‘मृत्यु’ एक हकीकत है। इसमें कोई दोराय नहीं.. मगर भौतिक दृष्टि से ये सवाल भी अपने आप में अहम है.. “कि ‘योग’ बेचारा इन परिस्थितियों में करता ही क्या….???
चलो! थोड़ा आगे बढ़ते हैं। पढ़ने सुनने में तो लोगों को ये कहानी ही लगेगी विश्वास कीजिए इसमें किसी के जीवन की सच्चाई है..
एकबार की बात है.. ‘योग’ नामक युवक जिसकी गुणवान बीवी जो सूरत और सीरत दोनों से ही बहुत सुंदर थी। उनके प्यारे प्यारे दो बच्चे भी थे। योग ने अपने जीवन में संघर्ष करके.. शहर की पॉश कॉलोनी में अपने सपनों का एक छोटा सा घर भी बना लिया था। वह स्वभाव से गम्भीर तथा विचारशील व्यक्ति था। “योग” पत्नी के साथ साथ अपने परिवार में सभी से बेहद प्यार करता था।
ये अलग बात है कि योग को अपना प्यार व स्नेह जताना कभी आया नहीं।
इसके अलावा वह अपने इष्ट ‘श्याम जी’ का तो लगभग दीवाना था। और योग अपनी सामर्थ्य के मुताबिक संपर्क में आने वालों के प्रति अपने दिल में काफी दया भी रखता था। इसीलिए अपनी सामर्थ्य के अनुरूप उससे जो बन पड़ता,जरूरतमंदो के लिए चुपके से करता रहता।
अपने जानते उसने कभी किसी को कोई दुःख नहीं दिया। उसकी ऐसी विशेषताओं के कारण “श्यामजी” उससे बहुत प्रसन्न थे। वे सदैव उसके साथ हैं। विश्वास कीजिएगा इष्ट सदैव अपने भक्त के साथ ही होता है। कुछ भी करते कराते..सभी भक्तों के मन की आंखें हरपल अपने इष्ट में ही होती हैं। कभी आवश्यक होने पर मन ही मन उनके साथ बातें भी हो जाया करती हैं।
लेकिन इसके बावजूद योग ने व्यक्तिगत तौर पर कभी अपने श्यामजी से कुछ माँगा नहीं। अध्यात्म में इसी को निष्काम भक्ति कहा गया है।
योग स्वाभाविक रूप से अपनी कर्मशीलता में हमेशा खुश रहता। क्यूंकि वह सदैव अपने श्याम जी के साथ होने की अनुभूति में जो जीता है। कुल मिलाकर वह अपने जीवन से लगभग संतुष्ट था। विश्वास कीजिएगा योग अपने जीवन में होश संभालते ही श्यामजी के मार्गदर्शन से ही सब कुछ करता चला जा रहा था।
मगर वक्त ने ऐसी करवट बदली.. कि,बस कुछ मत पूछिए.. श्याम जी की अनन्य भक्त योग की कर्मशील पत्नी की अचानक दो एक बार तबियत क्या ख़राब हुई.. उन्हें हॉस्पिटलाइज होना पड़ा। आराम मिलने पर घर के लिए रिलीव भी होकर आईं।
लेकिन ‘ नियति ‘ के खेल बड़े निराले होते हैं।अधिकांश ऐसे सीन आखिर में ही कुछ कुछ समझ आते हैं.. उस वक्त न जाने क्यों हिय माथे की सब फूट जाती हैं।
विडंबना देखिए! डॉक्टर्स उनकी बीमारी को ठीक से डाईग्नोस ही नहीं कर सके, तो वे इलाज क्या खाक करते…
योग ने अपनी ‘जिंदगी’ को बचाने के लिए प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से अपनी पूरी ताकत लगा कर देख ली।
लेकिन स्थानीय पैथोलॉजी की गलत रिपोर्ट्स पर चलते ट्रीटमेंट से कोई लाभ न मिल पाने से कुछ एक पारिवारिक सदस्यों का दवाब..,बना। वहीं कुछ रिश्तेदारों के सुझाव .. ,
अनभिज्ञ डॉक्टर्स का परामर्श आदि। परिस्थितियों वश ‘किंकर्तव्यविमूढ’ ‘योग’ आनन फानन में अपने दोनों बच्चों को साथ लेकर हर कीमत पर अपनी जिन्दगी को बचाने की दिल में उम्मीद लिए बड़े शहर में बड़े हॉस्पिटल्स की बड़ी बड़ी सुविधाओं..की ओर चल पड़ा..(आज उसे ऐसा लगता है कि, कृत्रिम ऑक्सीजन की अती..ने उसकी जिंदगी को निगल लिया।)
नियति के खेल देखिए.. वहां के डॉक्टर्स अच्छी खासी लूट करते करते भी तसल्ली के बजाय योग का दिल बैठाने की बातें एकबार नहीं बार बार कहते रहे..कि, वो उनके स्वास्थ्य के संबंध में “अभी भी कुछ नहीं कह सकते!! आप रुपए पैसे का इंतजाम कर लीजिएगा..पता नहीं इन्हें यहां कब तक रखना पड़े। यदि इस पर योग कुछ बोलने को होता, तो डॉक्टर्स तपाक से कह देते..कि हम और आप अभी यहां बात कर रहे हैं। क्या पता उधर वो निकल लें…”बगेरा..बगेरा.. अब बताइए.. ‘योग’ क्या कर सकता था..??’
क्योंकि ऑपरेटेड पेशेंट को कोई दूसरा हॉस्पिटल आसानी से लेता कब है??
हॉस्पिटल में मिलने आने वाले सभी लोगों ने यहीं इलाज होते रहने.. की बात के साथ साथ योग से भगवान् पर भरोसा रखने की तसल्ली के लिए ही बोला। लेकिन इलाज कहां वहां तो उनकी हर सांस पर लुटाई चल रही थी। तभी योग को अपने श्याम जी का ख्याल आया..सौभाग्य से हॉस्पिटल के बराबर में बने ‘श्यामजी’ के प्राचीन मंदिर पर जाकर उसने श्याम जी को पुकारा.. यद्यपि लौकिक लोग भक्ति भाव की इन अलौकिक बातों पर विश्वास नहीं कर सकते…
मगर योग के मन मंदिर में तुरंत श्याम जी दौड़े चले आए। योग ने कहा हे सखा! तुम्हें तो लोग भगवान कहते हैं मेरी ‘जिंदगी’ बहुत परेशान है। प्लीज उसे बचा लो। श्यामजी बोले – जिंदगी बचाना तो मेरे भी हाथ में नहीं हैं।
“हानि,लाभ,जीवन,मरण,यश, अपयश” ये सब विधि का विधान होते है। जो प्रारब्ध के अधीन पहले ही नियत हो जाते हैं ये सुनकर योग श्यामजी से नाराज हो गया।
यही सांसारिकता है। क्योंकि जब इंसान पर विकट परिस्थितियां आती हैं, तो उस वक्त उसका अध्यात्म शून्य हो जाता है। और भौतिकता हावी हो जाती है।
इसीलिए योग लड़ने लगा, गुस्से में उन्हें कौसने भी लगा। परम सत्ता ने उसे बहुत समझ देने की कोशिश की, लेकिन जिसकी दुनियां लूट रही होती है उसे कुछ समझ नहीं आता।
तब श्याम जी ने उससे कहा – चलो!, मेरी एक बात सुनो! मैं तेरी एक मदद कर सकता हूँ। लेकिन इसके लिए तुझे एक काम करना होगा। योग ने तुरंत पूछा कैसा काम ?
तुम्हे ! किसी ऐसे परिवार से एक मुट्ठी ज्वार लानी होगी। जिस घर में कभी कोई मौत न हुई हो।
बेचारा योग आवेश में झट से हाँ बोल दिया..और ज्वार की तलाश में निकल पड़ा। उसने कई दरवाजे खटखटायें। हर घर में ज्वार तो मिलती लेकिन ऐसा कोई नहीं होता जिनके परिवार में किसी की मृत्यु ना हुई हो। किसी का पिता, किसी का दादा, किसी का भाई, माँ, काकी या बहन आदि.. दो दिन तक भटकने के बाद भी योग को ऐसा एक भी घर नहीं मिला।
तब थक हार जाने व कुछ वक्त बीत जाने के बाद उसे इस बात का अहसास हुआ कि मृत्यु एक अटल सत्य हैं। जो बहुत कॉमन है। इसका सामना सभी को करना ही होता है। इससे कोई नहीं भाग सकता। तब फिर अपने व्यवहार के लिए वह अपने सखा श्याम जी से क्षमा मांगता हैं और निर्णय लेता है जब तक वह खुद जीवित है तब तक वह अपनी गुणवान पत्नी की हर उचित बात को ध्यान करके उनकी यादों को अपनी ताकत बनाएगा और दिन प्रति दिन आगे बढ़ता रहेगा। खुद से भी अधिक सदैव उस देवी के बच्चों का ख्याल रखेगा।
दरअसल, पत्नी जो इंसान की ‘जिंदगी’ का पर्याय होती है। उसके लिए इससे उचित विनयांजली व श्रद्धांजली और क्या हो सकती है।
दोस्तों ! इसी प्रकार हम सबको ये सच स्वीकार कर ही लेना चाहिये कि, “मृत्यु एक अटल सत्य हैं ” उसे स्वीकार न करना मुर्खता हैं। दुःख होता है। लेकिन उस दुःख के जाल में फँसे रहना तो बहुत ही गलत है। क्योंकि केवल आप ही उस दुःख से पीड़ित नहीं हैं। अपितु सम्पूर्ण मानव जाति देर सबेर उस दुःख से रूबरू होती ही है। क्योंकि “मृत्यु एक हकीकत है” इस सच को स्वीकार करके आगे बढ़ना .. ही असल “जीवन” हैं।
कई बार हम अपने किसी खास के चले जाने से इतने बेबस हो जाते हैं कि, सामने खड़ा जीवन और उससे जुड़े लोग उस वक्त हमें बिल्कुल दिखाई नहीं पड़ते। ऐसे अंधकार से निकलना मुश्किल तो है मगर नामुमकिन नहीं।
जो मनुष्य मृत्यु के सत्य को स्वीकार कर लेता है। उसका जीवन भार विहीन हो जाता हैं और उसे कभी कोई कष्ट तोड़ नहीं पाता। वो जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ता चला जाता हैं।
मित्रो! सदैव प्रसन्न रहिये। जो प्राप्त है,दरअसल, वही पर्याप्त होता है।।
पचहरा सर नीमगाँव से 🙏