जी हां, प्रो.बी.बी. “लाल” ( बृज बासी लाल) अपनी कर्मशीलता के दम पर वाक़ई देश का “सच्चा-लाल” है। स्थूल रूप में भले ही वे आज हमारे बीच नहीं हैं मगर अपने कर्म और विचार से वे हर भारतीय के दिल में आज भी मौजूद हैं और हमेशा रहेंगे।
मग़र गुस्ताख़ी कहूँ या विडम्बना समझ नहीं आता।! एलिजाबेथ की मौत पर भारत के काफी लोग और मिडिया बार बार खबर दिखाते रहे कि एलिजाबेथ क्या-क्या करती थी, क्या खाती थी केसे सोती थी बगैरह..बगैरह..
मेरे विचार से भारतीय मीडिया के भटकाव की पराकाष्ठा है। क्योंकि कल रात्रि (10 सितंबर,2022) को भारत के एक महान भू-स्तर शास्त्री और इतिहासकार “प्रो.बी बी लाल” का गत रात्रि को नई दिल्ली में निधन हो गया। उनका जन्म 02 मई 1921 को झांसी में हुआ था । उनकी मृत्यु लगभग १०० वर्ष से अधिक आयु में हुई है। दूसरे वे देश की धरोहर हैं.. बहुत ही सम्मानित व्यक्तित्व है। परन्तु इस बारे में मीडिया अर्थात टीवी चैनल्स अथवा दूसरे संचार साधनों में कोई खबर नहीं थी ।
जबकि आप इस व्यक्तित्व की खाशियत समझिए.. रामायण, महाभारत, वेद उपनिषद आदि को स्कूली किताबों में जब महज़ एक मैंथ्योलोजी बता दिया गया था, राम और कृष्ण को काल्पनिक पात्र कह दिया गया, इन सभी षडयंत्रकारियों को प्रो. बी बी लाल जैसे व्यक्तित्व ने न केवल सिरे से ख़ारिज किया अपितु दुनियाँ के सामने उन्हें झुठा भी सिद्ध किया था।
राम मंदिर जो अभी अयोध्या में बनाया जा रहा है.. जो कभी सिर्फ एक पॉलिटिकल मुद्दा लगता था। इसलिए वहाँ मन्दिर बनना एकअसम्भव सी बात लगती थी, इसे सम्भव कर पाने के मूल में बेहद कर्मशील प्रो. बी.बी. लाल ही थे। जिन्होने ये साबित किया था कि राम मंदिर नामक देवालय वही था जिसे बाबर ने तोड़ दिया था।। प्रो. बी बी लाल के कारण ही भारत के हिंदुओ को पता चला है कि रामायण और महाभारत कोई काल्पनिक नही हैं। ये सच में घटित हुई घटनाये थी। बी बी लाल ने ही द्वारिका नगरी पर शोध किया था। कि,समुद्र में द्वारिका है इसे अपनी रिसर्च से सिद्ध भी किया।
भारत के रामायण और महाभारत काल के अवशेषों को खोज कर के उन्होंने ढेरो रिसर्च की थी। उनकी इन अनगिनत सेवाओं के आधार पर ही आज हम लोग उन अंग्रेजों और मुगलों के गुलाम बामपंथी हिंदूओ के मुंह बन्द करवा पाए हैं जो राम को काल्पनिक साबित करने पर तुले हुए थे।
इतिहास में लिखी हुई इस थ्योरी को भी झूठा साबित कर सिरे से खारिज कराया कि, ‘आर्य लोग बाहर से आए थे’ अब आप ही सोचिए कितने शर्म की बात है !! ऐसे व्यक्तित्व, के निधन को एक भी मिडिया या न्यूज पेपर में कहीं भी नही दिखा गया। क्या ये कोई इत्तेफाक हो सकता है..? उस वक्त सब के सब ब्रिटेन की रानी के पीछे पड़े हुए थे। आखिर देश में ये हो क्या रहा है..? हम किधर जा रहे हैं।
प्रो. बी बी लाल की महत्वपूर्ण पुस्तकें है:- “इंद्रप्रस्थ : द बेकिंग टाइम ऑफ दिल्ली”और एक है…. “टाइम्स ऑफ ऋग्वेद एरा पीपल्स” (ऋग्वेद के समय के लोग और व्यवस्था) और कई सारी पुस्तके हैं जिन्हें पढ़ना अपने आप में एक बहुत बड़ी बात है और इतनी अच्छे तरीके से उसमे साक्ष्य दिए गए है कि आपका भी पुस्तक को १०-२० बार पढ़ने का मन हो जाएगा।
ऐसे अविस्मरणीय व्यक्तित्व को मेरा सादर नमन और विनम श्रद्धांजलि 🙏🪷🙏