207- कर्मफल

जी हां !!कर्मफल!!

किसी के साथ कुछ गलत करते हो या करने जा रहे हो तो भले ही करिए..परंतु ये भी सुनिश्चित मान लीजिये!! कि, एक दिन नियति के निशाने पर आप भी अवश्य आयेंगे।

क्योंकि ये दुनियां का दस्तूर है कि,”कोई भी “कर्म” बिना फल दिये न आजतक रहा है ना ही कभी रहेगा।”

हो सकता है आज सारी स्थितियां, शक्तियां तुम्हें अपने पक्ष में दिख रही हों.. तो स्वाभाविक ही है तुम रोके से भी ना रुको.. पर कल को जब इन कर्मो का कठोर दंड तुम्हें और तुम्हारी संतान को चुकाना होगा तब तुम जरूर सोचोगे काश! उस समय सबकुछ मेरे पक्ष में ना रहा होता.. तो आज हमें ये मर्मांतक दर्दनांक पीड़ा सहन ना करनी पड़ती!!

किसी को छल, कपट, पाप या किसी भी तरह का अत्याचार करने से पूर्व हजार बार सोचना चाहिए कि, जब भुगतने का वक्त आएगा तब क्या मुझ में या मेरी संतान में इसे झेलने का बूता होगा, क्या उस वक्त हमारे में इतना जिगरा होगा??

क्योंकि नियति किसी को मांफ नहीं करती। प्रत्येक इंसान इतना तो सदैव याद रखें।

चलो! आज एक ताजातरीन उदाहरण आपकी नजरों के सामने पेश करता हूं..

“पुलिस के दावे के अनुसार, अतीक अहमद की जिद पर उसके बेटे असद को उमेशपाल हत्याकांड में जानबूझ कर शामिल किया गया था। उससे गोलियां चलवाई गई। बाद में जब उमेशपाल हत्याकांड में असद का नाम आया था। तब अतीक की पत्नी शाइस्ता ने अतीक़ अहमद को साबरमती जेल में फोन किया था। असद की गोली चलाते हुए सी सी कैमरे की फुटेज सामने आने के बाद शाइस्ता ने अतीक अहमद से रोते हुए कहा था,‘असद हमारा बच्चा है और उसे इस मामले में आपको नहीं डालना चाहिए था।’

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, शाइस्ता द्वारा नाराजगी जाहिर करने के बाद अतीक ने उसे डांटते हुए कहा था,“असद की वजह से 18 साल बाद चैन की नींद सो पाया हूं. उमेश पाल के चलते मेरी नींद हराम हो गई थी। असद मेरा बेटा है उसने मेरे आदेश का पालन किया है। चिंता की कोई बात नहीं है। मै सब मैनेज कर लूंगा”

एक क्षण जरा सोचिए! अपने हत्यारे बेटे के लिए इनके मन में इतनी ममता है..तभी तो कह रहे हैं कि,’वह तो बच्चा है।’ और उन हजारों मासूमों की पीड़ा अपने पाप और अपराध की कमाई पर आलीशान जिंदगी जीनेवाली औरत ने क्या कभी समझी थी, जिनको स्वयं इसके पति ने खून के आँसू रोने के लिए मजबूर कर दिया था। ना जाने कितनी महिलाओं के साथ अतीक अहमद के गुंडों ने बलात्कार किया, ना जाने कितने ही नन्हे मुन्ने बच्चों के सिर से बाप का साया छीन लिया, ना जाने कितने अरबों की धन संपत्ति हड़पकर..तथा उनके विरोध करने पर बेरहमी से उनकी हत्या करदी। उन बेचारों के आंसू इस औरत को तनिक भी नहीं दिखाई दिए थे। फिर आज अपने बेटे के लिए अपने मन में इतनी करुणा कहां से ले आई..?

किसी ने सच ही कहा है कि, “खुद की संतान की लाश ही दुनियां का सबसे भारी बोझ है।”

आज शायद निष्ठुर शाइस्ता और अतीक अहमद को उन हजारों निर्दोष लोगों का दर्द समझ में आ रहा हो.. जिनके गोद के लाल इन्होंने अपनी हैवानियत से छीन लिए थे।

ये उदाहरण अतीक के साथ साथ उन के लिए भी ‘ Eye-Opener 👁️ का काम कर सकता है जो कर्मफल को नहीं मानते..या विधि के विधान की..या दुनियां के ‘पूर्व निर्धारित व्यवस्था वाले’ कार्यक्रम में विश्वास नहीं करते!!

सभी को ध्यान रहे आज यदि किसी के साथ आप रंचमात्र भी छल,कपट अर्थात एक पैसे की भी चालाकी या किसी भी तरह की कोई धांधली कर रहे हैं,किसी की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं..तो अभी भी वक्त है..तुरंत रुक जाइए!!

जितनी जल्दी हो सके..अपने आपको एकदम बदल डालिए..!! ट्रांसफॉर्म हो जाइए

वरना!! ये कर्मफल का चक्र एक दिन इसी प्रकार आप तक भी अवश्य पहुंचना है, इसमें किंचित मात्र भी कोई संदेह नहीं है।

क्योंकि हमारे बड़े बुजुर्ग सदैव कहते रहे हैं कि, “दुनियां में देरी है..मगर अंधेरी कतई नहीं है।” आर्टिकल पढ़ने के लिए धन्यवाद🙏🏻

पचहरा सर, जैन कॉलेज,सासनी वाले

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