If you like to see it in comparatively..the old leaders & today’s leaders, you would understand..the character of today’s leaders well..
आज के नेताओं की बिना ‘सिर-पैर’ की बातें जिन्हें लोग “राजनीति” समझते हैं..वह राज्य चलाने की नीति नहीं ये तो इन वाहियात नेताओं की उच्छ्रंखलता है। इसे हम आजकल पड़ रही ठंड को चित्रांकित करते हुए एक व्यंग्य के द्वारा इनके स्तर को रेखांकित करने का प्रयास.. करते हैं।
“ओह! ये ठंड!”
महज़ एक व्यंग
😜😜
देश भर में पड़ रही, कंपकपाती ठण्ड पर विभिन्न दलों के आजकल के नेताओं के चरित्र को देखते हुए राय कुछ इस प्रकार हो सकती हैं।🤣🤣
भाजपा:- ये कंपकपाती ठण्ड “सबका साथ, सबका विकास” का बहुत अद्भुत उदाहरण हैं। ये ठण्ड किसी जाति, धर्म का भेदभाव किए बिना सभी पर समान रूप से पड़ रही हैं। हम इस सद्भावनापूर्ण ठण्ड का स्वागत करते हैं। ये ठंड मोदी सरकार के अथक प्रयासों की देन है।
कांग्रेस:- ऐसा नही हैं कि, ये ठण्ड हमारी सरकार में नही पड़ती थी, पड़ती थी किन्तु ऐसी भेदभावपूर्ण, विद्वेषपूर्ण ठण्ड आज से पहले कभी नही पड़ी। हम मोदी सरकार से पूछना चाहते हैं..अल्पसंख्यक इलाकों में ही अधिक ठण्ड क्यों पड़ रही हैं?..लोकतंत्र में इतनी ठण्ड बर्दाश्त नही की जा सकती। हम संसद में इस कंपकपाती ठण्ड पर एक बहस चाहते हैं।
केजरीवाल:- हम पूछना चाहते हैं, मोदी जी से.. आखिर लोकसभा चुनाव 2024, के ऐनवक्त पहले ही इतनी ठण्ड क्यों पड़ वाई जा रही है?… पिछले सीज़न में इतनी ठण्ड क्यों नही पड़वाई थी..?.. मोदी सरकार अधिक ठण्ड पड़वाकर वोटरों को डराना चाह रही हैं। ये मौसम और मोदी जी आपस में मिले हुए हैं। हम विधानसभा का विशेष सत्र बुलवाकर इस षड्यंत्र का पर्दाफाश करेंगे। 🤣🤣
मायावती:- इतनी ठण्ड भीम क्षेत्रों में ही क्यों पड़ रही हैं?.. ये मनुवादी ठण्ड है। ये ठण्ड असंवैधानिक हैं। ये ठण्ड संविधान के खिलाफ है। हम इस ठिठुरती ठण्ड के खिलाफ राष्ट्रपति जी को ज्ञापन सौंपेंगे।
ममता:- हम पूछना चाहता हाय! दिसंबर जनवरी में ही इतोना थोण्ड क्यों..?.. दिवाली पोर क्यों नही?.. ओल्पसंख्यक इलाका में ही इतना थोण्ड क्यों?.. ये थोण्ड सोम्प्रदायीक थोण्ड हाय.. ये थोण्ड सेक्युरिज्म का खिलाफ हाय.. हम इस थोण्ड का बोंगाल में पड़ने पर प्रोतिबन्ध लोगाता हाय.. हम सोमस्त सेक्युलर ताकतों से ओपील कोरता हाय.. इस सोम्प्रदायीक थोण्ड का खिलाफ इकोट्ठा हो। का का छि छि… का का छि छि..
ओबेसी:- संविधान में ये कही नही लिखा, इतनी कंपकपाती ठण्ड पड़नी चाहिए। ये सरकार संविधान के खिलाफ काम कर रही हैं। अगर कोई मेरी गर्दन पर ” बर्फ की सिल्ला” भी रख दे, तो भी मैं गर्म कपड़े नही पहनूंगा। हम इस हिटलर ठण्ड की मज़म्मत करते हैं। घोर विरोध करते हैं।
वामपंथी:- ये ‘ठण्ड’ न चीन में पड़ रही हैं, न रूस में। अतः हमारा इससे कोई लेना-देना नही हैं। और अंत मे,
रविश कुमार:- क्या मोदी सरकार केंद्र के चुनाव चुनाव के ऐनवक्त पहले ऐसी ठण्ड पड़वाकर चुनाव जीतना चाहती है..? पूरे देश मे एक जैसी ठण्ड न पड़वाकर क्या मोदी सरकार देश को बांटना चाह रही हैं?.. क्या सरकार इतनी ठण्ड पड़वाकर बेरोजगारी, आर्थिक मंदी, CAA से देश का ध्यान भटकाना चाहती हैं?.
. ☺️😊 जवाब दे मोदी सरकार…☺️😊
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विचारक ; योगेंद्र सिंह पचहरा
😂😂😂😂
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
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