262 – “लिपिड प्रोफाइल”

दरअसल “लिपिड प्रोफाइल टेस्ट” ब्लड में वसा आदि का स्तर जांचने के लिए किया जाता है।

इन द सेंस ऑफ मेडिकल टर्मोलोजी लिपिड बोले तो “चिकनाई,चर्बी,वसा,फैट” आदि का ब्लड में स्तर जांचने का टेस्ट जो व्यक्ति के बाजू से ब्लड लेकर लगभग 600 या 800 रुपए की फीस में टेस्ट हो जाता है।

ह्यूमन बॉडी के ब्लड में लिपिड की मात्रा बढ़ जाने से डाइबिटीज,ब्लड प्रेशर,ओबेसिटी,सिर चकराना, सीने में कभी कभी बाई ओर दर्द महसूस होना आदि की स्थिति में ये टेस्ट अवश्य कराया जाना चाहिए।

हालांकि इस टेस्ट के छह पैरामीटर्स होते हैं।

“एच डी एल” है..”हाई डेंसिटी लाइपो” – प्रोटीन।,

उसी प्रकार “एल डी एल” है..”लो डेंसिटी लाइपो” – प्रोटीन।

एक मशहूर डॉक्टर महोदय ने किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर हमें एक सुंदर सी कहानी के रूप में इस टेस्ट को शेयर किया हुआ है। क्षमा कीजिएगा सर्वजन हिताय की दृष्टि से हमने इसे अपने ब्लॉग के रूप में आपको साझा कर दिया है। आप देखेंगे कि डाक्टर साहब ने “लिपिड प्रोफाइल” को एक अनोखे अंदाज में बहुत ही सरल तरीके से समझाया है।

वे लिखते हैं इसे समझने के लिए हम अपने मन में एक कल्पना करें कि हमारा शरीर एक छोटे शहर की तरह है। इस शहर के मुख्य अपराधी हैं.. ‘कोलेस्ट्रॉल’, ट्राइग्लिसराइड। जो सिराओं और धमनियों नाम की सड़कों पर जाम लगाकर शरीर नाम के शहर में अराजकता फैलाने का काम करते रहते हैं।

ट्राइग्लिसराइड, कोलेस्ट्रॉल का सबसे बड़ा सहयोगी है। जिनका काम होता है सड़कों पर विचरण करना, अराजकता फैलाना और रास्तों पर जाम लगाना।

व्यक्ति के “हृदय” को इस तथाकथित शहर का केंद्र बताया गया है। और ऐसा सोचिएगा कि सभी सड़कें हृदय की ओर जाती हैं।

जब अपराधियों की संख्या बढ़ती है, तो वे अपराधी हृदय के कार्य को बाधित करने की कोशिश करते हैं। लेकिन हमारे शरीर रूपी – शहर में एक पुलिस बल भी तैनात रहता है। जो सदैव एक अच्छे पुलिस वाले की भूमिका में ही रहता है। जिसका नाम है।

“एच डी एल” (HDL) जो अपराधी तत्वों को पकड़कर यकृत (LIVER) रूपी जेल में डाल देता है। फिर लिवर उन अराजक तत्वों को शरीर से बाहर निकाल फैंकने के काम में लग जाता है।

मगर कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब हमें पता चलता है कि यहां अर्थात ब्लड में विलेन के रूप में एक भ्रष्ट पुलिसवाला भी रहता है। जिसे –वैज्ञानिक भाषा में एल डी एल (LDL) के नाम से जाना जाता है। एल डी एल इन अपराधी तत्वों को जेल से बाहर निकालकर अराजकता फैलाने के लिए वापस फिर से सड़कों पर छोड़ देता है। क्योंकि वह अराजकता में ही आनंदित होता है। अमुक ह्यूमन बॉडी में स्थित भटका हुआ ‘मन’ अर्थात..

जब व्यक्ति के आराम तलब हो जाने पर उसके अंदर आलस्य घर कर जाता है। तब एच डी एल / HDL के रूप में डॉक्टर साहब के अनुसार बताए गए “गुड मैनर्स पुलिस ऑफिसर्स” की संख्या निरंतर घटती चली जाती है, जिससे व्यक्ति का शरीर रूपी “शहर” अराजकता में डूबने लगता है। मींस व्यक्ति को बीमारियां जकड़ने लगती है।

फिर आप ही बताइएगा कौन ऐसे शहर में रहना चाहेगा.?? जहां हर तरफ़ अराजकता का बोलबाला हो।

अब अच्छे स्वास्थ्य की दृष्टि से सवाल बनता है कि,”क्या आप अपने शरीर के अपराधी तत्वों को कम करके ..अच्छे पुलिसवालों यानी HDL की संख्या बढ़ाने के प्रति इच्छुक हो ..??

यदि ऐसा है, तो फिर आपको अपने शरीर नाम के शहर के हर अंग को किसी न किसी बहाने मूमेंट में रखना होगा। आप अपने शरीर को “डायनेमिक कंडीशन” में रखने की आदत बना लेंगे अर्थात तत्काल चलना/ घूमना, एक्सरसाइज / योग करने को अहमियत देने लगेंगे,तो सबकुछ ठीक होने लगेगा। क्योंकि हमने हजारों बार सुना..या कहीं न कहीं पढ़ा है.. “Health is wealth” लेकिन व्यवहारिक तौर पर हमने कभी स्वास्थ्य को…

“धन/संपत्ति,रुपए/पैसे” के सामने वरीयता तो छोड़िए बराबरी का भी दर्जा नहीं दिया।

नब्बे फ़ीसदी लोगों ने केवल रुपए, आभूषण,जमीन आदि को ही “धन” का पर्याय माना हुआ है। जो निहायत ही गलत है।

हां घर, परिवार में किसी सदस्य या स्वयं के हॉस्पिटलाइज होने पर मन के किसी कोने में एक विचार अंकुरित अवश्य होता है कि अब्बल नंबर का “धन”,तो स्वास्थ्य ही है।। बाकी रुपया,पैसा आदि सब दोयम दर्जे के हैं।

चलो!अब रीयल पॉइंट पर आते हैं

वॉक करते समय व्यक्ति के बढ़ते हुए हर एक कदम के साथ गुड मैनर्स पुलिस ऑफिसर्स आई मीन “एच डी एल” की संख्या का स्तर बढ़ता चला जाता है। और शरीर रूपी “शहर” की शांति व्यवस्था भंग करने वाले..अपराधी तत्व जैसे; कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड और एलडीएल तत्काल घटने लग जाते हैं।

ऐसा नियमित रूप से करने पर हमारे शरीर नाम के शहर में शांति व्यवस्था फिर से बहाल होने लगती है। मानव शरीर फिर से स्वस्थ और ऊर्जावान हो जाता है। हमारा हृदय जिसे इस कहानी में शरीर रूपी शहर के “केंद्र” की संज्ञा दी गई है, अपराधियों के जाम से सुरक्षित हो जाता है। जब हमारा हृदय स्वस्थ होगा, तो हम भी स्वस्थ और मस्त रहेंगे।

इस कहानी से ये शिक्षा..मिलती है कि, हमें जब भी मौका मिले, किसी न किसी बहाने पैदल अवश्य चलना चाहिए। ऐसा करने से न केवल स्वस्थ रहेंगे अपितु अच्छी सेहत के साथ साथ अपने जीवन को आनंदमय बनाकर दिन प्रतिदिन की अपनी हर एक्टिविटीज को शयन कक्ष में नींद आने से पूर्व “राधे गोविंद” के चरणों में समर्पित करके हल्के होकर दिनो दिन मस्त होते चले जायेंगे।

हमारा बढ़ता हुआ हर कदम “एच डी एल” को बढ़ाएगा..वही हमें स्वस्थ बनाएगा। किसी गीतकार की रचना है..” जीवन चलने का नाम चलते रहो सुब हो .. शाम।”

अच्छी “जीवनशैली” के लिए छह आवश्यक आदतें:- अमल में लाने के लिए..चलो इन्हें भी इत्मीनान से पढ़ लेते हैं।

1. प्यास लगने से पहले पानी पिएं।

2. थकान महसूस करने से पहले आराम करें।

3. बीमार पड़ने से पहले अपना मेडिकल चेकअप करवाएं।

4. चमत्कार की प्रतीक्षा न करके सदैव अपने इष्ट “राधे गोविंद” पर पूर्ण भरोसा रखें।

5. अपना विश्वास भी कभी न खोएं।

6. हमेशा सकारात्मक रहें और बेहतर भविष्य की उम्मीद करें..चाहे हो कुछ भी।

पूरा पढ़ने के बाद जीवन में अमल करने वालों को मेरा हिर्दय की गहराइयों से धन्यवाद..है साधुवाद है।

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