263- Safe zone

दिन प्रतिदिन चारों ओर तेजी से बदलती व्यवस्थाओं को देखते हुए ..आज की दुनियां बिच “सेफ जोन” (Safe-zone) की महत्ता और बढ़ जाती है।

हमें अपने आचरण के माध्यम से राक्षस जैसी बीमारियों से निजात पाने के लिए अपनी दैनिक क्रियाओं में कुछ अमूल चूल परिवर्तन करने होंगे।

जैसे; सुबह की शुरुआत, चाय,दूध और कॉफी से न करके , हल्दी जल /नींबू जल या अर्जुन की छाल के जल से करें।

एक घंटा.. घूमने, व्यायाम,योग आदि करने के बाद लगभग छह बजे ..बादाम,अखरोट,किसमिस चबाते चबाते न्यूज पेपर देखें।

तब स्नान आदि के बाद..प्रातः वंदन सूर्यदेव को जल आदि अर्पित करके.. सात बजे.. ब्रेकफास्ट में ओट्स/दलिया/खिचड़ी आदि लें। और समय से अपनी कर्मभूमि की ओर चल पड़े..

लंच में .. सलाद: खीरा,टमाटर, मूली,गाजर नींबू आदि भरपूर मात्रा में लें.. दही मट्ठा में काला नमक,भुनी हुई अजवाइन या जीरा वगैरह डालकर उचित रहता है। फिर एक या दो रोटी जौ/ज्वार/बेसन आदि मिक्स करके स्वाद बतौर हरी सब्जी, के साथ खाएं।

शाम को संध्या वंदन आदि से निवृत होकर..डिनर छह से आठ बजे के बीच कर लें। लेकिन हल्का ..दाल / सत्तू या कोई फल..(केला को छोड़कर) और थोड़ी देर बाद कम से कम एक गिलास दूध अवश्य लें।

यदि किसी दिन ऑफिस से रिलेटेड कोई आवश्यक कार्य आ जाने पर लेट नाइट जागना पड़े,तो काम के बीच चाय/कॉफी के स्थान पर गर्म पानी के साथ..एनर्जी के लिए मखाने,काजू और बादाम आदि तबे पर बिना घी के हल्के नमक में भून कर ले सकते हैं।

नोट;- 1 वैसे देर रात्रि में जगने पर कुछ ना ही लें तो स्वास्थ्य की दृष्टि से ज्यादा सही रहता है।

2- हां! शयन कक्ष में जाते समय.. केवल आधा गिलास जल पीकर दिन भर के सारे कर्म अपने इष्ट “राधे गोविंद” को समर्पित करके उनका नाम जप करते-करते उनकी याद में सो जाएं ..

3- ऐसी दिनचर्या अक्समात नहीं बनती। सही दिनचर्या केवल सदाचार अनुपालन या गुरु कृपा पात्र साधकों को ही नसीब हो पाती है। फिर भी जिन जिन को हो जाए, अहो भाग्य…

मेरा स्वाध्याय व अनुभव कहता है कि प्रारब्धवश थोड़ी बहुत सांसारिक असहजताओं के बीच भी ऐसे व्यक्तियों का जीवन सदैव “आनंदमय” रहता है। धन्यवाद।

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