Do you know..??
हमारे देश में एक और गांधी हैं..
हालांकि, तन, मन, धन से वे सदैव शिक्षा जगत में अपनी मेहनत से देश के नौनिहालों को सभ्य नागरिक बनाने में तल्लीन रहे..
और शायद पॉलिटिकल न होने के कारण ये “दूसरा गाँधी कभी लाइम लाइट का हिस्सा नहीं बन सका।
इसलिए देश का आम जन,तो लगभग इस ख़ास व्यक्तित्व से अनजान ही रहा।
ये सैद्धांतिक व्यक्ति अपने काम से काम रखने में कहीं अधिक विश्वास रखने के कारण देश स्तर पर कभी बहुत ज्यादा चर्चित नहीं हुआ।
ये तथ्य सत्य है। तो हमारे देश का प्रिंट और सोशल मीडिया दोनों आपको कठघरे में खड़े नज़र आ रहे होगे।
देश का चौथा स्तम्भ कहा जाने वाला ये मीडिया कहां था..?? वे जब ऐसी प्रेरणादायक सख्शियतों को जनता सामने नहीं ला सकते,तो देश के लिए आखिर उनका फिर..दायित्व क्या..है..??
पूरे देश में पचास हजार से अधिक स्कूल जिस व्यक्ति की प्रेरणा से चल रहे हों, ऐसे महापुरुष को यदि कम लोग जानते हैं, तो फिर “कठघरे वाली” बात में दम है।
विद्याभारती के संस्थापक श्री कृष्णचन्द्र गांधी ही “एक और गांधी” हैं। जो बहुत ही प्रशंसनीय व्यक्तित्व हैं।
वे जीवनभर रिक्शे में इसलिए नही बैठे, कि एक आदमी का बोझ दूसरा आदमी क्यों खींचे..??
ऐसा बताया जाता है कि, कृष्णचंद गांधी पूरे भारत देश में हजारों शिशु मन्दिर और विद्यामन्दिर स्कूलों के मालिक थे फिर भी करीब 10 किलो वजन का अपना बैग स्वयं लेकर चलते थे।
एकबार किसी कार्यक्रम के लिए कोई उनको रिसीव करने आया, तो उसे उनके लिए साईकिल लेकर ही आना पड़ा।
संघ के संस्कारों को करोड़ों बच्चों तक पहुंचाने वाले महामानव को इस शिक्षक दिवस, 2025 पर मेरा शत शत नमन है।
आप नए भारत के ऐसे शिक्षक थे जिन्हें आज के पावन दिन याद किया जाना नितांत आवश्यक है।
जय हिंद जय भारत
धन्यवाद
राधे गोविंद..राधे गोबिंद 🙏