268- Cosmic Dialogue

Dialogue of Universe अर्थात “ब्रह्मांड के संवाद” क्या आप विश्वास करते हैं कि ब्रह्मांड आपको बहुत गंभीरता पूर्वक बड़े ध्यान से सुनता है..??

वह आपकी भावनाओं को महसूस करने के साथ साथ..जब से धारा पर ब्रह्मांडीय प्रादुर्भाव हुआ है, तब से ..वह अपने तरीके से जीवों के साथ निरंतर संवाद में है।

ये बात इस पर कहीं अधिक निर्भर करती है कि अमुक जीव या फिर सब योनियों में श्रेष्ठ माने जाने वाले मनुष्य में “वॉइस ऑफ़ यूनिवर्स” के प्रति “सजगता” कितनी है..??

आपकी व्यक्तिगत अनुभूतियों से जमीं हुई दुनियांदारी की कार्मिक लेयर को थोड़ा कम करने के संदर्भ में यदि कहा जाए, जैसे कि, आपको कोई विशेष नंबर 11, 22 बार बार दिखते हैं, और इसी तरह कोई शब्द या फिर कोई घटना बार बार रिपीट होती है..ये सब ब्रह्मांड की ओर से हमको उसकी अपनी सांकेतिक भाषा में कुछ संदेश जैसे हैं और कुछ नहीं।

इसे “सिंक्रोनिसिटी”(Synchronicity) भी कहा गया है।

ये सच है कि ब्रह्मांड हमारी भावनाओं, विचारों और इच्छाओं को अपने अंदर ऊर्जा के रूप में ग्रहण करता है। जब हमारी भावनाएं और इरादे स्पष्ट होते हैं,तो यूनिवर्स उसी फ्रिक्वेंसी पर हमें अपनी प्रतिक्रियाएं भेजता है।

आपने अपने जीवनकाल में कई एक बार ऐसा अनुभव किया,तो होगा!! हम लोगों के जहन में कोई सवाल या फिर समस्या चल ही रही होती है.. कि तभी कोई अजनबी उसी से संबंधित यकायक कुछ जाता है। या कभी कोई दृश्य किसी स्क्रीन पर या दुनियां के किसी भौतिक पटल पर ऐसा घटित होता.. दिख जाता है।

अगर हम सजग हैं,तो उस वक्त वह हमारे लिए “आई ओपनर” हो सकता है।

गौर कीजिएगा, तो आप पाइएगा कि, ब्रह्मांड के ये “संवाद” व्यक्ति के अवचेतन मन, उसके सपनों, इंट्यूशंस और कुछ घटनाओं के माध्यम से यदाकदा घटते रहते हैं।

क्योंकि “ब्रह्मांड संवाद” वह प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति की चेतना,भावनाएं और विवेकशील विचार यूनिवर्स की ऊर्जा से जुड़कर संकेत, संयोग और जीवन के अनुभवों के रूप में व्यक्ति को मार्गदर्शन करते रहते हैं।

विज्ञान मुख्यत: प्रत्यक्ष,दोहराए जा सकने वाले प्रमाणों पर आधारित रहता है। जबकि ये ‘डायलॉग ऑफ़ यूनिवर्स’ अक्सर व्यक्ति के अनुभव पर आधारित है। जिसमें प्रत्येक व्यक्ति के अपने निजी अहसास अलग अलग अनुभूति कराते हैं।

ध्यान, मौन और सजगता के माध्यम से इन संकेतों को समझना व्यक्ति को अपने भीतर और ब्रह्मांड के साथ गहरे स्तर पर कनैक्ट करता है, जिससे कि वह अपने सच्चे पथ पर आगे बढ़ सके।

जैसे; किसी कठिन समय में अचानक मार्गदर्शन मिलना या किसी निर्णय लेने से पूर्व कुछ साइकिक डॉट्स (Psychic dotts) जिन्हे एक समय.. हम जोड़ नहीं पा रहे थे, फिर अचानक उनका बड़ी स्पष्टता से स्वत: मिलान हो जाना।

यह सब “कॉस्मिक डायलॉग” ही है। आवश्यकता है व्यक्ति को इनके प्रति थोड़ा सचेत और गंभीर रहने की।

धन्यवाद

युग पचहरा,

मुखिया परिवार,नीमगांव,मथुरा।

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