
उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्य मंत्री जी!आप भी जानते हो कि प्रदेश के बेरोजगार युवाओं एवं युवतियों के साथ ये प्रयोग लगभग तीसरी बार है। “नौकरी के वादे करो” सरकार में आओ फिर सत्र के लगभग चार वर्ष उन्हें दरकिनार करते करते.. चुनाव से 7 या 8 माह पूर्व नियुक्तियों का सिर्फ एक झांसा दो.. (दिखावा करो) फिर ‘आचार संहिता’ या विज्ञप्ति में जानबूझकर कोई वीक पॉइंट छोड़ कर अपने ही किसी बंदे द्वारा कोर्ट में याचिका डलवा कर एक नया पेंच फंसा दो। ताकि नियुक्तियां न करनी पड़े। चुनाव मे जाने वाले नेताओं की इस घटिया चाल को न केवल जनता अच्छे से जान चुकी है। वल्कि उनके रिकॉर्ड 2010 के बाद से ही उठाकर देखलो! पहले सुश्री मायावती जी फिर श्री अखिलेश जी को इसी यूथ ने सिरे से नकार दिया है। हां लगभग एक दशक बाद पुनः श्री अखिलेश जी की ओर अब कुछ युवाओं में एक झुकाव सा अवश्य आने लगा है।
पीछे काफ़ी वक्त से प्रदेश में क्रियान्वित होती रही नीतियों पर यदि ध्यान दें,तो कुछ ऐसा समझ में आता है कि, अगर पूर्व मुख्य मंत्री मायावती से ‘यादव सरकार’ ने सबक लिया होता, तो उनकी सरकार जिसने.. कई एक कार्यों का बेहतरी से आगाज़ किया था..जैसे आम जनता के लिए..100 नंबर की अर्जेंट एवं विश्वसनीय पुलिस सेवा..देकर, बेरोजगार युवाओं व युवतियों को पूरे एक हजार रुपए महीने का बेरोजगारी भत्ता देने की एक बेहतरीन परंपरा..शुरू करके.. जो अबतक लगभग 10,000 रु हो गई होती। वे एक या सिर्फ दो बच्चों वाले सरकारी कर्मचारियों को एक इंक्रीमेंट या एक मुश्त राशि परिवार कल्याण के नाम से भी दे रहे थे, आपने आते ही सब अच्छी योजनाएं बंद करके पॉपुलेशन बढ़ाने.. व मजदूरों को नाकारा बनाने के लिए अनेकों योजनाएं चला डालीं..एक बात बताऊं ये बेरोजगारी भत्ता व पेंशन कोई खैरात नहीं है.. अंतर्राष्ट्रीय देशों में यू बी आई..अर्थात यूनिवर्सल बेस इनकम के रूप में यूथ को नौकरी दे पाने की सरकार की ओर से हो रही देरी के कारण दी जाती है। आपको पता हो तो देश का शिक्षित/प्रशिक्षित होनहार यूथ सरकार की नैतिक जिम्मेदारी होता है। आज देश व प्रदेश के यूथ को इस कमर तोड़ती महंगाई में ऐसी व्यवस्था की नितांत आवश्यकता है।..दुर्भाग्यवश कुछ घटनाओं ने देश व प्रदेश के यूथ को हिंदू/ मुसमान का ऐसा भय दिखाया और वह ऐसा पथ भ्रष्ट हुआ कि युवाओं की हितैसी यादव सरकार को धरासाई होना पड़ा। ठीक उसी तरह अगर आपने भी प्रदेश के युवाओं एवं किसानों की मूल समस्याओं का आत्ममंथन कर कोई ठोस रणनीति क्रियान्वित नहीं की, तो आप पक्का लिख लीजिएगा इस प्रदेश की जनता आपको भी धकियाने में देर नहीं लगाएगी..अंजाम चाहे जो भी हो। इसलिए युवाओं के बारे में ज़रा ठंडे दिमाग से सोचिए.. सरकारी विभागों से दबाव हटाकर.. वेकेंसी आने दीजिए और तत्काल भर डालिए..प्रदेश का यूथ बड़े मन से आपकी ओर मुखातिव है।धन्यवाद..
आपका अपना ‘युग’ पचहरा