हमारे देश व प्रदेश की सरकारों द्वारा लागू की गयीं अधिकतर योजनायें सिर्फ कागज पर..सजायी जाती रही हैं और पैसा सम्बंधित लोग मिल बांटकर हाऊ-हप्प कर जाते हैं। ये बात ऊपर से नीचे तक सब समझते हैं… कभी-कभी मीडिया जाने-अनजाने सही काम कर जाता है..तो मुद्दा उछल भी जाता है,मग़र वे सब बहुत अच्छे ‘एक्टर ही नहीं रिएक्टर’भी हैं। जनता की एक नब्ज जानते हैं..इसलिए आश्वस्त करके कानूनी प्रक्रिया के पेच फंसा कर धीरे व चुपके से साफ निकल जाते हैं। ये विचारणीय, बिंदु क्या..? निसंदेह “निंदनीय” है।
मग़र अफसोस! जबतक देश की ‘जनता’ नेताओं द्वारा फेंके गए ‘जाति-धर्म’ के जाल में उलझी रहेगी तब तक उसका कुछ भी भला नहीं हो सकेगा।
हाल ही में.. मैं अंतरराज्यीय यात्रा से लौटा हूँ..ट्रैन का इंतजार करते वक्त जब मैं रेलवे ‘वेटिंग-रूम’ में बैठा था,तो वहां मेरी एक 36 वर्षीय बेरोजगार-युवक से बात हुई.. आपको उसी वार्ता के कुछ अंश……..सुनाता हूँ..जिससे देश में चल रही योजनाओं के परिणाम/दुष्परिणाम की तश्वीर स्पष्ट हो जाएगी।👍
मैंने शुरुआत यहां से की, कि और भई! क्या करते हो..? वह बोला :– बाबूजी! आजकल हम गरीबन कूँ कछु करने की जरूरत ही कहां है.? मैंने कहा :– क्या कहा..!! वो कैसे…..?
वह बोला :–बु ऐसे कि, आजकल देश/ प्रदेश की ससुरी सरकारन की योजनन में हम गरीबन कूँ सारी व्यवस्थाएं सेट जो कर दई हैं.. जैसे..शादी के लें.. श्रम कार्ड ते ‘मुख्यमंत्री राजमाता विजय राजे विवाह योजना.. 30,000 रुपिया और अंतर्जातीय कन्यादान योजना ते..250,000 रुपिया भी मिलत ए।
मैंने कहा :–भई! आपके बाल-बच्चे.. होंगे उनके लिए तो कुछ कमाना होगा…?
वह बोला :– जननी सुरक्षा ते डिलीवरी फ्री ए और साथ मे 1400 रूपिया कौ चेक। मे पास श्रम कार्ड हतुये। वा ते भगिनी प्रसूति योजना में वा टेंम मोय 20,000 रु और मिले हुते।।
मैने बोला :– बच्चे बड़ें होंगे.. पढ़ाई लिखाई के लिये भी तो पैसा चाहिए….?
वह मुस्कराकर बोला :– अरे बाबू जी जाकौ मानी आप बहुत ही भोले इंसानो..ई ससुरी सरकार बचवा लोगन की पढ़ाई, डिरेस,कितबिया और दुपैर का खनवा सब कछु फ्री…! देबत रही। श्रम कार्ड से ‘मुख्यमंत्री नौनिहाल और मेधावी छात्रवृत्ति योजना’ में हर साल बहुत पैसा मिल जातुए। साथ में लरिका कॉलेज हू कर रहौ है, आरटीई से डालकर BPL होने की वजह से बा कूँ फ्री एडमिशन और वजीफा दोनों मिलत ए। ताई ते तो हूँ ऐश कर रह तूं।
मैने बोला :– बरखुरदार! आपका घर कैसे चलाता है..?
वह बोला :– सब कछु योजनन ते है रो ए। जैसे; मेरी छोटी लरकिनी कूँ अभी सरकार ते साइकिलया मिली हैं। लरिका कूँ लॅपटाप, और बूढ़े मॉ-बापन कूँ वृद्धावस्था पेन्शन , और 1 रूपये किलो में गेहू और चावल भी मिलतए। तो बताओ घर चलावे की बात कर रये हो.. अब सब गरीबन कौ घर तो खूब दौड़ भररौ ए।
हालांकि, मुझे देश में चल रही योजनाओं की जानकारी थी। मग़र देश का आमजन/गरीब तबका / जरूरतमंद इन योजनाओं को इस रूप में ले रहा है इसका बिल्कुल भान नहीं था। वाक़ई उसकी बातें सुनकर मैं स्तब्ध रह गया!!! ज़ाहिर सी बात है कि, कोई भी शिक्षित-व्यक्ति योजनाओं के इस बैड-इफ़ेक्ट को सुनकर या समझकर चिंतित ही होगा। अब बात शुरू की थी तो ट्रैन आने तक कुछ तो बात करनी ही थी।..
मैं बोला :- अरे भई ! माॅ-बाप को कभी तीर्थयात्रा पर या कहीं घुमाने का मन हुआ, तो पैसा कहां से लाओगे..?
उसने कहा ……..अरे सर, एकबार तो मैंने उन लोगन कूँ मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना ते भेज भी दयो ए।
मैं बोला ……..हारी-बीमारी अर्थात इमरजेंसी के लिए.. ही सही दुनियाँ में आये हो तो कुछ काम तो तुम्हें करना ही चाहिए।
उसने कहा …….जा के लें तो हम सब गरीबन पै आयुष्मान कार्ड है न, जा से फ्री में पांच लाख तक कौ इलाज है जा तुये।
फिर मैंने बोला :–मांफ कीजियेगा..दुर्भाग्यवश आपके मा-बाप की उम्र है अगर अचानक चल वसे,तो अंतिम-संस्कार करोगे या नहीं..?उसमें तो पैसा खर्च होगा..?
वह बोला :–सरकार ने वा के लें भी 1 रू में ‘विद्युत शवदाह गृह’ बनवा रखे हैं..! बुड्ढे-बुढ़िया न कूँ उसी हीटरवा पै रखवा दंगो।
मैंने कहा :– अपने बच्चों की शादी-वादी के लिए तो कुछ सोचा होगा।..भई ! कर्म तो करना पड़ेगा। खाली दिमांग तो वैसे भी शैतान का घर कहा जाता है।
इस पर वह मुस्कुराया और चुटकी लेते हुए कहने लगा :–बाबूजी आप बड़ी जल्दी भूल जाओ। घूम फिर कर आप ! फिर ते बा ई बात पै आइगए। … तो फिर सुन लेउ…बच्चों की शादिया भी वैसे ही करुंगो जैसे मेरी भई थी…!! सरकारी योजना न ते।
अच्छा एक बात बता ये अच्छे-अच्छे कपड़े तू कहाँ से पहनता हैं ?
वह बोला :– राज की बात हैं..फिर भी मैं आपकूँ तो बता ही देता हूँ… “सरकारी जमीन पर कब्जा करो आवास योजना मे लोन मंजूर करवा लो और फिर वा ही मकान कूँ बेच कर फिर जमीन कब्जा कर पट्टा ले लो…!!” दूसरे तुम जैसे लाखों सर्विस-क्लास लोग काम करके हमारे लिए टैक्स भर ही रहे हैं। और किसान खेती में मेहनत करके अनाज पैदा करता है और सरकार उनसे औने-पौने दामों में खरीद कर हमे मुफ़्त में देती है ताकि हम काम न करें..बस वोट देने के लिए सदा ब ई गरीबी रेखा के नीचे बने रहें। फिर आप लोग क्यों बार-बार कहत रहे..कि हम कूँ काम करना चाहिए…?
वास्तव में ये बहुत बड़ी विडंबना है!!! देश व प्रदेशों की सरकारें हमारी मेहनत की कमाई कैसे लुट कर लोगों को निकम्मे बना रही हैं। वाह रे नेताओ..भारत माता की जय ….. वंदे मातरम…….🙏