हर परिवार में वरिष्ठजन यानी बुजुर्ग सदैव उस परिवार की “शान” होते हैं।
आओ एक प्रेरणादायक कहानी के द्वारा इस सत्य को आज की युवा पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं।
एक बहुत बड़ा विशाल वृक्ष था। उस पर कई एक हंस रहते थे। उनमें एक हंस थोड़ा तेज, बुद्धिमान और काफ़ी दूरदर्शी था। सब उसका आदर करते थे, उसे सम्मान से सभी ‘ताऊ’ कहकर पुकारते थे।
एक दिन उसने एक नन्ही-सी बेल को उसी पेड़ की जड़ से ऊपर तने पर नीचे से ऊपर की ओर लिपटकर चढ़ते हुए देखा। ताऊ ने दूसरे हंसों को बुलाकर दिखाते हुए बताया, इस बेल को जहां भी देखो नष्ट करते रहा करो! वरना, एक दिन ये बेल हम सबको मौत के मुंह में ले जाएगी।
एक युवा हंस, हंसते.. हुए बोला, ताऊ, ये छोटी-सी बेल हमें कियूं कर मौत के मुंह में ले जावेगी..? थारी बात म्हारी समझ में न आणे की।
बुजुर्ग हंस ने समझाया, अरे अक्कड़ के दुश्मन! आज यू बेल तुम्हें छोटी-सी दिखरी है ना, यू धीरे-धीरे एक दिन पेड़ के सारे तने को लपेटा मारकर ऊपर तक आ जागी। फिर बेल का तना मोटा होने लगेगा और पेड़ से चिपक जावेगा, तब नीचे से ऊपर तक पेड़ पर चढ़ने के लिए यू सीढ़ी नु काम करेगी। कोई भी शिकारी चढ़के हम तक पहुंच जावेगा और एक दिन हम सब मारे जावेंगे, नू कहरा था मैं।
मग़र इस बात पर युवा हंसों को यकीन न आया, एक छोटी-सी बेल कैसे सीढ़ी बन जावेगी..? एक और हंस बोला, ताऊ, तू तो एक छोटी-सी बेल को खींच के कुछ ज्यादा ही लंबा कर रिया..है, एक हंस बड़बड़ाया, यू ताऊ अपनी अक्कड़ का रौब बनाये रखने कू अंट-शंट कहाणी बणा ता रहेवे.. ऐसा कुछ ना होवेगा।
इस प्रकार किसी दूसरे हंसों ने भी ताऊ की बात को तबज्जो ना दी। इतनी दूर तक देख पाने की उनमें अक्ल जो ना थी? समय बीतता रिहा.. बेल लिपटते-लिपटते ऊपर बड्डी-बड्डी शाखाओं तक पहुंच गी। बेल का तना मोटा होना शुरू हुआ और सचमुच ही पेड़ के तने पर सीढ़ी सी बण गी। जिस पर आसानी से अब कोई भी चढ़के आ सकें।
आज उन सब कू ताऊ की बात सच्ची होती दिखरी.. पर इब कुछ भी न हो सके। क्योंकि बेल इतनी मजबूत जो होगी सै। इब उसे नष्ट करना हंसों के बस की बात ना थी।
एक दिन जब सब हंस दाना चुगणे बाहर गए हुवे थे, तब मौका पाकर एक बहेलिया उधर आ निकड़ा। पेड़ पर बनी सीढ़ी को देखते ही उसने पेड़ पर चढ़कर जाल बिछाया और चला गया।
सांझ को सारे हंस लौट आए और जब पेड़ से उतरे तो बहेलिए के जाल में बुरी तरह फंस गए। जब वे जाल में फंस गए और फड़फड़ाने लगे, तब उन्हें ताऊ की बुद्धिमानी और दूरदर्शिता का बोध हुआ। और याद भी आयी। इब तो सब ताऊ की बात न मानने के लिए लज्जित से होण लाग रहे.. और अपने आपको कोस रहे.. ताऊ सबसे रुष्ट होके एक कोणे में कू चुप-चाप सा बैठ्या था।
एक हंस ने हिम्मत करके कहा, ताऊ, हम तो घणे मूर्ख सै, लेकिन अब हम सु तू! यू मुंह न फेर। दूसरा हंस बोला, इस संकट से निकाडने की तरकीब तू ही जानें .. ताऊ तू हमें बता क्यों न दे..? आगे से यूं तेरी कोई बात न टलेगी.. सभी हंसों ने हामी भरी तब ताऊ ने उन्हें बताया,
ताऊ बोल्या! रे मूर्खो! मेरी बात ध्याण से सुनो। सुबह जब बहेलिया आवे, तब सब के सब मुर्दा होणे का बहान्ना करियों। बहेलिया तुम्हें मुर्दा समझकर जाल से निकालकर जमीन पर रखता जावेगा। वहां भी कुछ देर मरे के समान पड़े रहियो। जैसे ही वह अन्तिम हंस को नीचे रखेगा, मैं सीटी बजा दूँगा। मेरी सीटी सुनते ही सब उड़ जाणा।
सुबह बहेलिया आया। हंसों ने वैसा ही किया, जैसा ताऊ ने सुझाया था। सचमुच बहेलिया हंसों को मुर्दा समझकर जमीन पर पटकता गया। आखिरी हँस के जमीन पर गिरते ही ताऊ की सीटी की आवाज के साथ ही सारे हंस एकदम उड़ लिए।
बहेलिया, अवाक! टुकुर-टुकुर देखता रह गिया।
जी विल्कुल, वरिष्ठजन घर की धरोहर हैं। वे हमारे संरक्षक एवं मार्गदर्शक होते है। जिस तरह आंगन में पीपल का वृक्ष फल नहीं देता, परंतु छाया व कार्बनडाईऑक्साइड लेकर ऑक्सीजन अवश्य देता रहवे।
ठीक उसी तरह हमारे घर के बुजुर्ग बुढ़ापे में हमे भले ही आर्थिक रूप से सहयोग न कर पाते हों, परंतु हमें अच्छे संस्कार एवं शुभ आशीर्वाद के साथ-साथ उनके अनुभवों की समझ से कई-एक बाते सीखने को मिलती है।
वास्तव में बड़े-बुजुर्ग “परिवार की शान” होते हैं। वो कोई कूड़ा-करकट नहीं हैं, जिसे कि परिवार से बाहर निकाल फेंका जाए।
अपने प्यार से रिश्तों को सींचने वाले इन बुजुगों को ख़ुद के बच्चों से प्यार व सम्मान चाहिए..न कि अपमान एवं तिरस्कार।
अपने बच्चों की खातिर अपना जीवन दाँव पर लगा चुके इन बुजुर्गों को अब अपनों के प्यार की जरूरत है। यदि हम इन्हें सम्मान और परिवार में उचित स्थान देंगे तो नि:सन्देह हम लाभान्वित होंगे ।
ऐसा न करने पर हम अपने हाथों अपने बच्चों को उस प्यार, संस्कार, आशीर्वाद व स्पर्श से वंचित कर रहे हैं, जो उनकी जिंदगी को सँवार सकता है।
याद रखिए किराए से एक बार को प्यार तो मिल सकता है परंतु संस्कार, आशीर्वाद व दुआएँ नहीं।
ये सब हमें सदैव माँ-बाप व बुजुर्गों से ही मिल सकता है..!! अन्यत्र कहीं नहीं।
🙏🏽 🙏🏾राम राम जी🙏🏼🙏🏻