जो.. जो..हम जानते हैं, क्या वे सब अपने रोज-मर्रा के जीवन में हम मानते भी हैं..? अर्थात पालन भी करते हैं।
सवाल; अनुपालन करने का है। क्या हम वे सब अनुपालन कर पाते हैं????
जैसे;
परिवार में “पिता”
घर में “नारी”
समाज में “गुरु”
संस्था में “अधिकारी”
एवं
देश की सत्ता पर काबिज़ “राजा”
भले ही शारीरिक – संरचना से ये हमें मानव दिखते हों..
मगर ये कभी भी “साधारण-मानव” नहीं होते..
दरअसल,ये होते हैं “महामानव”
इसीलिए इनके साथ हमेशा तहज़ीब से पेश आना चाहिए..
क्योंकि,
“निर्माण” और “प्रलय” का धरती पर जब भी क्रियान्वयन हुआ है..
सदैव इन में से ही किसी के हाथों हुआ है।
(मेरे विचार पर संदेह हो.. तो इतिहास में झांक लीजिएगा।)
पचहरा सर, नीमगांव वाले
राधे गोविंद..राधे गोविंद..