255- अनुकरणीय तथ्य

मेरे देश में विद्वानों की न पहले कमी थी, न आज है, और न भविष्य में रहेगी।

यदि तनिक भी संदेह हो,तो इतिहास उठाकर देख लीजिएगा ..हम जिस “भारत” नाम के भू खंड पर हैं उस पर रहने वाली इंटेलेक्चुअल लॉबी की सदैव से ही जितनी प्रशंसा की जाए कम ही होगी।

सम्पूर्ण महाभारत का निचोड़ मात्र नौ पंक्तियों में समेट के रख दिया है।

पृथ्वी पर रहने वाली मानव.. जाति

चाहे वह जिस धर्म से बिलोंग करती हो।

स्त्री हो या पुरुष,

गरीब हो या अमीर,

दुनियां जहांन में कहीं भी क्यों न रहती हो।

ये तथ्य सब के लिए अनुपम,तो है ही मेरे विचार से अनुकरणीय भी है।

जो मानव के मार्गदर्शन हेतु इतने वृहद महाभारत में से खंगाल कर निकाले गए हैं

दरअसल, ये मसला ऐसे अनुपम विचारों को न सिर्फ पढ़ने का है अपितु ठीक से समझकर अपने व्यक्तिगत जीवन में अनुकरण करने का भी है।

चलो! देखते हैं…

. 1. यदि आप समय रहते अपने बच्चों की अनुचित माँगों और इच्छाओं पर नियंत्रण नहीं रखते, तो आप जीवन में असहाय हो जाएँगे… जैसे; “कौरव”

2. आप कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, यदि आप अधर्म का साथ देंगे, तो आपकी शक्ति, शस्त्र, कौशल और आशीर्वाद सब बेकार हो जाएँगे…जैसे; “कर्ण”

3. अपने बच्चों को इतना महत्वाकांक्षी न बनाएँ कि वे अपने ज्ञान का दुरुपयोग करके सर्वनाश कर दें…जैसे; “अश्वत्थामा”

4. कभी भी ऐसा संकल्प न करें..और न किसी को ऐसा वचन दें कि आपको अधर्मियों के सामने समर्पण करना पड़ जाए…जैसे; “भीष्म पितामह”

5. धन, शक्ति, अधिकार और सत्ता का दुरुपयोग और गलत काम करने वालों का साथ अंततः पूर्ण विनाश की ओर ले जाता है… जैसे; “दुर्योधन”

6. सत्ता की बागडोर कभी भी अंधे व्यक्ति को न सौंपे, हमारा आशय यहां आंखों के अंधे से नहीं है। अर्थात ऐसे अंधे से है जो स्वार्थ, धन, अभिमान, अज्ञान, आसक्ति या वासना आदि में लिप्त होने से अंधा हो, क्योंकि इससे विनाश होगा…जैसे; “धृतराष्ट्र”

7. यदि ज्ञान के साथ बुद्धि भी हो, तो आप अवश्य विजयी होंगे…जैसे; “अर्जुन”

8. छल-कपट से आपको हर समय सभी मामलों में सफलता नहीं मिल सकती..जैसे; “शकुनि”

9. यदि आप नैतिकता, धर्म और कर्तव्य का पूरे मनोयोग से पालन करते हैं, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको नुकसान नहीं पहुँचा सकती…जैसे; “युधिष्ठिर”

ध्यान रहे..यहां नुकसान से आशय आर्थिक नुकसान से नहीं था।

“सर्वे भवन्तु सुखिनः – सर्वे सन्तु निरामयाः।”

धन्यवाद

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