अंतरराष्ट्रीय जाट दिवस [13 अप्रैल] आज का दिन आत्मावलोकन और चिंतन के साथ साथ अपनी कौम के कुछ नशे की लत के शिकार होते बंधुओं जिनकी हरकतें पूर्वजों के सारे किए धरे पर पानी फेर दे रहीं..हैं। आए दिन होती दहेज आदि की घटनाओं में नामित होते.. उन भटके हुए कदमों को रोकने के लिए भी कौम के मजबूत संगठनों द्वारा अब इस दिन को संकल्प लेने का दिन बनना होगा।
समझें कि हमारा इतिहास क्या था..और आज हम कहां पर खड़े है ..??
नि:संदेह हमारा इतिहास स्वर्णिम रहा है जिसपर हमें और हमारी संततियों को गौरवांवित होने के साथ साथ उसे सदैव मेंटेन रखने का प्रयास करना चाहिए। इसमें कोई शक नहीं है कि हमारे पूर्वजो का देश के निर्माण में अभूतपूर्व योगदान रहा है।
हम अपने नज़रिए से देख रहे हैं.. तब ऐसा दिख रहा है। अन्यथा मेरे विचार से देश की दूसरी जातियों का योगदान भी कम नहीं रहा था। जिसकी जितनी सामर्थ्य थी लगभग सबने भरपूर योगदान दिया था। तब कहीं ये आजादी नसीब हो सकी थी।
क्योंकि आज हमें दिमांगों में अंग्रेजियत लिए इन देशी नेताओं ने जाति,उपजाति,धर्म,संप्रदाय के छोटे छोटे पीसिज में इस कदर काटकर रख दिया है कि हम मनुष्य अपना “मानव धर्म” भूलकर जाति,धर्मों के लेंसिज से देखने के आदी हो चुके हैं। वही देखते हैं,वही कहते हैं जो ये मौका परस्त नेता हमें दिखाना या कहलवाना चाहते हैं।
चलो में अब मुख्य बिंदु पर आता हूं..
हमने किसान रूप में अन्न उगा कर देश के अन्न के भंडारों को भरा है, तो दूसरी ओर देश के सजग प्रहरी बन अपने प्राणों की भी परवाह न करते हुए पूरी मुस्तैदी से देश की सीमाओं की रक्षा की है। देशकाल परिस्थितियों के अनुसार हमारे पूर्वजों ने मुगलो से न सिर्फ लोहा लिया वल्कि दिल्ली को फतेह कर उसके असधाती फाटक तक को उखाड़ कर अपने साथ ले आए।
स्वतंत्रता संग्राम मे अंग्रेजो के खिलाफ आंदोलन मे बाबा शाहमल व सरदार भगतसिंह जैसे कई एक कद्दावर देश भक्तों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिकाओं से देश को आजाद करवाने में अपना योगदान दिया।
किंतु तुच्छ मानसिकता के इतिहासकारो ने गंदी राजनीति के शिकार नेताओं की सह पर इतिहास को लिखते समय न सिर्फ जाट कौम के प्रति अन्याय किया, अपितु देश की अन्य कौमों के सच्चे स्वतंत्रता सैनानियों को भी नजर अंदाज कर दिया गया।
जबकि ऐसे ऐसे लोगों को इतिहास में जगह दी गई है,जिन्होंने कभी दिल्ली की दहलीज पर कदम तक नहीं रखा। फिर भी तमाम विरोधों और भ्रांतियों का सामना करते हुए ,अपनी मेहनत और लगन के बल पर दुनिया के प्रत्येक क्षेत्र में इस मार्शल कौम ने अपनी अलग छाप छोड़ने में कभी भी कसर नहीं छोड़ी है।
हमारे जाट समाज के महान गौरव सर छोटूराम जैसे किसान नेता भी हुए जिन्होंने किसानो को एकत्र कर उनको हक के लिए संघर्ष करना अपनी फसलों का सही मूल्य कैसे लिया जाए, ये सब भी सिखाया।
सभी देशवासियों के आशीर्वाद से भारत रत्न महान किसान नेता स्व. श्री चौधरी चरणसिंह जी ने प्रधानमंत्री,मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों को सुशोभित किया।
हरियाणा से त्याग की प्रतिमूर्ति ताऊ देवीलाल जी उप प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री रहे, उनके पास प्रधानमंत्री बनने का अवसर था,लेकिन बताया जाता है कि उस वक्त देश पर हुकूमत चलाने का उनका अपना निजी “होम वर्क” कंप्लीट नहीं था।,तो उन्होंने वी पी सिंह जी को न केवल आगे बढ़ाया..अपितु प्रधानमंत्री बनवाया और आखिर तक साथ दिया। स्वयं सब के ताऊ की हैसियत से उप प्रधानमंत्री बन परामर्श करते रहे।
पंजाब मे अधिकतर मुख्यमंत्री हमारे ही लोग बनते रहे हैं।
हां, राजस्थान एकलौता ऐसा राज्य अवश्य है, जहाँ सभी प्रदेशों से हमारी संख्या अधिक होते हुए भी हम प्रदेश के शीर्ष पद मुख्यमंत्री नहीं बन पाए हैं। राजस्थान के प्रबुद्ध लोगों को इस पर गंभीर चिंतन मनन करना होगा।
इसके अतिरिक्त देश और और प्रदेशों की मंत्रीमंडल के हिस्से भी हम रहे हैं।
आज हम देश की सभी सेनाओ के सेनाध्यक्ष भी बन रहे है, प्रशासनिक सेवाओ के उच्च पदों पर बैठकर देश के नीति निर्धारण मे भी अहम भूमिका में हैं।
हमारे भाई – बहन भी खेलों मे अपनी विलक्षण प्रतिभा से मेडलों की बौछार करते हुए देश की 140 करोड़ जनता को कभी निराश नही होने देते।
हम विश्वविद्यालयों के कुलपति और शिक्षक बन वर्तमान पीढी का मार्गदर्शन भी पूरे इत्मीनान से कर रहे है, हमारे भाई बहन चिकित्सा के क्षेत्र में तैनात होकर देश की जनता की सेवा कर रहे है।
आपको जानकर खुशी होगी कि हम अब पारंपरिक व्यवसायों के साथ साथ व्यापार मे भी दो दो हाथ कर रहे हैं। और तकनीक के क्षेत्र मे भी हम अपना योगदान देने में सक्षम हैं। इसके साथ साथ निर्भीक पत्रकारिता भी कर रहे है।
हमारी कौम सदैव अपने पूर्वजों के इतिहास पर गर्व करती है। ये सौभाग्य आगे भी बना रहे..
लेकिन वर्तमान मे जब हम नाशाखोरी, दिखावा, गुंडागर्दी और दहेज़ जैसी गंभीर सामाजिक समस्या में लिप्त होते अपनी कौम के बंदों को देखते हैं तो समाज में लोगों के समक्ष शर्म से हम सबकी नजरें नीचे देखने को बाध्य हो जाती हैं।
हमें उन भटकते कदमों को पुर ज़ोर रोकने की तरफ भी ध्यान देना होगा। आज अंतरराष्ट्रीय जाट दिवस पर हम सभी अपने पूर्वजों के योगदान को याद करते हुए उनको कोटि कोटि नमन करते हैं। और आप सभी को हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं प्रेषित करते हैं धन्यवाद राधे गोविंद 🙏🙏