहीं …कहाँ ये खूबसूरत फूल और कहाँ मैं… ” और ऐसे विचार सोच कर वो पत्ता काफी उदास रहने लगा. दिन यूँही बीत रहे थे कि एक दिन जंगल में बड़ी जोर-जोर से हवा चलने लगी और देखते-देखते उसने आंधी का रूप ले लिया. बागीचे के पेड़-पौधे तहस-नहस होने लगे , देखते-देखते सभी फूल ज़मीन पर गिर कर निढाल हो गए , पत्ता भी अपनी शाखा से अलग हो गया और उड़ते-उड़ते तालाब में जा गिरा. पत्ते ने देखा कि उससे कुछ ही दूर पर कहीं से एक चींटी हवा के झोंको की वजह से तालाब में आ गिरी थी और अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी. चींटी प्रयास करते-करते काफी थक चुकी थी और उसे अपनी मृत्यु तय लग रही थी कि तभी पत्ते ने उसे आवाज़ दी, ” घबराओ नहीं।
    आओ , मैं तुम्हारी मदद कर देता हूँ .”, और ऐसा कहते हुए अपनी उपर बैठा लिया. आंधी रुकते-रुकते पत्ता तालाब के एक छोर पर पहुँच गया; चींटी किनारे पर पहुँच कर बहुत खुश हो गयी और बोली, ” आपने आज मेरी जान बचा कर बहुत बड़ा उपकार किया है , सचमुच आप महान हैं, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ! “ यह सुनकर पत्ता भावुक हो गया और बोला,” धन्यवाद तो मुझे करना चाहिए, क्योंकि तुम्हारी वजह से आज पहली बार मेरा सामना मेरी काबिलियत से हुआ , जिससे मैं आज तक अनजान था. आज पहली बार मैंने अपने जीवन के मकसद और अपनी ताकत को पहचान पाया हूँ … .’
    शिक्षा:-
    मित्रों, ईश्वर ने हम सभी को अनोखी शक्तियां दी हैं ; कई बार हम खुद अपनी काबिलियत से अनजान होते हैं और समय आने पर हमें इसका पता चलता है, हमें इस बात को समझना चाहिए कि किसी एक काम में असफल होने का मतलब हमेशा के लिए अयोग्य होना नही है. खुद की काबिलियत को पहचान कर आप वह काम कर सकते हैं, जो आज तक किसी ने नही किया है।

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