जी हाँ पार्ट-2….
मेरा उद्देश्य है आने वाली जेनरेशन हमारी सनातनी-तहज़ीब अर्थात भारतीय संस्कृति को न केवल समझें वल्कि उन्हें इसकी जानकारी ठीक से होनी चाहिए।
मानता हूँ ये “माइंड ओवर मैटर” है। मगर मैं इसे आपके साथ शेयर करने की हिमांकत ‘सर्वजन हिताय..’ की दृष्टि से कर रहा हूँ। वरना मेरी क्या विसात है आपको ‘राइट-ट्रैक’ करने की।
दूसरे इसलिए भी कि, मेरा अनुभव कहता है..ऊपर गौलोक में जाने पर शायद प्रत्येक जीवात्मा से एक सवाल अक्सर पूँछा जाता है..? जिसे अधिकतर जीवात्मा बता नहीं पातीं हैं।
“आप!!.. अपनी अँगुलियों के नाम बताइए..?”
जवाब:- अपने हाथ की छोटी उँगली से शुरू करके :- (1)जल (2) पृथ्वी (3) आकाश (4) वायू (5) अंगूठे को अग्नि बताते चले जाएं
ये वो बातें हैं जो सही वक़्त पर बहुत कम लोगों को याद रह पाती हैं। अक्सर भूल ही जाते हैं। जैसे;
5 जगह हँसना करोड़ो पाप के बराबर है
1. श्मशान में 2. अर्थी के पीछे 3. शोक में 4. मन्दिर में और 5.किसी भी कथा में ।
मेरे विचार से यदि हमने इसका अपने जीवन में अनुपालन कर लिया, तो जाने अनजाने में होने वाले बहुत से पापो से बचा जा सकता है। ।।
अकेले हो? परमात्मा को याद करो ।
परेशान हो? ग्रँथ या अपनी पसंद की पुस्तकें पढ़ो ।
उदास हो? कथाएं पढो ।
किसी तनाव में हो? भगवत गीता पढो ।
फ्री हो? अच्छी चीजे अपने प्रियजनों को फोरवार्ड करो..और कहो..
हे ! परमात्मा हम पर और समस्त प्राणियो पर कृपा करो…… इंगित क्या करें आप सब जानते हों ?
हिन्दू ग्रंथ रामायण, गीता, आदि को नियमित पढ़ने-सुनने से व्यक्ति की भयंकर बीमारियां तक टल जातीं हैं।
आरती—-के दौरान ताली बजाने से हमारा दिल मजबूत होता है ।
व्रत,उपवास करने से चेहरे का तेज़ बढ़ता है,सर दर्द और बाल गिरने से भी बचाव होता है
केवल आसुरी-प्रवृत्ति के लोग इसे न तो गम्भीरतापूर्वक पढ़ेंगे और नहीं अनुपालन में ही रुचि दिखायेंगे..मग़र..मैंने तो सर्वजन हिताय की दृष्टि से लिख दिया है।.
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”कैन्सर” एक खतरनाक बीमारी है…जाने अनजाने में बहुत से लोग इसको खुद दावत देते हैं …
अक्सर लोग खाना खाने के बाद “पानी” पी लेते है … खाना खाने के बाद “पानी” ख़ून में मौजूद “कैन्सर “का अणु बनाने वाले ”’सैल्स”’के लिए ”’आक्सीजन”’ पैदा करता है…
जबकि, बहुत मामूली इलाज करके इस बीमारी से काफी हद तक बचा जा सकता है …
”ग्रंथो की मानें तो… खाने से पूर्व थोड़ा जल ले लेना अमृत”है..
. खाने के बीच मे जल ‘ पीना शरीर की ”पूजा” है..
. खाना खत्म होने से कुछ पहले ‘जल’ लेना औषधि” है…
लेकिन खाने की समाप्ति पर तुरन्त बाद ‘जल’ लेना” अनेक बीमारियों का घर है…
खाना खत्म होने के कुछ देर बाद..स्वतः प्यास लगने पर जल लेना सबसे उत्तम है।.
ये बात उनको अवश्य बतायें जो आपको अपनी “जान” से भी ज्यादा प्यारे है।
रोज एक सेब नो डाक्टर ।
रोज पांच बदाम, नो कैन्सर ।
रोज एक नीबू, नो पेट बढना ।
रोज एक गिलास दूध, नो बौना (कद का छोटा)।
रोज 12 गिलास पानी, चेहरे पै तेज।
रोज चार काजू, नो भूख ।
रोज मन्दिर जाओ, तनाव रहित जीवन जियो ।
“आंखों के लिए ताजा पानी”।
“मन के लिए गीता की बाते”।
“शरीर की आंतरिक मशीनरी” अर्थात सेहत के लिए योग ।
और खुश रहने के लिए जब भी समय मिले सदैव परमात्मा एवं अपने प्रियजनों से सम्बंधित यादों की नगरी में चले जाएं।
अच्छी बाते फैलाना पुण्य है. ऐसा करके किस्मत में करोड़ो खुशियाँ स्वतःलिख जाती हैं ।
जीवन के अंतिम दिनो में इन्सान इक इक पुण्य के लिए तरसता है।। जब-जब अच्छे मैटर शेयर करोगे..पुण्य मिलेगा..ही।
युग की..कलम से..
जय माँ शारदे 💐हमें सदबुद्धि दो
मेरा आपसे एक सवाल हे की किन्तु मुझे इस सवाल का जवाब नहीं पता हैं किया आप मुझे बता सकते है कि रोग कितनी प्रकार के होते हे और सबसे भयंकर रोग कौन सा है
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