जहां अधिकारी में शुद्ध भाव का विचार..होगा वहां न कोई भेद भाव .. ना ही किसी पूर्वाग्रह से…ग्रसित होने की बू..होगी अपितु पूर्ण मानवतावादी रवैये..को अपने कार्य क्षेत्र में समानता का अम्ली जामा पहनाने वाले हर ऑनेस्ट ऑफिसर ऐसे ही नजीर पेश करते हैं।
ये मंजर उस वक्त का हैं जब बांदा जिले में DM साहब के ड्राइवर ‘ इम्तियाज़ उद्दीन ‘ का रिटायरमेंट हो रहा था..
रोज़ की तरह इम्तियाज़ अपने DM अनुराग पटेल को ऑफ़िस ले गए और वापस लाये।
शाम को DM अनुराग पटेल ने इम्तियाज़ के लिए विदाई समारोह का आयोजन किया..
उन्हें अनुराग जी ने शाल और स्मिर्ति चिन्ह भेंट किये..
विदाई समारोह के बाद इम्तियाज़ उद्दीन जब भीगी आँखों से घर जाने को हुए तब DM अनुराग पटेल स्वयं ड्राइवर सीट पर बैठ जाकर बैठ गए और इम्तियाज़ को अपने बग़ल की सीट पर बैठने को कहा!..
इम्तियाज़ ने मना किया ..नहीं सर !! मैं किसी भी तरह चला जाऊंगा आप परेशान न हों।
मगर DM साहब अनुराग पटेल नहीं माने..आखिर इम्तियाज को बैठना ही पड़ा। जैसे ही इम्तियाज़ बैठे तभी अनुराग पटेल जी ने उनसे पूछा! “तो साहब अब चलें?” ड्राइवर महोदय भाव विभोर तो हो ही रहे थे। बस अब तो ..अपने साहब के मुहँ से ऐसी बात सुनकर इम्तियाज़ रोने लगे,.. और वहां पर मौजूद तमाम कर्मचारियों की आँखें भी इतनी खुशी वरदास्त न कर सकीं नम हो गयीं।
वाकई, DM अनुराग पटेल अपने ड्राइवर इम्तियाज़ को उनके घर तक स्वयं ‘ड्राइवर’ बन कर छोड़ने गए रिटायरमेंट का ऐसा नायाब तोहफ़ा शायद ही किसी DM ने कभी अपने ड्राइवर को दिया हो..
वाह! अनुराग जी वाह!!!
वाकई डी एम साहब आप सच में बधाई के पात्र हैं। ऐसे ऑफिसर्स सदैव अनुकरणीय होते हैं। जिनके हर छोटे बड़े कार्य में सीख का संदेश होता है। आपके ऐसे उच्च एवं ‘समानता’ के विचार को मेरा शत शत नमन
थैंक्स फॉर रीडिंग
पचहरा सर, जैन कॉलेज सासनी वाले