जी, हां गर्मी में “लू लगना” और “लू” लगने से मृत्यु तक हो जाना..!! चलो! आज इस तथ्य को बारीकी से समझने का एक प्रयास करते हैं…
पहले जानें आखिर “लू” से मृत्यु क्यों होती है..? करेंट अफेयर्स पर पैनी नज़र रखते हो, तो आपको पता ही होगा कि, दिल्ली से आंध्रप्रदेश तक….सैकड़ो लोग आजकल “लू” लगने से मर रहे हैं।
धूप में,तो हम सब घूमते हैं फिर आजकल कुछ लोगो की ही धूप में जाने के कारण अचानक मृत्यु क्यों हो जा रही है? विचारणीय है..ध्यान से समझिएगा..
👉 हमारे शरीर का तापमान हमेशा 37° डिग्री सेल्सियस होता है, इस तापमान पर ही हमारे शरीर के सभी अंग सही तरीके से काम कर पाते है।
F 👉 पसीने के रूप में पानी बाहर निकालकर शरीर 37° सेल्सियस टेम्प्रेचर मेंटेन रखता है, लगातार पसीना निकलते वक्त भी पानी पीते रहना अत्यंत जरुरी और आवश्यक है।
👉 पानी शरीर में इसके अलावा भी बहुत कार्य करता है, जिससे शरीर में पानी की कमी होने पर शरीर पसीने के रूप में पानी बाहर निकालने को टालता है। अर्थात बंद कर देता है।
👉 जब बाहर का टेम्प्रेचर 45° डिग्री के पार हो जाता है और शरीर की कूलिंग व्यवस्था लगभग ठप्प हो ने लगती है, तब शरीर का तापमान 37° डिग्री से ऊपर पहुँचना लाज़मी है।
👉 शरीर का तापमान जब 42° सेल्सियस तक पहुँच जाता है तब शरीर का रक्त गरम होने लगता है और हमारे खून में उपस्थित प्रोटीन पकने लगता है ( जैसे उबलते पानी में अंडा पकता है )
F 👉 स्नायु कड़क होने लगते है इस दौरान सांस लेने के लिए जरुरी स्नायु भी काम करना बंद करने लगते हैं।
👉 शरीर का पानी कम हो जाने से रक्त गाढ़ा होने लगता है, ब्लडप्रेशर लो हो जाता है, महत्वपूर्ण अंग विशेषतः ब्रेन तक की ब्लड सप्लाई रुक जाती है।
👉 व्यक्ति कोमा में चला जाता है और उसके शरीर के एक- एक अंग कुछ ही क्षणों में काम करना बंद कर देते हैं, और इस प्रकार उसकी मृत्यु हो जाती है!!!
क्या करें;–
👉गर्मी के दिनों में ऐसे अनर्थ को टालने के लिए लगातार थोडा थोडा पानी अवश्य पीते रहना चाहिए, और हमारे शरीर का तापमान 37° मेन्टेन किस तरह रह पायेगा इस ओर ध्यान देना चाहिए।
चेतावनी!!! के रूप में..
मौसम विज्ञान द्वारा ऐसा पूर्वानुमान लगाया जा रहा है कि, Equinox phenomenon: इक्विनॉक्स प्रभाव अगले 5 -7 दिनों मे एशिया के अधिकतर भूभाग को प्रभावित करेगा।
कृपया 12 से 3 बजे के बीच ज्यादा से ज्यादा घर, कमरे या ऑफिस के अंदर ही रहने का प्रयास करें।
मेरे आर्टिकल के थ्रू आप ऐसा मान सकते हो तापमान अभी कुछ दिन विचलन की अवस्था में रहेगा।
ज़ाहिर है ये परिवर्तन शरीर मे निर्जलीकरण और सूर्यताप की स्थिति उत्पन्न कर देगा।
भौगोलिक ज्ञान रखने वाले अच्छी तरह समझते हैं कि ये प्रभाव भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर सूर्य चमकने के कारण पैदा होते ही हैं।
कृपया स्वयं को और अपने जानने वालों खास कर बच्चों को पानी की कमी से ग्रसित न होने दें।
किसी भी अवस्था में सामान्य लोग कम से कम 3 ली. पानी जरूर पिएं।
किडनी की बीमारी वाले प्रति दिन कम से कम 6 से 8 ली. पानी जरूर लें।
जहां तक सम्भव हो ब्लड प्रेशर पर नजर रखें। किसी को भी हीट स्ट्रोक हो सकता है।
सभी ठंडे पानी से नहाएं।
नौन वैज वाले लोग अभी कुछ दिन मीट आदि का प्रयोग न ही करें तो बेहतर रहेगा।
फल और सब्जियों को अपने भोजन में ज्यादा स्थान दें।
ध्यान रहे “हीट वेव ” कोई मजाक नहीं है!!!
एक बिना प्रयोग की हुई मोमबत्ती को कमरे से बाहर या खुले मे रखकर देख लें, यदि मोमबत्ती पिघल जाती है तो ये स्थिति गंभीर है।
शयन कक्ष और अन्य कमरों में दो आधे पानी से भरे मगर ऊपर से खुले पात्रों को रख कर भी कमरे की नमी बरकरार रखी जा सकती है।
अपने होठों और आँखों को नम रखने का प्रयत्न करें।
भले ही आप “सोशल एक्टिविस्ट” न हों तो भी जनहित मे इस सन्देश को ज्यादा से ज्यादा प्रसारित कर सकते हैं। पूरा पढ़कर अमल करने वालों को पचहरा सर का ह्रदय से धन्यवाद
योगेंद्र सिंह पचहरा, जैन इंटर कॉलेज,सासनी,हाथरस से..
Awesome 👍👌
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Thanks
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